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रामदेव के मुंह पर लोकतंत्र की स्याही – निहितार्थ

Posted On: 17 Jan, 2012 में

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ink attackराजनीति में आने की मंशा लिए रामदेव बाबा ने काले धन को वापिस लाने की मुहिम को हवा तो दे दी, लेकिन वह अपने आह्वान पर कायम नहीं रह पाए और ना ही जनता के विश्वास को ही जीत पाए. रणनीति बनाने की तो बात छोड़ ही दीजिए जबसे मीडिया में उनके साड़ी पहनकर अनशन स्थल से भाग जाने की खबर आई है तब से वह कहां गायब हो गए किसी को कुछ नहीं पता. अपने समर्थकों को पुलिस के हवाले छोड़ कर रामदेव के वहां से भाग जाने के कारण उनकी कायरता और निष्ठा की पोल सबके सामने खुल गई.


हालांकि हमें बहुत दिनों तक उनके दुर्लभ दर्शनों से वंचित रहना पड़ा लेकिन शायद उनका गायब रहना ही उनके लिए अच्छा था. क्योंकि जैसे ही उन्होंने एक बार फिर लोकप्रियता बटोरने की कोशिश की, उन्हें एक बार फिर जनता की बेरुखी का सामना करना पड़ा. हाल ही में एक प्रेस कांफ्रेंस में एक व्यक्ति ने रामदेव के मुंह पर काली स्याही फेंककर अपना विरोध जाहिर किया. रामदेव पर फेंकी गई यह स्याही भले ही किसी सिरफिरे का काम बताया जा रहा हो लेकिन निश्चित रूप से यह उसी जनता की आवाज है जिसे हमेशा से ही दबा-कुचला बना कर रखा गया है.


काली स्याही से रंगा रामदेव का चेहरा साफ प्रदर्शित कर रहा था कि अब जनता ना तो भ्रष्टाचारी सरकार पर विश्वास करती है और ना ही तथाकथित तौर पर सरकार का विरोध करने वाले बहरूपियों पर.


स्वयं रामदेव और उनके अंधे भक्त भले ही इस हमले को विपरीत उद्देश्य वाले लोगों की साजिश या कोई गहरा षड्यंत्र करार दे रहे हों लेकिन वास्तविकता यह है कि जनता अब और अधिक विश्वासघात सहन नहीं कर सकती. उसे अब आए दिन सरकार या तथाकथित समाज सुधारकों द्वारा दिए जाने नए-नए वायदों से छुटकारा चाहिए.


वैए तो जनता की आवाज को नकारना या उन्हें दबा देना हमारे गणतंत्र की पहचान रही है, इसी कड़ी में रामदेव के समर्थकों द्वारा उस व्यक्ति की सरेआम पिटाई करना लोकतंत्र को चुप कराने की कोशिश का एक ज्वलंत उदाहरण है. खुद को जनता का मसीहा कहलवाने वाले रामदेव ने अपनी महानता का परिचय देते हुए अपने हमलावर को माफ कर देने का ढोंग तो रचा दिया लेकिन उनकी माफी अब कोई मायने नहीं रखती. उनके चेहरे पर पड़ी काली स्याही के धब्बे परिवर्तन की मांग उठा रहे हैं. अब वे लंबे समय से होने वाले अन्याय और अत्याचारों का जवाब चाहते हैं.


भारत की जनता को पहले कुर्सी पर बैठे भ्रष्टाचारियों से निपटना पड़ता था लेकिन अब उनकी लड़ाई ऐसे बहरूपियों से भी है जो अपने मनगढ़ंत वायदों के साथ जनता को असहाय छोड़कर खुद मुनाफे और लोकप्रियता की रोटियां सेंकते हैं.




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146 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Madan Mohan saxena के द्वारा
April 27, 2015

तमन्ना जी सुन्दर और सार्थक रचना बहुत कुछ बोलती हुई .आभार कभी इधर भी पधारें

aryasanskritikendra के द्वारा
May 24, 2012

आपने जो लिखा है वह छोटा मूह और बड़ी बात जबही है | तमन्न्जी अगर आप रामदेवजी की जगह होती तो क्या करती | आप से अच्छी तो राजबाला ही थी जिसने रामदेवजी के शांतिपूर्वक अन्धोलन के लिए अपना बलिदान दे दिया | आप के लिए तो रामदेवजी गायब हो गए जब की भारत सरकार उन्हें हेलिकोप्टर में बिठा हरद्वार ले गई | रामदेवजी के समर्थकों अब भी उनके साथ हैं | कायर लोग तो अपने आपको छूपा कर कुछ भी लिख देते हैं | परदे के पीछे कैसे स्वार्थी लोग होते हैं आप भलीभांति जानती हैं | रामदेव के मुंह पर काली स्याही फैंकनेवाले ने तो अपना मूह काला किया आप उस कालिख में कयूं भागीदारी करनी चाहती हैं | यह जनता की आवाज नहीं अपितु सोची समझी हरकत थी | मुझे तो आपका लिखा ब्लॉग भी दुराग्रह और पूर्वाग्रह का आभास दे रहा है | समाज सुधारकों की आवश्यकता हमेशा रही है और रहेगी | आप जैसे लेखक तो भगत सिंह, सुभाष के खिलाफ भी उल्टा-पुल्टा लिख सकते हैं | कौन से लम्बे समय से होने वाले अन्याय और अत्याचारों का जवाब आप रामदेवजी से चाहती हैं | रामदेवजी हमारे दिलों में रहते हैं और बहुत पहले से ही लोकप्रिय हैं, नहीं तो सोनियाजी के तीन बन्दर कयूं एयरपोर्ट पर सर निवाने जाते | दर्शन शर्मा

harish mishra के द्वारा
April 22, 2012

 तमन्ना    ये बताओ भ्रष्टाचारी सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद करने वाला (रामदेव जी ) अगर खुद भ्रष्टाचारी है तो जनता  का सेवक कौन है क्या बाटला हाउस में रहने वाले देश भक्त थे और मोहन चंद देशद्रोही  जिसे विरोध में उस आदमी  ने बाबा पर काली स्याही फेंकी  क्या बाबा ने ही उस मुठभेड़ का आदेश पुलिश को दिया था मोहतरमा न तो वो आदमी सनकी था और न ही वो इस देश की जनता की दबी हुई आवाज था  यकीन जानिए अगर मै उस जगह होता हो वो आदमी आज कब्रिस्तान में जमीन के अंदर सो रहा होता  मुझे बड़ा कष्ट हुआ आप जैसी सुन्दर सुशील बुदिमान युवती ऐसे आपति जनक कथन देशभक्तों के प्रति देती है  बड़ी आशा के साथ मैंने आपका पेज खोला था  पर आपके लेख पढ़ के मुझे निराशा हुई                 अब तो ये सोचना पड़ता है की क्या यही आदर्श भारतीय नारी के स्वरुप है   अगर यही नारी का असली रूप है तो भगवान से मेरी प्रार्थना है की ऐसी नारी न कभी मेरी माँ बहन मित्र पत्नी या कोई भी संबंधी हो     रही बात रामदेव के धन की तो वो राम देव को दिया गया जनता द्वारा दान है   अब साधू संतो को ये सेक्कुलर सरकार तो दान देगी नही क्योंकि मुसलमान नाराज़ हो जायेगा और आप जाकर रामदेव के साथ कुछ दिन प्रवास कीजिये आपको खुद पता चल जायेगा की बाबा इस पैसे से कितना आनंद उठा रहे है प्रातः ३ बजे जागना   सदैव धोती पहनना  चाहे कितनी भी ठण्ड हो अल्प भोजन व दूध मट्ठा पीकर जीवन जनता व देश को समर्पित कर देना   किसी साधारण पुरुष के लिए संभव नही             इतिहास पड़े आप तो पता चलेगा की अंग्रेजो के खिलाफ पहला आंदोलन इन्ही भगवा वेश धारी सन्यासियों ने ही शुरू किया था  और धोती व सलवार पहनने से कोई अगर कायर हो जाता है तो इस देश की कोई भी महिला वीरांगना नही है  और हम सब जानते है की इस देश में वीरांगनाओ की एक सतत श्रंखला चली आई है  अगर रामदेव जी ने भी स्त्री वस्त्र धारण किये तो  वे धन्य हो गए………… साधू और साध्वियों का कोई लिंग  और जात नही होती है रामदेवजी ने देश को स्वदेश प्रेम के लिए एकजुट किया है  हमारी देश की जनता की  गाढ़ी कमाई को विदेशो से वापस लाने को अपूर्व प्रयास किया है…………….. अगर इसमें आपको राजनीती दिखती है तो मुझे आपको भारतीय नारी कहने में संकोच है

ashokkumardubey के द्वारा
March 31, 2012

तमन्नाजी बिना धन के तो राजनीती हो ही नहीं सकती ऐसा चुनाव दर चुनाव इस देश के लोग देखते आये हैं रही बाबा रामदेव की तो हमलोग ऐसा क्यूँ नहीं सोचते की उन्होंने अपने मंच और सभाओं के माध्यम से जनताको जागरूक करने का कम किया है वर्ना कितने लोग जन पाते यह कांग्रेस जो पहले आदर सहित बाबा को हवाई अड्डे से ले आती है फिर सौदा करती है वे सौदा करने से मुकर जाते हैं तो उनको और उनके समर्थकों जो की साधारण लोग थे निहथ्थे थे उनपर आधी रात को लाठियां बरसाई जाती है क्या आप कांग्रेस द्वारा किये गए इस अमानवीय और अलोकतांत्रिक कृत्य का भी समर्थन करती हैं ?आज कितने लोग बिना धन के राजनीती में काम कर रहे है या देश की राजनीती को प्रभावित कर रहे है जो कुछ कर भी रहें हैं उनको भी किसी गैरसरकारी संगठन का समर्थन प्राप्त है जिनकी पास खर्च करने को पैसे हैं .अतः बाबा रामदेव की गलतियाँ निकालने के पहले जो लोग इस देश में लूट मचा रखे है उनको कुछ अच्छी सीख देने की बात किया जाये तो देशहित में होगा

nancy4vaye के द्वारा
February 27, 2012

नमस्ते प्रिय! मेरा नाम नैन्सी है, मैं अपनी प्रोफ़ाइल को देखा और अगर आप कर रहे हैं आप के साथ संपर्क में प्राप्त करना चाहते मुझ में भी दिलचस्पी तो कृपया मुझे एक संदेश जितनी जल्दी भेजें। (nancy_0×4@hotmail.com) नमस्ते नैन्सी ***************************** Hello Dear! My name is Nancy, I saw your profile and would like to get in touch with you If you’re interested in me too then please send me a message as quickly as possible. (nancy_0×4@hotmail.com) Greetings Nancy

Durgesh के द्वारा
February 15, 2012

नमस्कार तमन्ना जी, आपके इस तरह के आलेख से एक बात तो तय है की प्रतिक्रिया भर भर के मिलती है… उन्हें देखकर बड़ा ही मजा आता होगा आपको…. वैसे मैं कोई अंधभक्त नहीं हूँ बाबा का … और उनके प्रति किसी पूर्वाग्रह से ग्रस्त भी नहीं हूँ….. देश के हर नेता भ्रष्ट चारी है, हर पार्टी चोर है… देश के चोरों ने काला धन बाहर छुपा रखा है….. ये सुन के मेरे कान पक गए है…. मुझे ये समझ नहीं आता कि ये नेता, ये पार्टी क्या किसी दूसरे ग्रह से आये हुए प्राणी हैं…. या जो भी भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई करके नेता बनता है वो भी चोर बन जाता है….. मगर ये परिवर्तन आता कैसे है ? समाज में इस सबको सुधारेगा कौन??????? कहाँ से आएगा समाज में परिवर्तन???? कोई कृष्ण या राम फिर से अवतरित होगा क्या????? जब भी कोई इसको सुधारने कि बात कोई करता है तो उसकी मंशा पर लोग ऊँगली उठाने लगते है सोचते हैं कि इसमें उसका कोई स्वार्थ है…. मगर मेरा कहना ये है अगर आप को उसकी मंशा पर संदेह है तो आप खुद क्यों नहीं उतरते समाज परिवर्तन करने के लिए…. मेरे लिए बाबा राम देव एक ऐसे आदमी जिनके अन्दर समाज को परिवर्तन करने कि तो ललक है पर उनकी भी अपनी कुछ कमजोरियां हैं… इस बात में कोई संदेह नहीं कि उन्होंने लोगो को योग सिखाया जो स्वास्थ्य के लिए अच्छा है और लोगों को जागरूक किया जो समाज के लिए अच्छा है… कितने लोगों को पता था कि कांग्रेस ने लाखों करोड़ धन देश के बाहर छुपा रखा है….. अगर इसे बाबा ने जनता के सामने रखा तो क्या गलत किया??? योग सिखाते समय वो अगर जनता को जागरूक करते है तो क्या बुराई है इसमें …..मगर इस चक्कर में कभी-कभी ज्यादा बोल ज्यादा जाते हैं… ये उनकी इंसानी कमजोरी है….. रही बात उनके चेहरे पर कालिख पोतने कि तो ये सब आन्दोलन करते समय ये छोटी-मोटी बाते तो होती रहती है…. इस तरह के आन्दोलन चलाते समय कभी- कभी जान भी जा सकती है…. इस बात के लिए उन्हें तैयार रहना चाहिए…. आपका ये भी कहना है कि उनके पास करोडो रूपया कहाँ से आया तो मैं इस बात कि फ़िक्र आपसे ज्यादा कांग्रेसियों को होगी…. और उन्होंने इस बात कि जरूर कड़ी जांच करवाई होगी …फिर भी उन्हें कुछ गलत नहीं मिला ….. कमाया जा सकता है योग का प्रचार करके और दवाइयां बेच के करोड़ों रूपया …. मेरा कहना है इतना है अगर आप रामदेव और अन्ना कि मंशा पर शक करते है तो उतरिये मैदान में देश बदलने के लिए….. या फिर बताईये किसका समर्थन किया जाय ??

    Tamanna के द्वारा
    February 23, 2012

    दुर्गेश जी, मुझे रामदेव बाबा या उनके अनशन से तब कोई परेशानी नहीं होती जब वो स्वयं यह साफ कर देते कि वह राजनीति में आने के इच्छुक है. अपने भोले-भाले अनुयायियों को मूर्ख बनाकर या उन्हें दांव पर लगाकर वह क्या सिद्ध करना चाह रहे थे यह बात मुझे समझ में नहीं आई… मैंने तो कहीं भी यह नहीं कहा कि हमारे राजनेता एक दम साफ छवि वाले हैं जब्कि मैं तो यही कह रही हूं कि हमें खुद पर निर्भर रहकर इन लोगों से लड़ना होगा..

    Tamanna के द्वारा
    February 7, 2012

    सत्य चौहान जी, मैं किसी के व्याख्यानों को सुनकर अपने विचार बदलने में विश्वास नहीं रखतीं. जो सामने हैं उस पर ध्यान दिया जाए तो शायद हम कुछ हद तक सच्चाई से परिचित हो पाएं. अगर रामदेव समाज सेवा करना चाहते हैं तो इसमें कोई बुराई नहीं थी. कोई भी व्यक्ति समाज सेवा या राजनीति के क्षेत्र को अपना सकता है इसमें मुझे या किसी और को क्या परेशानी होगी. लेकिन मुझे नहीं लगता समाज सेवा के लिए अपार धन और खुद गलत कृत्यों में रहना जरूरी है. हो सकता है रामदेव अपनी कमाई का कुछ हिस्सा जन हित के कार्यों में लगाते हो लेकिन कुछ और बचे हुए बहुत सारे में बहुत ज्यादा अंतर है. आखिर एक साधु-संत के पास इतना धन आया कहां से और आया भी तो क्यों. मैं पहले भी कहती आई हूं कि मुझे उनकी काले धन लाने की मुहिम से आपत्ति नहीं है और कभी होगी भी नहीं लेकिन उनके उद्देश्य और मंतव्य मेरे ल,इए हमेशा ही संदेहास्पद रहेंगे. केवल अपने दृष्टिकोण को सकारात्मक करने के लिए मैं सच से मूंह फेरना पसंद नहीं कर सकती.

    satya chauhan के द्वारा
    February 7, 2012

    बाबा के क्या है जनता के सामने है…..सरकार ने पूरा दम लगा लिया लेकिन आज तक बाबा के खिलाफ कुछ नहीं खोज पाई….सिवाए अफवाहें फ़ैलाने के……अगर बाबा के यहाँ कुछ गलत होता तो कांग्रेस तो कब की बाबा को जेल में डलवा चुकी होती……… हकीकत तो यह है की स्विस बांको में जमा सारा का सारा धन “चोर” गाँधी परिवार और कांग्रेसियों का है…..कांग्रेसी ही सबसे बड़े चोर है….ये ही विदेशी कंपनियों और उनकी सरकारों के एजेंट है…अब तो देश की नीतिया भी अमेरिका में बनती है………..गाँधी जी ने कहा था की आजादी के बाद कांग्रेस को ख़त्म कर देना क्योंकि ये लुटेरो और मौका परस्तों की जमात बन गयी है..लगता है वो शुभ समय अब आ गया है…

    Tamanna के द्वारा
    February 8, 2012

    सत्य चौहान जी, मैंने अपने लेख में यह कही भी नहीं लिखा कि हमारी सरकार भ्रष्ट नहीं है. सरकार तो अति भ्रष्ट है. लेकिन अगर आप रामदेव बाबा को पाक साफ कह रहे हैं तो यह बात बेहद हास्यास्पद है. काले धन के मसले पर बाबा रामदेव ने कांग्रेस का विरोध करने की सोची, लेकिन जब कांग्रेस ने उल्टा उन्हीं पर आरोप लगाने शुरू कर दिए तो बाबा रामदेव के पास उनके आरोपों का कोई जवाब नहीं था. यहीं कारण है कि अब रामदेव कांग्रेस के खिलाफ कुछ भी करने या कहने की कोशिश नहीं करतें. जिस जोश के साथ वह मैदान में उतरे थे आज उनमें वह जोश है ही नहीं. अगर अब वो कोई सभा करते है तोकेवल अपने भक्तों के लिए ना कि सरकार का विरोध करने के लिए

ankit के द्वारा
January 31, 2012

लोग आप से कितनी सहमति रखते हैं ये तो आप को प्रतिक्रियाएं देख कर समझ में आ ही गया होगा ;बाकी आप भी उन भ्रष्टाचार के लाभार्थियों में से एक लग रही हैं जिनको बाबा के अभियान से भय है |हाँ जहाँ तक बाबा के गायब होने की बात है वो केवल भांड मीडिया से गायब हुए हिं ; बाबा लगातार सभाएं कर रहे हैं और हर स्थान पर बाबा की सभाओं में १ लाख के आस पास लोग आ रहे हैं और पंजाब और उत्तराखंड में मतदान प्रतिशत बढ़ाना उसी का परिणाम है |

    Tamanna के द्वारा
    February 3, 2012

    अंकित जी, इस लेख के बाद आप और अन्य ब्लॉगर मुझे यहीं सब कह रहे हैं. खैर अगर आपको ऐसा लगता है तो मुझे यह समझ नहीं आता कि मुझे आपके बाबा से क्या और किस बात का भय होगा. आप बस उनके ऊपर विश्वास करते हैं कभी यह भी सोचने की कोशिश करें कि जो लोग उनका विरोध करते हैं वह भी सामान्य जनता में ही शामिल है6 और उन्हें उनके बारे में गलत बोलकर क्या मिलेगा.

    vinod के द्वारा
    February 6, 2012

    अंकित जी बुरा मत मानना आप मुझे बाबा के एजेंट लगते है इसीलिए उनकी सभाओ की इतनी जानकारी रखते है लेकिन हम आप को बता दे बाबा अपना कालेधन की आड़ में कोई उल्लू तो सीधा नहीं कर रहे यह भी जानना बेहद जरुरी है भैया जनता इतनी मूर्ख तो नहीं है

    satya chauhan के द्वारा
    February 6, 2012

    अंकित जी में आपसे पूरी तरह सहमत हूँ…..पहले में भी बाबा के बारे में उल्टा सोचता था लेकिन जब मैंने मीडिया से हटकर स्वयं बाबा के बारे में जाना तो मुझे अपने पर बहुत पछतावा हुआ…..मैंने राजीव दीक्षित जी के व्याख्यानों को सुना, बाबा के आन्दोलन के उद्देश्य को जाना तब पता चला की हम तो अभी भी गुलाम है…..देश में सब कुछ वैसे ही चल रहा है जैसे १९४७ से पहले हुआ करता था….भारत को नष्ट करके इंडिया बना दिया….देश का खजाना लूट कर विदेशो में जमा कर दिया….देश की अर्थव्यवस्था पर फिर से विदेशी कंपनियों का कब्ज़ा हो गया……….बहुत अभागे है वे लोग जो बाबा का विरोध कर रहे है………विरोध करने के तीन ही कारन है…..एक पूर्वाग्रह, दूसरा अहंकार और तीसरा लालच यानि भ्रटाचार………बाबा का विरोध करने वाले लोग कही ना कही भ्रस्त व्यवस्था के द्वारा पोषित है……और वही रोल निभा रहे है जो कभी जयचंद और मीर जाफर ने निभाया था…..इस्वर ऐसे लोगो को सदबुध्धि दे….

    Tamanna के द्वारा
    February 7, 2012

    विनोद जी, आपका कहना सही है कि हमें इस ओर भी ध्यान देना चाहिए कि एक व्यक्ति जो खुद को साधु कहलवाता है उसे इतने धन और सुख-सुविधाओं की क्या जरूरत है.

    February 15, 2012

    हाँ मैं तो बाबा का समर्थक हूँ और अगर आप अपनी आखे खोल लेंगे तो आप को भी बाबा की सभाओं के बारे में जानकारी मिल जायेगी | जहाँ तक काले धन की आड़ में उल्लू सीधा करने की बात है तो वो क्या हो सकता है ?? दूसरी बात तमन्ना जी , बाबा के पास कोई धन संपत्ति नहीं है |बाबा आज भी जमीन पर सोते हैं २ जोड़ी कपडे हिं उनके पास और सदा खाना खाते हैं | बाबा रामदेव के कपड़ों से तो कम से कम १० गुना ज्यादा महंगे कपडे आप ने ही अपने इस चित्र में पहने हुए हैं | अब बात ये की आप का क्या स्वार्थ हो सकता है ?? हो सकता है आप का भी विदेश में खता हो या विदेशो में खता रखने वाले आप के अन्नदाता हों

अमर के द्वारा
January 31, 2012

कककक

pancham के द्वारा
January 28, 2012

janta ko sach bolne ka hak nahi hai fir bhi log bole ja rahe hai sahi kam karne ke bajay is desh ke neta ko ak dusre se ladne ladane ne jayda fayda najr aati hai koi sach ko bole to bura lage ga hi is liye is yug me gandi ka tin bandar bankar rahna chahiye tabhi to ye duniya jine degi

    Tamanna के द्वारा
    January 31, 2012

    पंचम जी, लेकिन आज के समय में गांधी जी के बंदर बनकर चलना समझदारी तो नहीं कहला सकती. इसीलिए हमें सच या झूठ अपनी बात कहने की हिम्मत जरूर रखनी चाहिए.

chandsingh के द्वारा
January 28, 2012

नमस्कार जी पत्र कारों की लम्बी जंजीर हैं आप उसमें कोई नया नाम नहीं हैं न नया चहेरा भी नहीं हो जो आलोचनाओ को मरियादा से परे ले जा रही हो तो भी कोई नई बात नहीं ईस जंजीर की अक कड़ी हैं वो आप से काफी आगे हैं जिस का नाम हैं डा खुशवंत सिंह जो देश के जाने माने लेखक हैं उन्हाने भी आप की तरह भ्रष्ट सरकार मैं कमी नहीं आती उस उंगली मैं कमी नजर आती जो सरकार की तरफ उठती हैं गाँधी परिवार के एक मात्र राज दर रह जुके अनेक बार गाँधी परिवार या कांग्रेश पर पर्दा डाल ने के लिए या अपने गधार पिता के कु कर्मो छोटा कर के दिखाने की जी भर कोसिस करते हैं आप की मानसिक सच्चाई क्या हैं हम नहीं जानते खुस्वंत सिंह अब ९८ वर्ष के हो गे अब वो एक दिन लिखते है मैने कभी ओरत को कभी माँ बहन बेटी के रूप मैं नहीं देखा नारी को मैने कामुक लाला इत और वाशना की नजर से ही देखा हैं उन की लेखनी में सायद ही कभी तापमान बड़ा हो लेकिन आपके लेख में तापमान हैं अगर आप भ्रस्ताचारी यो को बचाओ मीसन से नहीं जुडी हैं तो आप एक दिन जरुर पस्ताओ गी आप ही नहीं मैने कइ पत्रकारों अपने लेख और वक्तेवयों से मुख चुराते देखा हैं

    Tamanna के द्वारा
    January 31, 2012

    चन्दन सिंह जी, यह तो अपना-अपना नजरिया है. खैर अपने विचार बांटने के लिए धन्यवाद

rktelangba के द्वारा
January 27, 2012

बाबा रामदेव के चेहरे पर कालिख पोतने के पीछे कई मकसद हो सकते हैं. देखने वाले को तो पहली नज़र में यही नज़र आएगा कि किसी ने बाबा जी का घोर अपमान कर दिया है. हमारे देश में आज भी पब्लिक की हालत दयनीय है. आज भी पब्लिक को उसी तरह बेवक़ूफ़ बनाया जाता है जिस तरह अंग्रेजों के ज़माने में बनाये जाते थे. जनता को भावनात्मक तरीके से गुमराह किया जाता है और बहकाया जाता है . हमे जो कुछ दिखाया और सुनाया जाता है उस से हम बुरी तरह प्रभावित हो जाते है. बाबा रामदेव के चेहरे पर सिहाई फैंकने का कार्यक्रम सुनियोजित भी हो सकता है. मकसद यह हो सकता है कि लोगों की भावनाओं को भड़काया जाए. मैं यह यकीनी तौर पर तो नही कह सकता लेकिन सोचना तो दोनों तरफ से पड़ता है क्यों कि जो कुछ दिखाई देता है वो 100% सच भी नहीं हो सकता . तमन्ना जी आप भी ज़रा घटना के दोनों पहलुओं पर नज़र डालें !!

    Tamanna के द्वारा
    January 28, 2012

    मांफ कीजिए आपका नाम मुझे क्लियर नहीं हो रहा पोग. लेकिन एक बात बताइये एक साधु से किसी को क्या आपत्ति हो सकती है. काले धन को वापस भारत लाने का उनका उद्देश्य बहुत अच्छा है लेकिन इस उद्देश्य को हासिल करने की नियत और मंतव्य विश्वास योग्य नहीं है और वह हम यह स्पष्ट रूप से उनके आंदोलन में देख चुके हैं.

surendr shukla bhramar5 के द्वारा
January 27, 2012

वास्तविकता यह है कि जनता अब और अधिक विश्वासघात सहन नहीं कर सकती. उसे अब आए दिन सरकार या तथाकथित समाज सुधारकों द्वारा दिए जाने नए-नए वायदों से छुटकारा चाहिए… तमन्ना जी बात तो आप की कुछ हद तक ठीक है लेकिन कुछ कहा नहीं जा सकता जो भ्रष्टाचार के खिलाफ चले उनको तोड़ने मोड़ने की भरषक कोशिश की जा रही है हर तरह की रुकावट और जांच बहुत कुछ … आइये एक बात का ध्यान रखें जो अच्छाई की तरफ कदम बढाए उसका समर्थन करें .. भ्रमर ५

    Tamanna के द्वारा
    January 28, 2012

    सुरेंद्र जी, आपकी प्रतिक्रिया सराहनीय है. लेकिन अगर हम मंच पर कुछ सच रखने की कोशिश करते हैं उसपर विचार नहीं किया जाता. बस अपनी श्रद्धा का ही परिचय करवाया जा रहा है.

chandsingh के द्वारा
January 27, 2012

तमन्ना जी अति असोभिनिया लेख हैं आप का आप कोई दीवार पर लिखी इबारत नहीं आप भ्रस्टाचार कई खिलाफ लड़ी लड़ाई कई लिये एक परजीवी हैं योग हर पर जीवी का इलाज हैं आप का भी किर्पया योग करैं

    Tamanna के द्वारा
    January 28, 2012

    मैनें यह नहीं कहा चंदन जी कि यह कोई इबारत है. अगर आप रामदेव के इतने बड़े अनुयायी है तो कृप्या कर उनकी छवि को परिष्कृत करने का काम करें.

    vinod के द्वारा
    February 6, 2012

    कभी बाबा की बुराइयाँ भी पढ़ कर मुस्कराना तथा उसका सभ्य तरीके के उत्तर देना अच्छी मानसिकता दिखलाता है आप भी योग किया करे

s.p. singh के द्वारा
January 26, 2012

आदरणीय तमन्ना जी प्रणाम, आपके लेख में एक तथ्य कुछ गलत सा है बाबा राम देव साडी पहन कर नहीं भागे थे बल्कि जनानी सलवार-कुर्ती पहन कर भागे थे — लगता है कि आप भी व्यक्ति को उसके वास्तविक रूप में पहचानने कि शक्ति रखती है ? कथित योग गुरु परमपूज्य स्वामी राम देव जी महराज शायद कुछ मति भ्रम लोगों के आराध्य ही बन गए है तभी तो लोग उनके वास्तविक रूप को पहचानने में असफल ही नहीं अंध-भक्त हो गए है – और हों भी क्यों नहीं – क्योंकि पिछले वर्षो में बाबा ने जहाँ अरबों रुपया दान में लिया वहीँ करोड़ों रुपया दान में भी दिया है वर्ष २००९ -१० में ४३.२२ करोड़ और वर्ष २००८ -०९ में ३९.३८ करोड़ रुपया दान दिया अब यह तो सर्वविदित है कि मुहं खाता है और आँखे लजाती है तो जिन लोगों को बाबा से दान में कुछ मिलता है वह तो गुण गान करेंगे ही बाकी क्या सही बात को सही भी नहीं कह सकते — आब आपको इस तथ्य का तो अहसास हो ही गया होगा कि बड़े बड़े दान लेना वाला और बड़े बड़े दान देने वाले व्यक्ति को काले धन की फिकर क्योंकर है !!!!!!! अगले लेख तक आपको लेख के लिए बधाई

    Tamanna के द्वारा
    January 27, 2012

    सिंह जी, इतनी आलोचनाओं के बीच आपकी प्रतिक्रिया पढ़कर अच्छा लगा. अगर इसी अरबों और करोड़ों के बीच अंतर करना आसान हो जाए तो शायद रामदेव के अनुयायियों की संख्यां बहुत ज्यादा कम हो जाएं. हमारे देश में वैज्ञानिक उन्नति के इतने समय बाद आज भी लोग व्यक्ति पूजा में विश्वास रखते हैं. इतना ही नहीं वे अपने तथाकथित अराध्य देव के बारें में कुछ सुनना भी पसंद नहीं करतें. निष्पक्ष प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक धन्यवाद

    s.p. singh के द्वारा
    January 29, 2012

    तमन्ना जी धन्यवाद. शायद में एक पोस्ट बाबा पर लिखना चाहता था परन्तु इस चह्चाट मैंने सोंचा की आपकी पोस्ट के साथ ही कुछ भागी दरी कर लूँ. अभी कल ही बाबा राम देव ने हरियाणा के हिसार में एक सभा में अपनी तुलना राम/कृष्ण/गुरु नानकदेव जी/ गुरु गोविन्द सिंह जी से कर दी और एक कार्यक्रम तो इतना भी कह दिया किया उनके नाम के साथ जो राम शब्द जुडा है वह कलियुग में पापी (कांग्रेसियों) के खात्मे के लिए ही आये है धरती पर / इस लिए बाबा के अनुयायियों के लिए तो बriहुत सुविधा हो जायगी की उनका भगवान् अब धरती पर अवतार ले चूका है यह बात और है की बाबा ने अपने अनुयायियों के लिए हरिद्वार में बहुत ही आरामदायक निवास स्थान (धर्मशाला ) बनाई हुयी हैं जहाँ माल दार लोंगो/ लाइफ मेंबर और संरक्षक मेंबर( जिन्होंने ११ लाख से अधिक दान दिया हो) को पाँच सितारा सुविधा के साथ अय्यासी कराइ जाती है / अब बाबा के भक्तो की श्रेणी के विषय और क्या कहा जाय ? कुछ न कहना ही बेहतर है

    Tamanna के द्वारा
    February 7, 2012

    एस.पी सिंह जी..बहुत ही हास्यास्पद बयान है पूजनीय रामदेव जी का….हा हा हा…..खैर, ऐसा व्यक्ति जो खुद ही मूंह मियां मिट्ठू है उनके सुखद स्वपनों में खलल डालना अच्छी बात नहीं है…. और जहां तक रही उनके आश्रम की बात तो उसे आश्रम कहना स्वयं आश्रमों का ही अपमान है वह एक फाइव स्टार संस्थान है. और उसके आंतरिक व्यवस्थाएं भी अब सर्वविदित है.

    प्रदीप के द्वारा
    October 23, 2012

    एस.पी.सिंह जी, कृपया दूसरों पर सबूत सहित इल्‍जाम लगाये अन्‍यथा कोरे इल्‍जाम और गलत बयानी नहीं करें. अगर रामदेव जी मे ऐसा कुछ भी गलत है तो कृपया ठोस सबूत रखें. आपने अपने जीवन में कितने लोगों का भला किया है इसे बताये दोषारोपण की आदत बहुत खराब है. लोग क्‍या कर रहे है, बल्कि आप स्‍वयं क्‍या कर रहे हो. तमन्‍ना जी, तो सिर्फ एक तरफा विचार रखती है. इसलिये इन्‍हें समझाना मुश्किल है. लेकिन इन्‍होनें भी इतने गंभीर थोथे आरोप नहीं लगाये है. भगवान राम पर भी लोगों ने लांछन लगाये थे. इसलिये ऐसा होना स्‍वा‍भाविक है. इन सब का उत्‍तर समय ही देगा कि कौन सच है और कौन झूठ ? लेकिन कम से कम अपनी जबान तो गंदी नहीं करें. ईश्‍वर आप सबको सद्रबुद्ध‍ि दे

anandpravin के द्वारा
January 25, 2012

तम्मना जी, इन मुद्दों पर परे रहने से कुछ नहीं होने वाला इससे बेहतर है की आप कुछ नया लिखी बस उसमें कुछ नया होना चाहिए अपनी सार्थक शैली को व्यर्थ ना भटकाए हमें आपके नए पोस्ट का इन्तजार रहेगा. धन्यवाद

    Tamanna के द्वारा
    January 25, 2012

    आनंद जी, यह मुद्दा पूरी तरह हमारे मस्तिष्क में बैठ चुका है. बहुत लोगों के लिए रामदेव एक संत है बहुत लोगों के लिए एक भ्रष्ट उद्योगपति. लेकिन सभी के दिमाग में रामदेव है जरूर. खैर अगला लेख भी जल्दी लिखुंगी. उम्मीद है आप लोगों को पसंद आएं.

Santosh Singh के द्वारा
January 25, 2012

Tamana ji Namskar, I just ask to u one thing, that have u ever work abroad? I worked in Dubai, Kuwait and now i am in U.S and i feel one thing common that whatever country is it, they have their own freedom and priotiy of their religin and no body talk bullshits like u, bcoz they care about their religion, But as we all know INDIA is great and Indians specially Hindus…no words to describe their open minded thinking. Here we have to fight on each step for our country respect from other nationalist. But u guys dont understant that pain. And Baba Ramdev dont look of his dark side. He is the one who teach us many thing to us, which was ours but we all got forget….Any way i have only one request write something which is really affect our country. Thanks & Regards

    Tamanna के द्वारा
    January 25, 2012

    santosh ji, respect your feelings but when we indians are not at alrespecting our dignity then what can v do with this fake freedom. and what i am saying is not a bullshit as u r saying..it is fact..

January 24, 2012

तमन्ना जी, वैसे तो मैंने बेकार की बहस से बचने के लिए प्रतिक्रियाओं से किनारा कर रखा है पर आपके लेख ने मुझे प्रतिक्रिया देने के लिए मजबूर कर दिया है| वैसे तो मैं स्वयं भी बाबा की व्य्वासायिकता के ऊपर यदा-कदा आलोचनात्मक लिखता रहा हूँ पर आपने जिस तरह से लेख के शीर्षक से लेकर अंत तक बाबा रामदेव को सिर्फ रामदेव कहकर संबोधन किया है वह गलत और अपमानजनक है| शायद आप अपना ही लेख एक बार स्वयं पढ़ें तो आपको भी इस बात का एहसास हो | चाहे हम बाबा की कितनी ही आलोचना करें किन्तु इस सत्य से कोई इनकार नहीं कर सकता कि वे लाखों करोड़ों लोगों के पूजनीय हैं| यह भी सत्य है कि उन्होंने योग को निशुल्क घर-घर तक पहुंचाया है और लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया है| मेरा कहने का तात्पर्य मात्र यह है कि आप उनका आलोचनात्मक विश्लेषण अवश्य करे पर साथ ही इस बात का ध्यान भी अवश्य रखें कि आपकी भाषा अपमानजनक न हो और उनके अनुयायियों को ठेस न पहुंचे| धन्यवाद|

    Tamanna के द्वारा
    January 25, 2012

    राजेन्द्र जी, आपकी प्रतिक्रिया बेहद सराहनीय है. लेकिन सर्वप्रथम तो मैं व्यक्ति पूजा में विश्वास नहीं रखती और वैसे भी मेरे लिए रामदेव एक भ्रष्ट व्यक्ति है. क्या आप शरद पवार को शरद पवार जी लिखते हैं या फिर अन्य किसी भ्रष्ट व्यक्ति को सम्मान दे सकते हैं? मैं तो जनता को धोखा देने वाले व्यक्ति को सम्मान देकर तिरस्कृत नहीं कर सकती.

    January 25, 2012

    आपके अहम भरे विचारों से लगता है कि आपने खुद को बाबा रामदेव और शरद पंवार से कहीं बड़ा समझ लिया है| इन दोनों हस्तियों को आपने भ्रष्ट भी साबित कर दिया है, मानो आपकी ही अदालत में इनके केस की सुनवाई हुई हो | आप व्यक्ति पूजा करें न करें, मूर्ति पूजा करें या न करें, इश्वर या अल्लाह को माने या न माने आपका अपना अधिकार है, पर लोगों की आस्था और विश्वास पर चोट करने का हक आपको नहीं है| बाबा रामदेव के अनुयायी कोई अनपढ़ या बेवकूफ नहीं हैं बल्कि आपसे कहीं ज्यादा पढ़े-लिखे और समझदार लोग उनके अनुयायी हैं| कोई भी व्यक्ति अपने व्यक्तिगत कार्यों से समालोचना का पात्र अवश्य है पर उसने समाज को जो अच्छा दिया है उसके लिए उसका महत्त्व भी है| मैं खुद बाबा रामदेव के कुछ कार्यों का आलोचक हूँ लेकिन उन्होंने बहुसंख्य समाज को जो दिया है वो वाकई में प्रशंसनीय है|

    dineshaastik के द्वारा
    January 26, 2012

    राजेन्द्र जी, कोई भी व्यक्ति किसी की दृष्टि में इसलिये सम्माननीय नहीं बनता  कि उसके पास धन है, शक्ति है, सत्ता है. जन समर्थन है।अपितु किसी की दृष्टि में इसलिये सम्माननीय होता है कि उनके विचारों एवं सिद्धांतों का आपस में टकराव न हो।  किसी व्यक्ति के नाम के आगे या पीछे श्री या जी न लगाने से उसका अपमान कैसे हो गया, मैं नहीं समझ पाया। हाँ किसी के नाम के आगे या पीछे अपमान सूचक शब्दों का प्रयोग करना मैं अनुचित समझता हूँ। तमन्ना जी सम्भवतः ऐसा नहीं किया। बाबा के योग को निःशुल्क घर घर पहुँचाने की बात की पूर्णतः निराधार हैउनके शिविर में शामिल होने की न्यूनतम शुल्क 200 रु थी। राजनैतिक महात्वकांक्षा के कारण अब शायद वह नहीं है।

    Tamanna के द्वारा
    January 27, 2012

    राजेन्द्र जी, शरद पवार और रामदेव बाबा अगर किसी ओहदे तक पहुंचे हैं तो उसका सारा श्रेय आम जनता को ही जाता है. ऐसे तो निश्चित रूप से हम उनसे ज्यादा बड़े हुए. खैर यह मसला बहुत अलग है लेकिन मैं किसी व्यक्ति को उसकी प्रसिद्धि से नहीं कृत्यों के आधार पर बड़ा या छोटा समझती हूं. ऐसे में मेरे लिए किसी भ्रष्ट व्यक्ति को महान घोषित करना न्यायसंगत नहीं है.

    आर.एन. शाही के द्वारा
    January 30, 2012

    आपकी निष्पक्ष मानसिकता का पता आपके नए लेख में राहुल गाँधी को प्रधानमंत्री के प्रबल दावेदार के रूप में परोसे जाने से चल गया है । अब कुछ और कहने की आवश्यकता नहीं है । जिस प्रकार अम्बिका सोनी का संजय प्रेम उन्हें चिरकाल तक का स्थायित्व प्रदान कर गया था, आप भी आज के पुरोधा के साथ बनी रहिये, कुछ न कुछ तो हो ही जाएगा ।

RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
January 24, 2012

बाबा रामदेव ने योग को जन जन तक पहुँचाया है,इसमें दो राय नहीं.लेकिन उनके आर्थिक साम्राज्य के बारे में क्या कहेंगे.यदि उन्होंने समाज सेवा का व्रत लिया है तो फिर उनके दिव्य योग फार्मेसी द्वारा निर्मित दवाईयां इतनी महंगी क्यों.सिर्फ एक उत्पाद च्यवनप्राश की बात करें तो बाजार में उपलब्ध अन्य कंपनियों के मूल्य के बराबर ही उनके उत्पाद भी हैं.राजनीतिक महत्वाकांक्षा बुरी बात नहीं,लेकिन इसके अन्य खतरे भी हैं.

    Tamanna के द्वारा
    January 24, 2012

    राजीव जी, सेफ्रन कपड़े पहनकर खुद को संत कहलवाकर अगर कोई राजनीति से ओत-प्रोत होकर कार्य करता है तो उसे मैं समाज सुधारक नहीं मान सकती. वह एक बड़े उद्योगपति है जिसका एकमात्र उद्देश्य अधिकाधिक धन कमाना है.

Gopesh के द्वारा
January 24, 2012

आदरणीया तमन्ना जी, आप हमेशा ही बहुत अछे विचार हम सब के समक्ष उठाती रही हैं, और मई यहाँ पर आई ऐसी सभी टिप्पणियों का विरोध करता हूँ जो इसे धर्म से जोड़ रहे हैं! ये तरीका सभ्यता का परिचायक नहीं और वो भी अच्छे अच्छे विचारकों के मुंह से ऐसी बातें सर्वथा अनुचित ही हैं! यदि जूता फेंकने को पुरे जन तंत्र की भावना का प्रतीक माना जा रहा है तो इस बात को सबसे पहले राहुल गाँधी जी को समझ लेना चाहिए , और यदि कोई सन्यासी या फिर मौलवी देश में भ्रष्टाचार को देख उसे हटाने के लिए राजनीति में आना चाहता है तो हमें उस पर कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए यदि आज एक से बढ़कर एक लुटेरे कारगर से ही चुनाव लड़ कर जीतते भी हैं तो भला हमें इन योग गुरुवों से क्यूँ परहेज होना चाहिए और जब कोई सज्जन इन्सान राजनीती के क्षेत्र में आना चाहता है तो उसका विरोध करने की मानसिकता की ही वजह से ही राजनीती का अपराधीकरण हुआ है , यदि ऐसा ही हमारे पूर्वज सोच लेते तो किंचित हमारा देश आजाद न हुआ होता ! और रही बात साडी प्रकरण की तो जिस कांग्रेस की सह पर ये लाथीकांड हुआ उसी ने उनके साडी पहन के भागने को कायराना व्यवहार प्रचारित किया ये तो बहुत अच्छी बात है की हम गोली लेके मारेंगे निहाठों और सोते हुए लोगों पर और यदि वो प्राण रक्षा में भागते हैं तो कायर हैं? क्या ये उचित है तमन्ना जी? जूता फेंकने वाला हमेशा ही पागल है भले वो उच्च डिग्रियां रखते हों! हमें ऐसी सभी जूता फेंकने वाले का विरोध करना होगा चाहे वो शरद पवार पे फेंका जाए या राहुल पर, या बाबा राम देव पर जूते को लोकतंत्र का प्रतीक बताना अनुचित है! फिर भी हम आपके समालोचक प्रवृत्ति का आदर करते हैं आपमें साहस है अपनी बात रखने का बहुत प्रशंसनीय काम आभार आपका!

    Tamanna के द्वारा
    January 25, 2012

    गोपेश जी, लोकतंत्र में किसी भी व्यक्ति पर जूता या काली स्याही फेकने जैसी घटनाएं अपने आप में एक शर्मनाक कृत्य है फिर चाहे वे राहुल गांधी हो या तथाकथित संन्यासी बाबा रामदेव. लेकिन एक मुख्य बात जो मुझे समझ में नहीं आ रही कि सदियों से पराश्रित और शोषित रहने वाली भारतीय जनता अपना विरोध कैसे प्रकट करें? वो कैसे यह बताए कि अब उससे और सहा नहीं जा सकता. भ्रष्टाचार जैसा मुद्दा कभी समाप्त होने वाला नहीं है. वह तो अब मानव का स्वभाव बन गया है, उसकी प्रक्रति में शुमार है. और रही बात रामदेव बाबा की तो जब उन्होंने काला धन वापस लाने का प्रण ले ही लिया है तो उन्हें शहादत से डर क्यों लगता है? क्यों वो हर मौके पर अपनी कायरता का परिचय दे जाते हैं. सरकार तो पहले से ही जनता की भलाई से पल्ला झाड़ चुकी है, उनसे अब कोई उम्मीद नहीं है. लेकिन अगर कोई संत देश को बदलने का जिम्मा उठाता है तो वह भागता क्यों है. असहाय जनता को आधी रात को अपने हाल पर छोड़कर खुद गुप्त रूप से भागने के लिए तैयारी करना अगर आपको सही लगती है तो मैं आपकी इस सोच से सहमति नहीं रखती. आपकी प्रतिक्रिया मुझे सराहनीय लगी जिसके लिए आभार

    Gopesh के द्वारा
    February 2, 2012

    तमन्ना जी , सभी को प्राण रक्षा का अधिकार है , और ऐसे व्यक्ति के लिए जो की किसी भी आन्दोलन का मुखिया है , उसे तो और भी ज्यादा चिंतित होना चाहिए अपने जीवन के लिए क्यूंकि अगर वही न रहा तो फिर उसके आन्दोलन का भविष्य का क्या होगा! चलिए मन भी लिया जाए कि उन्होंने ऐसा करके गलत किया और हमें आलोचना का अवसर प्रदान किया पर क्या इससे उनका सम्पूर्ण जीवन कलुषित हो गया? आपने कतिपय बार कहा कि आप व्यक्तिपूजा पर विश्वास नहीं करती , मई भी नहीं करता हूँ पर किसी का सम्मान करना एवं उसकी पूजा करने में जमीं आसमान का अंतर होता है , उन्होंने भारतीय योग शाष्त्र को पूरी दुनिया के सामने महिमामंडित किया , कई गरीबों को उनसे मुफ्त में लाभ मिला , और रही बात महँगी दवावों का तो उनका जो खर्च आता है वही लिया जाता है जो देने में समर्थ है , कितने ही लोगों को इससे निशुल्क लाभ हुआ है वो पूर्वाग्रह से युक्त लोगों को समझ में नहीं आ सकता है! खैर आपको जो मानना है मानिये पर मेरा मानना है कि इस काले धन के खिलाफ उनकी मुहीम अत्यंत समीचीन है और उसको भारतीय युवावों का सहयोग मिलेगा!

    Tamanna के द्वारा
    February 10, 2012

    गोपेश जी, जिसे अपने प्राणों के रक्षा होती है वह कभी ऐसे आंदोल्न को स्थायी रख ही नहीं सकता. युद्ध में जवान जब लड़ने जाते हैं तो अगर उन्हें भी अपने प्राणों रक्षा होने लगी तो हमारा क्या होगा? गोपेश जी, सम्मान उस व्यक्ति का किया जाता है जो इसके लायक हो… लेकिन जो व्यक्ति छल कपट के सहारे समाज सुधारक के रूप में खुद को पहचान दिलवाने की कोशिश कर रहा है उसे आप सम्मान देना क्यों चाहते हैं? क्या यह जरूरी है जो व्यक्ति योग का प्रचार करता है वह नैतिक तौर पर बिल्कुल परिष्कृत हो? वैसे भी योग भारत की प्राचीनतम विधाओं में से एक है रामदेव बाबा का इससे कोई लेना-देना नहीं है और आपको यह किसने कहा कि बाबा के योग से गरीबों का भला होता है. आप उनके आश्रम में जाकर वहां के हालातों पर नजर तो डालिए

munish के द्वारा
January 23, 2012

आदरणीय तमन्नाजी इस लेख पर अब कुछ ऊट-पटांग प्रतिक्रियायें आने लगीं हैं…..! जिसका मुझे पहले से अंदेशा था, वास्तव में इस तरह की प्रतिक्रियायें वो लोग देते हैं जिनको विरोध तो करना होता है लेकिन तर्क ज्ञान की कसौटी पर अधूरे होते हैं तो वो लोग इसी तरह ऊट-पटांग प्रतिक्रियायें देते है……! इनसे हतोत्साहित होने की आवश्यकता नहीं है……! मैंने पहले ही इस लेख की प्रासंगिकता पूछी थी ……. जो की आपने नहीं बतायी हो सकता है आपको मेरा प्रश्न अटपटा लगा हो……….. ! मैंने पूर्व में आपके लेखों पर एक प्रतिक्रिया दी थी की ” आपका शब्द संचयन बहुत अच्छा है ” लेकिन इस बार आप शब्द संचयन में थोडा सा मात खा गयीं…….. ! आपने एक नकारात्मक से विषय को नकारात्मक शब्दों से ही सजाया …….इसीलिए नकारात्मक प्रतिक्रियाएँ कुछ ज्यादा ही आयीं हैं शायद लोगों को कुछ अच्छा नहीं लगा …….. ! (इसका अर्थ ये बिलकुल नहीं है की में आपके विषय से सहमत हूँ.) हालांकि प्रतिक्रियायें मिश्रित ही आयीं हैं

    Tamanna के द्वारा
    January 24, 2012

    मुनीष  जी आपकी प्रतिक्रिया बहुत प्रशंसनीय है. मुझे लगा आप भी मेरे लेख को भड़ास निकालने का माध्यम बना लेंगे. लेकिन सौभाग्यवश आपने ऐसा कुछ नहीं किया. जहां तक विषय की प्रासंगिकता की बात है तो जब तक भ्रष्टाचार का मुद्दा प्रासंगिक रहेगा तब तक उसे समाप्त करने वाले ढ़ोंगी भी हमेशा प्रासंगिक रहेंगे. मुझे रामदेव की समझ और रणनीति पर हमेशा ही संदेह रहता है. अगर आपको यह लगता है कि उनपर फेंकी गई स्याही मुझे संतुष्ट करती हैं तो यह बात बिलकुल सही नही है. लोकतंत्र में किसी पर जूते-चप्पल या स्याही फेंकना एक निंदनीय कृत्य है.. फिर चाहे वह व्यक्ति शरद पवार हो या रामदेव और हाल ही में तो राहुल गांधी भी इस श्रेणी में शामिल हो गए हैं. लेकिन जनता को बेव्कूफ बनाकर उनकी जान से खेलना उससे भी ज्यादा घ्रणित है.

sinsera के द्वारा
January 23, 2012

पैगम्बर या अवतारों ने देश, काल, परिस्थिति के अनुसार जो किया ,उस में कुछ न कुछ खास बात छुपी होती है. आम आदमी की इन बातों पर बोलने की औकात नहीं होती है.वर्ना अज्ञानी तो यही कहते मिलें गे कि- “कृष्ण करें तो रास लीला, हम करें तो कैरेक्टर ढीला”…

    Tamanna के द्वारा
    January 24, 2012

    सिनसेरा जी, मेरे लेख का आश्य या उद्देश्य किसी की भी धार्मिक भावनाओं को चोट पहुंचाना नहीं था. लेकिन धर्म के नामपर भ्रष्टाचार और जनता को दमित करना इसका मैं पूरी तरह विरोध करती हूं. इनके जैसे लोग विश्वास के नाम पर सिर्फ जनता का मजाक बनाते हैं और उन्हें बीच राह में छोड़ देते हैं.

viplavimayank के द्वारा
January 22, 2012

बाबा रामदेव सलवार पहन कर मंच से पीछे हटे तो क़यामत आ गया और हजरत ने हिजरत किया तो वह पूजनीय हो गया?वाह भाई वाह…इसे कहते हैं चित भी मेरी और पट भी मेरी|

    Tamanna के द्वारा
    January 24, 2012

    विप्लव जी, आप विषय और मुद्दे को किसी ओर ही रूप में ग्रहण कर रहे हैं. मेरे लेख का यह आश्य कदापि नही6 है.

sinsera के द्वारा
January 22, 2012

तमन्ना जी के लेख पर कमेन्ट के नाम पर व्यक्तिगत भड़ास निकालने वालो से मुझे कुछ कहना है. माफ़ी चाहती हूँ, तमन्ना जी मेरी कुछ भी नहीं लगती हैं, लेकिन लड़की होने के नाते उन्हें संविधान प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वत्रंतता का उपयोग करने पर ऊट पटांग बातें सुननी पड़ें, यह कोई अच्छी बात नहीं है. आदरणीय रामदेव के मुंह पर हिन्दू होने के कारण किसी मुस्लिम ने स्याही फेंकी, ऐसा तो मीडिया में कहीं भी नहीं बताया गया न ही तमन्ना जी ने लिखा, ऐसी बातें उठाने वाले की यह अपनी अप्रोच हो सकती है. यह वही भारत देश है जहाँ शरद पवार को रिकी पोंटिंग ने धक्का दिया तो किसी को कोई फर्क नहीं पड़ा लेकिन एक पागल भारतीय ने थप्पड़ मारा तो लोगो के कलेजे ठन्डे हो गए . हिन्दू मुस्लिम की चिंता छोड़ कर स्वदेश की भावना यहाँ पता नहीं कब आयेगी.? पूजनीय रामदेव जी शलवार सूट पहन कर भागे तो क्या हुआ? कोई स्वतंत्रता संग्राम तो हो नहीं रहा है कि भगत सिंह की तरह फांसी चढ़ जायें . देश आजाद हो चुका है. जिसकी जो मर्ज़ी आये पहन सकता है. अगर कोई दाढ़ी रख कर धर्म प्रचार करता है तो उसका जवाब जमालुद्दीन जी ही क्यों दें? नरेन्द्र मोदी क्यों नहीं? वो भी तो किसी हक से ही दाढ़ी रखते होंगे? रही बात तमन्ना जी की शादी की तो हर लड़की की तरह उनके भी घर वाले कर दें गे साथ ही हर कोई अपने घर की लड़कियों की शादी ढूंढें, लगन का मौसम आ चुका है. सवाल पूछने वाले जमालुद्दीन जी के साथ साथ सुमित जी से भी सवाल पूछें.. उन्हों ने भी तमन्ना जी की बात पर सहमति दी है…

    Sumit के द्वारा
    January 23, 2012

    किस तरह के सवाल..?????

    Tamanna के द्वारा
    January 23, 2012

    सिनसेरा जी, आपकी प्रतिक्रिया निसंदेह सम्मानजनक है. आप भले ही मेरे लेख से सहमति ना भी रखें लेकिन आपने अपना आपा नहीं खोया और अजीबो गरीब प्रतिक्रियाओं से बचते हुए आपने यह बात कहीं उसके लिए आपका बहुत आभार, हमारे समाज की विडंबना ही यही है कि यहां हर मुद्दे को धर्म से जोड़कर रख दिया जाता है.

viplavimayank के द्वारा
January 22, 2012

निहायत ही घटिया और दो कौड़ी के इस आलेख में केवल अपने मन का गुबार निकाला गया है|एक हिन्दू सन्यासी के मुख पर एक जेहादी का स्याही फेकना कोई नयी बात नहीं है, यह तो पूर्वाग्रहयुक्त इस्लामिक चरित्र ही है, हो सकता है इस्लाम में इसी को लोकतंत्र कहते हो?

    Tamanna के द्वारा
    January 23, 2012

    मयंक जी, ऐसे मसले पर धर्म को बीच में लाना एक परिपक्व व्यक्ति के लिए हास्यास्पद और हैरान करने वाला है, खैर सबकी अपनी सोच होती है. आप अगर हर मसले को हिंदू-मुस्लिम से जोड़कर देखते हैं तो यह आपकी समझ है, लेकिन मुझे इसमें ऐसी कोई बात नजर नहीं आती. आभार

    dineshaastik के द्वारा
    January 24, 2012

    विप्लव जी आलोचना करना हिन्दू संस्कृति है, आलोचना न करना तथा तानासाह प्रवृति रखना इस्लामिक संस्कृति या चरित्र को घोतक है। एक ऐसा सत्य जिसे हम स्वीकारने में क्यों हिचकते हैं। कृपया इसे भी पढ़े– “क्या यही गणतंत्र है” http://dineshaastik.jagranjunction.com/2012/01/23/%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%af%e0%a4%b9%e0%a5%80-%e0%a4%97%e0%a4%a3%e0%a4%a4%e0%a4%82%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0-%e0%a4%b9%e0%a5%88/

    viplavimayank के द्वारा
    January 24, 2012

    मैंने अपने आपको कभी परिपक्व कहा ही नहीं और मैं अपने आपको परिपक्व मानता भी नहीं|आखिर कारण क्या है की अब्दुल रशीद ने शुक्रवार के दिन स्वामी श्रद्धानंद को गोलियों से छलनी कर दिया और उसी आर्य समाज के एक प्रतिनिधि स्वामी रामदेव को कामरान ने बटला हॉउस से नितांत असम्बद्ध होने के वावजूद स्याही छिड़क कर मारा|मेरा द्रिन्ध विश्वास है की यदि us दिन उसके पास पिस्तौल होता तो वह उन्हें गोलिओं से छलनी कर देता और हाँ स्वामी रामदेव के भक्त अंधे ही है अन्यथा शिवाजी की तरह अफजल को मौत के घाट उतर दिया जाता|स्वामी रामदेव के अनुयायिओं की इस अलोकतांत्रिक आचरण के लिए पूरा हिन्दू समाज शर्मिंदा है|

    hum1 के द्वारा
    January 26, 2012

    I agree with you

    Tamanna के द्वारा
    January 27, 2012

    विप्लव जी, यह लेख किसी भी रूप में धर्म पर आधारित नहीं है.

naveen kumar के द्वारा
January 22, 2012

loktantra nahi loot tantra ki siyahi

naveen kumar के द्वारा
January 22, 2012

for ttttttttttttttammana ji aap ke ye blog se mujhe lagta hai ki aap sahi me kaungress ke sonyaji ki daughter in law ke layak hai sahi me rahul ke liye aapke jaisa ki hi talas hai tabhi itna time lag raha hai bt lagta hai ki aap apna bichar un tak pahuchan chahte hai bt pahuch nahi raha hai mai to yahi kahunga ki kosis karne se kuchh baat banti hai mujhe to ummid hai ki aapki baat un tak jarur pahuchega aise aise hi news dhudte rahege to…………..ummid karte hai ki aapke baaare me mera soch jarur aapko achha lagega aur bhi logo ko……………

    Tamanna के द्वारा
    January 23, 2012

    नवीन जी,  आपने शायद लेख की हेडलाइन ही पढ़ी हैं. खैर अगर आप लेख पढते तो आपको अपनी प्रतिक्रिया निरर्थक ही लगती.

JAMALUDDIN ANSARI के द्वारा
January 22, 2012

तमन्ना जी बहुत अच्छा लेख , आज हमारे समाज में ऐसे बहुरूपियों की कमी नहीं है , ये अपना स्वार्थ सिद्ध करने के लिए किसी भी हद तक गिर सकते हैं , इन बहुरूपियों से हमें सावधान रहना चाहिए . ये कब कौन सा रंग अख्तियार कर लेंगे इनका कोई भरोसा नहीं .

    amar के द्वारा
    January 22, 2012

    मन

    naveen kumar के द्वारा
    January 22, 2012

    jamaluddin ji thora der ke liye maan le ki ramdev ke jagah koi daarhi wale hote jo aapne dharma ke parchar ke saath saath desh ki bhi baat karta aur usspar koi hindu kaalikh fek deta to bhi aapko aachha hi lagta apna bichar de nahi to mai samjh jaunga ki kyo aap majhak uraye…………………..

    Tamanna के द्वारा
    January 23, 2012

    जमाल्लुद्दीन जी, हमें अपनी समझ का सहारा लेना चाहिए, बिना सोचे समझे किसी परा भी यकीन करना नादानी ही कहलाएगी.

    Tamanna के द्वारा
    January 23, 2012

    नवीन जी, आप कृपया कर विषय को भटकाए नहीं. देशवासियों को सदियों से धोखा दिया जा रहा है. हरा बार कोइ नया चेहरा सामने आ जाता है. पता नहीं कब तक हम अंदरूनी लड़ाइया ही लड़ते रहेंगे

sinsera के द्वारा
January 21, 2012

तमन्ना जी, नमस्कार , व्यस्तता के कारण आपका ब्लॉग काफी देर में पढ़ा, क्षमा, लेकिन आप की बात सही है, लोग अपने motiv से कैसे भटक जाते हैं ये बात समझ में नहीं आती है, अपनी बात कहने के लिए किसी राजनीतिक मंच पर आना ज़रूरी तो नहीं, मदर टेरेसा को तो कभी किसी ने भाषण देते नहीं सुना. मैं ने तो आज तक कभी भी एंटी करप्शन जैसे मैसेज पर मैसेज या कॉल बैक नहीं किया क्यूँ कि मुझे भी लगता है की ये लोग खुद ही confuse हैं. आप का साहस काबिले तारीफ है.

    Tamanna के द्वारा
    January 23, 2012

    सिनसेरा जी, आपकी प्रतिक्रया बहुत सुन्दर है. आपने मुद्दे को सराहनीय तरीके से उठाया है. अगर देशावासियों का भला करना है तो क्या ऐसा जरूरी है की राजनीति में आया ही जाए. और अगर राजनीति में आना चाहते है तो इसमें वैसे तो कुछ बुरा नै है पर संतो का नाम लेकर या खुद को संन्यान्सी कहलाने का क्या औचित्य है.

Santosh Kumar के द्वारा
January 20, 2012

सभी ब्लागरों को मेरा प्रणाम ,.महान लेखिका को चरणवंदन …….यह लेख उस दोगली मानसिकता का प्रतीक है जो सड़क साफ़ तो रखना चाहता है लेकिन खुद उसीपर कूड़ा भी फेंकेगा ,…जितना मर्जी जोर लगा लो ,.गुलाम मानसिकता वालों को गुलामी ही नसीब होगी ,..करते रहो !…जय हो !! कृपया मेरी गरीब रचना पर नजर डालें.. http://santo1979.jagranjunction.com/2012/01/18/%E0%A4%AE%E0%A5%82%E0%A4%B0%E0%A4%96%E0%A4%AE%E0%A4%82%E0%A4%9A-%E0%A4%97%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%AE-%E0%A4%A4/

Sumit के द्वारा
January 19, 2012

मेरा मानना है जो भी हुआ अच्छा हुआ …..शायद आपको बुरा लगे ये पढ़ कर ,,मगर ऐसे बाबा के साथ ऐसा तो कभी न कभी होना ही था ,……एक बार तो जान बचानी मुस्किल हो गयी थी….अगर बाबा जी ने योग पे ध्यान न दिया तो पता नही अभी और क्या क्या होना है http://sumitnaithani23.jagranjunction.com/2012/01/19/नारी-और-बेचारा-पुरुष-पति-द/

    Tamanna के द्वारा
    January 20, 2012

    सुमित जी, बहुत ही कम लोग हैं इस मंच पर जो मेरे विचारों से सहमति रखते हैं. हार्दिक आभार

    Sumit के द्वारा
    January 21, 2012

    आम जनता कभी रामदेव बाबा और हजारे जी से सहमत नहीं हो सकती ,,,,और इसका ताज़ा उदाहरण है ..अन्ना टीम पर देहरादून में जूता फेका गया ……क्या जनता पागल या बेवकूफ है जो बार बार इनका विरोध करती है…..समझा सकती है तो समझाए

    Tamanna के द्वारा
    January 23, 2012

    सुमित जी, आपका कहना सही है परा मुझे लगता है की आपने मेरा लेखा पढ़ा नहीं है क्योकि मै भी अपने लेख में उनके मंतव्यो पर संदेह ही कर रही हू,,,

    Sumit के द्वारा
    January 23, 2012

    मैं माफ़ी चाहूँगा तमन्ना जी……मैं थोडा वयस्त था ,,,इसलिए पूरा ध्यान नहीं दे पाया

abodhbaalak के द्वारा
January 19, 2012

तमन्ना जी इस बार आपने जिस विषय को चुना है वो आपको दोनों तरह के कमेन्ट देगा, मीठे और कडवे, आशा है की आप तैयार होंगी इसके लिए भी बाबा रामदेव को लेकर दोनों तरह के लोग हैं, एक जो उन्हें भ्रष्टाचार हटाने के मुहीम का अगवा मानता है और दूसरा जो उन्हें ………………. मई बाबा का समर्थक नहीं हूँ और मैंने हमेशा ये ही कहा है८ की राजनीति में उतरने वाला आपने आपको इस से उठेने वाले कीचड से बचा नहीं पायेगा. अब देखते हैं की आगे ……… http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    Tamanna के द्वारा
    January 20, 2012

    अबोधबालक जी, मुझे जहां तक समझ में आया है आपका कहना यही है कि बाबा राजनीति में आना चाहते हैं. मैं भी तो वहीं कहना चाहती हूं कि केवल राजनीति में आने की मंशा से किया गया आंदोलन कितना सही हो सकता है.

dineshaastik के द्वारा
January 19, 2012

तमन्ना जी यह सच है कि स्याही काण्ड सुनियोजित था। हाँ यह जाँच  का विषय है कि इसमें किसका हाथ है। कांग्रेस, भाजपा या स्वयं का। स्याही फेंकने वाला कोई सिरफिरा नहीं था। एल.एल. बी. डिग्री धारी. एक एन. जी. ओ. का संचालक एवं राजनैतिक गतिविधियों में भाग लेने वाला व्यक्ति सामान्य दृष्टि से सनकी या सिरफिरा नहीं हो सकता। आन्दोलन की प्रासंगिकता पर आपका सवाल उठाना मेरी दृष्टि से उचित नहीं होगा। आपका दृष्टिकोण यदि समालोचक होता तो शायद आपका आलेख निश्चित ही वाहवाही के काबिल होता। किन्तु फिर भी आपका आलेख विचारणीय है। कृपया इसे भी पढ़े- आयुर्वेदिक दिनेश के दोहे भाग-2 http://dineshaastik.jagranjunction.com/

    Tamanna के द्वारा
    January 20, 2012

    आंदोलन की प्रासंगिकता पर मैंने किसी भी प्रकार का संशय व्यक्त नहीं किया है. मेरा विरोध आंदोलनकारी रामदेव से है.

    dineshaastik के द्वारा
    January 21, 2012

    रामदेव जी से आपका विरोध तार्किक एवं उचित है। आपके इस विरोध का मैं भी समर्थन करता हूँ। इस तरह के लोग ही कालान्तर में तानासाह बनते हैं। इतिहास इसका गवाह है। कृपया इसे भी पढ़े– आयुर्वेदिक दिनेश के दोहे भाग-2 http://dineshaastik.jagranjunction.com/

    Tamanna के द्वारा
    January 24, 2012

    हमारे धार्मिक देश में साधु-महात्माओं पर विश्वास करना बहुत सहज और आवश्यक माना  जाता है. यही कारण है कि धर्म और विश्वास की आड लेकर हमेशा ही जनता को भटकाया जाता है.

yogi saraswat के द्वारा
January 18, 2012

आप पता नहीं किस भ्रम के वशीभूत होकर ये कहना चाहती हैं कि बाबा राजनीती मैं आने के इच्छुक हैं ? मैं बाबा का भक्त नहीं हूँ , लेकिन इतना जरूर मानता हूँ कि जो भी कुछ बाबा रामदेव ने शुरू किया है , उसकी ठसक जनता दरबार तक एक न एक दिन जरूर सुनी जाएगी ! और बाबा कोई राजनीतिक व्यक्ति नहीं हैं , ये सिर्फ कांग्रेस का षड़यंत्र है जो बाबा को खत्म कर देना चाहता है ! अगर यही काम किसी मुल्ला मौलवी के साथ हुआ होता , जो बाबा के साथ हुआ है तो पूरी की पूरी सर्कार और कांग्रेस उस के तलवे चाटने में व्यस्त हो जाती !

    Tamanna के द्वारा
    January 20, 2012

    योगी जी, आप जैसे समर्थक रहे तो बाबा को कांग्रेस क्या कोई भी समाप्त नहीं कर सकता. बाबा राजनैतिक व्यक्ति नहीं है इसीलिए तो वे ऐसा कर रहे हैं ताकि जल्द से जल्द प्रधानमंत्री पद के दावेदार बन जाएं.

    shivendra mohan singh के द्वारा
    January 22, 2012

    यदि बाबा प्रधान मंत्री पद के दावेदार होते हैं तो आपको परेशानी क्या है? ६३ सालों से तो चोरो का शासन देखते ही आ रहे हो. देश का कौन सा भला हो गया, अब अगर एक नया आदमी देश की गद्दी पे आता है तो आप लोगों को मरोड़ें क्यों उठने लगती हैं? दरअसल आप जैसे लोग भी उसी काली कमाई के बंदर बाँट का हिस्सा हो तो एक नए इमानदार को बर्दास्त कैसे कर लोगे, तमन्ना जी ?

    Tamanna के द्वारा
    February 10, 2012

    शिवेन्द्र जी, आपने तो मुझे भी अमीरों और धनवान लोगों की सूची में शामिल कर दिया जिसक लिए मैं आपकी बहुत आभारी हूं. खैर अगर बाबा प्रधानमंत्री बनने की इतनी ही इच्छा रखते हैं तो खुलकर बोलते क्यों नहीं. जहां हम इतने लोगों की सुनते आए हैं इनकी भी सुन लेंगे. जनता के साथ विश्वासघात करने वाले लोगों की सफाई सुनने की आदत तो हर भारतीय को पड़ ही जानी चाहिए

manoranjanthakur के द्वारा
January 18, 2012

बाबाओ से पूरा देश आक्रांत है सिर्फ ठगी ही इनका काम बचा है सामयिक सुंदर पोस्ट बहुत बधाई

    Tamanna के द्वारा
    January 20, 2012

    मनोरंजन जी, आपका कहना बिलकुल सही है. पर शायद यह सच पचा पाना बहुत मुश्किल है.

p k sharma के द्वारा
January 18, 2012

दैनिक जागरण भी कौन सा दूध का धुला है….आप संपादक लोग बहुत भाग्यशाली हो जो बहार नहीं निकलते वरना आपका स्वागत तो इनसे भी बढकर हो…..रामदेव के खिलाफ तो इतना जहर उगलते है जैसे रामदेव अभी bhrasst netao के saath साथ inko भी jel में bhijvaane wala है…… मीडिया वाले saath दे न दे किन्तु देश के लोग बाबा के saath है…. आप चाहो तो कभी भी उनके शिविरों में आकर देश लो…..वहां आने वाली युवाओं की भीड़ योग शीखाने नहीं देश बदलने आती है………इस्वर आपको सदबुध्धि दे….. जय हिंद..

    Tamanna के द्वारा
    January 20, 2012

    अगर शिविरों में शामिल होकर देश को बदलने की प्लानिंग चल रही है तो योग का क्या होगा जिसके लिए रामदेव बाबा कहलाते हैं.

akraktale के द्वारा
January 18, 2012

तमन्ना जी नमस्कार, आपने आलेख स्याही पर लिखा और आक्रोश महिला के वस्त्र धारण करने पर कर दिया. क्या आपको लगता है की रामदेव की यदि मौत हो जाती तो वह लाभप्रद होता? यदि आपको लगता है की रामदेव पर स्याही फेंकना ठीक था तो फिर शायद आप उनके उद्धेश्य को समझ ही नहीं पायीं है.आप सिर्फ उनका करोड़ों का कारोबार देख रही हैं और आश्चर्यचकित हैं की एक साधू के पास करोड़ों रुपया क्या कर रहा है? करोड़ों रुपया तो सिर्फ नेताओं के घर में या फिर उद्योगपतियों के घर में ही शोभा देता है चाहे वह गलत कार्य करके ही क्यों ना अर्जित किया हो. आपकी नजर में जैसा की कई बार सरकार के मंत्रियों ने भी घबरा कर कहा है की बाबाजी आप तो सिर्फ अन्य बाबाओं की तरह जनता को धर्म और ज्ञान की बातें ही सिखाओ वैसे ही करना चाहिए. यदि बाबाजी महिला वस्त्रों से सुरक्षित निकल जाते तो आज आप ये सवाल नहीं कर रही होतीं. ये सिर्फ प्रयास की विफलता के कारण है.कोई शर्म की बात नहीं. लोगों को योग सिखाना कोई गुनाह नहीं. बाबा जी द्वारा लोगों में देश के प्रति प्रेम जगाना कोई अपराध नहीं. लोगों को देशी निर्मित उत्पाद बेचकर देश की संपत्ति को बढ़ाना कोई बुराई नहीं है. क्या आप जानती हैं की हम लगातार विदेशी सामग्री का उपयोग करके कितना पैसा हर दिन विदेशियों की झोली में डाल रहे हैं? यदि रामदेवजी वही उत्पाद हमें उपलब्ध कराकर देश का पैसा देश में रखने की कोशिश कर रहे हैं तो क्या गुनाह कर रहे हैं. प्रतिक्रिया काफी लम्बी हो रही है इसलिए यही समाप्त करता हूँ किन्तु आप इस बात पर मंथन अवश्य करें की बाबाजी ने हमें ठगा है या की देश हित में काम करने की सलाह दी है?

    Tamanna के द्वारा
    January 20, 2012

    रक्तले जी, स्याही कांड केवल बाबा के कारनामों और मंशाओं का ही परिणाम है. अगर उनका अनशन सफल हुआ होता, जो केवल उनके कारण ही सफल ना हो सका, तो शायद कभी भी उनका मूंह काला नहीं किया जाता. आपका मानना है कि स्त्री वस्त्रों में भागकर उन्होंने बहुत वाहवाही बटोरी है तो यह आपकी सोच है. आपका कहना सही है कि ऐसे करोड़ों रुपए तो हमारे भ्रष्ट नेता और राजनेताओं के घर ही शोभा देते हैं. एक योग सिखाने वाला व्यक्ति कहां से लाएगा इतने पैसे. लेकिन आप कभी भी उनकी धन-दौलत पर प्रश्न नहीं करेंगे. किसी साधु का देश को संवारने की पहल करना गलत नहीं है. लेकिन जिस नीयत से वह ऐसा कर रहे हैं मैं उसपर प्रश्न कर रही हो. उम्मीद है आप निगमानंद के बारे में तो जानते होंगे वह भी तो कुछ करने चले थे लेकिन शायद उन्हें इतनी भी समझ नहीं थी कि राजनीति के बिना कुछ नहीं होता. लेकिन रामदेव बहुत समझदार है वह अपने समर्थकों को फिर बली का बकरा बनाने के लिए तैयारीकर रहे होंगे. देश के बाहर पैसा जा रहा है यह बात सही है लेकिन उसे वापस लाने का तरीका इतना बचकाना. पहले अपने अनशन स्थाल को एलसीडी के द्वारा फाइव-स्टार बना दो, समर्थकों को बुलावा भेजों और जब पुलिस आ जाए तो, क्योंकि आप अब एक सिलेब्रिटी बन गए हो, तो निश्चित है आपकी जान की कीमत हम जैसे आम लोगों से कहीं ज्यादा है, इसीलिए आपका वहां से भाग जाना एक प्रशंसनीय कदम है. बेहतर है महिला के वस्त्रों में भागोगे तो कोई पहचान नहीं पाएगा. जनता पर लाठी चार्ज होता है होने दो.

Rajesh Dubey के द्वारा
January 17, 2012

रामदेव जी रामलीला मैदान से लड़कियों के कपडे पहन कर भागे थे,इनके इस रूप को देख जनता भौचक थी. आन्दोलनकारी को सहादत की सीमा तक तैयार होना चाहिए. पर राम देव जी का भागना मुर्खतापूर्ण कायरता थी.अगर रामदेव जी के मन में आन्दोलन की भावना है तो उन्हें हिम्मती बनाना पड़ेगा.

    Santosh Kumar के द्वारा
    January 18, 2012

    आज तक शहीद ही होते आये हैं ,.राजेश भाई …भगत सिंह से लेकर राजीव दीक्षित तक लम्बी लिस्ट है और उस शहादत की आग में ये काले अंग्रेज अपनी रोटी सेंक मालामाल होते आये हैं !!….बाबाजी में हिम्मत और साहस है तभी राक्षसों के सामने सीना तानकर खड़े हैं ,..शेष नीचे के प्रतिक्रियाएं पढना सब समझ में आ जायेगा .. क्या कभी आपको और हमको अपनी मूर्खताएं और कायरता देखने की बुद्धि आएगी ????…..

    Tamanna के द्वारा
    January 20, 2012

    राजेश जी, अगर रामदेव योग पर ही अपना ध्यान केंद्रित रखते तो शायद उन्हें इतनी कटुता का सामना ना करना पड़ता. पुलिस और प्रशासन से बचने के लिए उनका स्त्री वस्त्रों में भागना उनके भय और कायरता का ही परिचायक है. मुझे तो ऐसा बिलकुल नहीं लगता कि भागकर उन्होंने कोई महान काम किया है जिसके लिए उन्हें कोई बहादुरी पुरुस्कार से नवाजा जाना चाहिए. खैर आप भी मेरे विचारों से सहमति रखते हैं उसके लिए आभार

    Tamanna के द्वारा
    January 20, 2012

    संतोष जी जिनके पास आप जैसे समर्थक हो उनके पास हिम्मत और साहस होना कोई बहुत बड़ी बात नहीं है. लेकिन फिर भी उनका भय के कारण भाग खड़े होना मेरी समझ से बाहर है. दूसरी ओर जहां तक उनके शहीद होने की बात है तो शहीद होने वाले लोग और होते हैं. रामदेव जैसे महायोगी जो तीन दिन भी भूखे नहीं रह पाएं और अस्पताल में ही अपना अनशन तुड़वा लिया, उनके साथ भगत सिंह जैसे शहीदों की तुलना शहादत का अपमान है.

rajkamal के द्वारा
January 17, 2012

आदरणीय तमन्ना मैडम जी ….. सादर प्रणाम ! तो आखिरकार आप पर भी विवादो की मल्लिका अनीता मैडम जी का शुभ साया पड़ ही गया ….. अजब है आप दोनों और उससे भी गजब है आप (दोनों) की माया आज तो आप दोनों ही इस मंच पर विराजमान है (शोभायमान है ) बस इसी तरह से दोनों देविया इकट्ठी विराजमान रहे हा हा हा हा हा हा हा हा हा आप का तहेदिल से शुक्रिया

    आर.एन. शाही के द्वारा
    January 18, 2012

    भाई साहब, कुछ लोगों की लत होती है बिफ़रते विषधरों को छेड़ना, ताक़ि वे जी भर कर उनकी जिह्वा पर दंश मारें, और वे उस जहरीले नशे में झूम-झूम कर उन्मत्त नृत्य का आनन्द ले सकें । बिना कटवाए इन्हें मज़ा नहीं आता । मैं रामदेव जी के समर्थन में यहां बहस में नहीं पड़ना चाहता, क्योंकि अंधभक्ति का प्रलाप समझ लिया जाएगा । यही कहूंगा कि अन्ना के निराश और अस्वस्थ होकर नेपथ्य में जाने से उपजे शून्य को भरने के लिये रामदेव का मैदान में आना समय की मांग है । वरना ये अंग्रेज़ी हुक़ूमत के झंडाबरदार अपना खानदानी हेयर स्टाइल लेकर इस देश की भोली जनता को एक बार फ़िर छलने में कामयाब हो जाएंगे । रामदेव को महिलाओं के वेश में खुद महिलाओं ने उनकी जान बचाकर निकालने का प्रयास किया था, ताक़ि वे दिल्ली में ही भूमिगत रहकर आंदोलन का नेतृत्व कर सकें, परन्तु वे गेट पर पकड़ लिये गए । दिल्ली से भागे नहीं बल्कि जबरन पहले सफ़दरजंग और फ़िर विमान से देहरादून होते हुए हरिद्वार पहुंचा दिया गया था । बालकृष्ण पकड़ में नहीं आ पाए, इसलिये दिल्ली में भूमिगत रहकर अनशनकारियों को हरिद्वार भेजते रहे । रामदेव समझ गए कि अभी देश की पूरी जनता को और अधिक जुझारू और जागरूक बनाने के लिये निरन्तर प्रयास की आवश्यकता है, और तभी से शिविरों के माध्यम से लगे हुए हैं । अन्ना और रामदेव के सैद्धान्तिक मतभेद हैं, इसलिये दोनों का अहं एकदूसरे को साथ लाने में बाधा है । इसका खामियाज़ा देश को आंदोलन के बारी-बारी से कमज़ोर पड़ जाने के रूप में भुगतना पड़ रहा है । वरना ये अंग्रेज़ी पिल्ले अभी तक अपनी जड़ें काफ़ी हद तक खुदवा चुके होते ।

    Tamanna के द्वारा
    January 19, 2012

    राजकमल जी, आपकी प्रतिक्रिया बेहद रहस्यमयी है. अपने विचार व्यक्त करने के लिए हार्दिक धन्यवाद

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    January 19, 2012

    आदरणीय शाही जी ….. सादर प्रणाम ! *पहली बात तो आना जी अस्वस्थ है *दूसरे उनकी समझदानी में यह बात शीशे की मानिंद साफ़ हुई गवा है की सभी ही भर्ष्ट है सभी हमाम में नंगे है अंदरखाते सभी एक है सभी ही जन लोकपाल के खिलाफ है और एकजुट है बाकी आप खुद समझदार है फिर से प्रणाम

munish के द्वारा
January 17, 2012

आदरणीय तमन्ना जी, इस लेख को पढने के बाद मुझे ये नहीं समझ आया की इसकी प्रासंगिकता क्या है……. आप के पुराने रिकार्ड में तो बहुत अच्छे प्रासंगिक विषयों पर लिखे गए उच्च कोटि के लेख हैं …….. हो सकता है मैं अल्पबुद्धि इस लेख की गंभीरता को न समझ पा रहा हूँ…..! क्योंकि ज्यादातर हास्य में ही डूबा रहता हूँ, इसलिए इसकी प्रासंगिकता एवं उद्देश्य को स्पष्ट करें (यदि कंट्रोवर्सी पैदा कर कमेन्ट लेना नहीं है तो) http://munish.jagranjunction.com/2012/01/17/%E0%A4%86%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A4%A3-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%A7%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%A4-%E0%A4%AA%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%A3%E0%A4%BE/

    Tamanna के द्वारा
    January 19, 2012

    मुनीष जी आप इस मंच के सम्मानित लेखकों में से एक हैं. आपकी समझ पर मुझे कोई संदेह नहीं है. मेरे लेख का मक्सद किसी कंट्रोवर्सी में पड़ना बिलकुल नहीं है. खैर आपने लेख पढ़ा उसके लिए हार्दिक आभार

vasudev tripathi के द्वारा
January 17, 2012

तमन्ना जी, मैं प्रायः एक बात कहता हूँ लेखन मौलिक व आनुभविक होना चाहिए| आपके अपरिपक्व व तथ्यों से भटकते लेख से स्पष्ट है कि आप अपने ज्ञान व सूचना स्रोतों के लिए मात्र मीडिया पर आश्रित हैं| आपको कुछ जानकारी देना चाहता हूँ- बाबा रामदेव कभी भी गायब नहीं रहे, ४ जून का अनशन तोड़ने के तुरंत बाद उन्होंने हरिद्वार में युवा सम्मलेन किया था जिसमे देश भर से हजारों युवा एकत्रित हुए थे| उसके बाद उन्होंने झाँसी से स्वाभिमान यात्रा आरम्भ की जोकि देश के जिले-जिले से गुजरी| इसमें उन्हें लाखों की संख्या में समर्थन प्राप्त हुआ| जन समर्थन देखने के लिए youtube कि सहायता लें| पुनः हरिद्वार में युवा योग शिविर का आयोजन किया जिसमे पुनः देश भर से युवा उमड़े| डेल्ही में कोई नयी शुरुआत नहीं थी वरन एक conference थी| . शायद आपको यह सूचनाएँ नहीं मिलीं होंगी क्योंकि आप सत्यासत्य के लिए मीडिया पर आश्रित हैं, मैं इस समस्या को घनिष्ठता से समझता हूँ क्योंकि मैं मीडिया से भी जुड़ा हूँ और आप जिस पीढ़ी से हैं उस पीढ़ी से भी! अब आप से कुछ प्रश्न- . आप ऐसा कैसे कह सकती हैं कि रामदेव की राजनैतिक महत्वकांक्षा है जब रामदेव स्वयं इससे सदैव नकारते रहे हैं? क्या ऐसी ही विचारधारा पूर्वाग्रह नहीं कही जाती? यदि आपने रामदेव के आंदोलनों को निकटता से से नहीं देखा तो आप जनसमर्थन के विषय में नितांत तर्कहीन बात कैसे कह सकती हैं? यदि रामदेव के समर्थक अंध भक्त हैं तो क्या आप मलाई काटने और लेक्चर झाड़ने वाले चरित्रहीनो को प्रबुद्ध समझती हैं अथवा रक्तरंजित दामन लिए घूमती वामपंथी विचारधारा को?? अंत में मुख्य प्रश्न- यदि लोकतंत्र की छाती पर आतंकवाद का खेल खेलने वाले आतंकवादियों के खैरख्वाह और बलिदानी इंस्पेक्टर शर्मा के बलिदान को गरियाने वाला स्याही फेंकू बाटलाई मुहम्मद कामरान इस देश की लोकतंत्र की आवाज है तो लोकतंत्र की आपकी कौन सी परिभाषा है… सिमी की अथवा गिलानी की? . शब्दों को अन्यथा मत लीजियेगा क्योंकि मैं इस मंच पर मिथ्या मधुर भाषी लेखकों में से नहीं हूँ और न ही मुझे कोई अंधभक्त समझिएगा क्योंकि गलत की मैं मुखर आलोचना करता हूँ किन्तु सच्चाई को जानने के बाद! बस ज्ञान के स्रोतों के लिए बिकाऊ साधनों पर पूर्ण निर्भरता उचित नहीं..!!!

    vasudev tripathi के द्वारा
    January 17, 2012

    एक और प्रश्न- ४ जून की रात के हालातों में यदि बाबा रामदेव जान बचाने के लिए महिला के कपड़ों में भाग निकलने के कारण कायर कहे जाने चाहिए तो शिवाजी और नेता जी के विषय में आपके क्या विचार हैं? कृपया उत्तर प्रश्नवत दे!

    Tamanna के द्वारा
    January 19, 2012

    वासुदेव जी, एक संत जो अपने अनुयायियों से रामलीला मैदान में एकत्र होने का आह्वान करता है. कोने-कोने से आम जनता अपने सब काम छोड़कर रामदेव के अनशन में शामिल होने जाती है. लेकिन वहां पुलिस ने जब लाठीचार्ज किया तो संपूर्ण भारत को भ्रष्टाचार से मुक्त कराने का दम भरने वाला व्यक्ति स्वयं पुलिस से बचने के लिए इतनी ऊंची स्टेज से कूदकर स्त्री वस्त्रों में भाग जाता है. और जिन लोगों को उसने बुलाया था उन्हें पुलिस डंडे मारकर वहां से भगाती है. रामदेव का समर्थन करने आए लोगों को यह भी नहीं पता था कि इतनी रात को वे कहा जाएं. इसे आप उनकी समझदारी कहते हैं. जहां तक सुभाष चंद्र बोस और शिवाजी की बात है तो रामदेव ना तो शोहरत में उनके बराबर है और नाहीं कृत्यों में तो इनकी तुलना मेरे लिए तो कदापि संभव नहीं है.

    vasudev tripathi के द्वारा
    January 19, 2012

    तमन्ना जी, रामदेव ने जिन्हें बुलाया उनका मरते दम तक उपचार से लेकर सारा जिम्मा भी उठाया| आपको क्या लगता है रामदेव कोई महाबली भीम थे जो सारे समर्थकों को पुलिस से बचा लेते?? आपका यह कहना कि पुलिस रामदेव को गिरफ्तार करने आई थी और लेकर चुपचाप चली जाती, आपके मानसिक बचकानेपन को पुनः स्पष्ट करता है| सम-सामयिकी की थोड़ी सी भी समझ रखने वाला बच्चा भी जनता है कि सरकार का उद्देश्य आन्दोलन को कुचलना था न कि मात्र रामदेव को गिरफ्तार मात्र करना और जब तक समर्थक रामलीला मैदान में डटे रहते आन्दोलन और मजबूत होता जाता| आपने यदि न्यूज़ को थोडा भी गौर से देखा होता तो आपको पता होता कि रामदेव के भागने से पहले ही पुलिस जनता पर टूट चुकी थी| पुनः आप इस बात की क्या गारंटी लेती हैं कि रामदेव को पुलिस केवल गिरफ्तार करना चाहती थी भीड़ की आड़ में कोई छती नहीं पहुँचाना चाहती थी…?? और अब बात शिव जी और नेता जी की, बात किसी से किसी की तुलना की नहीं है वरन बात उस रणनीति के अनुसरण की है जिसे शिवाजी व नेता जी निभाया था..!!! आपने शायद चाणक्य नीति, विदुर नीति, कणक नीति कुछ भी नहीं पढ़ा है..??? शेष प्रश्नों का उत्तर भी आपने देना नहीं चाह..??/

    Tamanna के द्वारा
    January 20, 2012

    वासुदेव जी, मैं एक ऐसे व्यक्ति को कभी भी जनता की भलाई के विषय में सोचने वाला नहीं मान सकती जो समय पड़ने पर भयभीत होकर भागने को विवश हो जाए. घायलों का इलाज रामदेव ने करवाया या फिर किसी और ने इस बात से भी कोई अंतर नहीं पड़ता. आप मुझे इस बात की गारंटी दे सकते हैं कि अगर दुर्भाग्यवश रामदेव फिर किसी अनशन पर बैठ गए तो क्या वह दोबारा ऐसा नहीं करेंगे. क्या अब जनता दोबारा उनके द्वारा मूर्ख बनने के लिए तैयार है? और जिन नीतियों की आप यहां बात कर रहे हैं अगर आप उन सबको आधार बना कर रामदेव को आरोपों से मुक्त करना चाहते हैं तो सब की अपनी-अपनी सोच होती हैं. मुझे नहीं लगता कि किसी की कायरता को महान नीतियों से ढका जाना चाहिए.

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
January 17, 2012

आदरणीया तमन्ना जी. कृपया मेरा लेख आखिर कब तक समय निकाल कर पढने का कष्ट करे. धन्यवाद.

shashibhushan1959 के द्वारा
January 17, 2012

आदरणीय तमन्ना जी, सादर ! समय का इन्तजार करना है. काफी बदलाव होंगे. परिवर्तन की इस आंधी में बहुत से अवांछित तत्व उड़ जायेंगे.

    Tamanna के द्वारा
    January 19, 2012

    शशिभूषण जी, संतुलित प्रतिक्रिया देने के लिए हार्दिक आभार

पंकज ओम सत्य के द्वारा
January 17, 2012

बहन जी केवल इतना ही पूछना चाहता हूँ की क्या आप फेअर एंड लवली और विदेशी सौंदर्य प्रसाधनों का प्रयोग करती है…. यदि करती हैं तो आपको स्वामी जी के खिलाफ ही क्या सम्पूर्ण भारतीय संस्कृति के खिलाफ लिखने का अधिकार है.. क्योंकि अंग्रेजों के मानस पुत्र और पुत्रिओं से हमें … भारत के पुत्रों के खिलाफ सुनने की और पढने की आदत पड चुकी एक और नाम ….तम्मना ही सही…..  मर जाऊं तो भी मेरा होवे कफ़न स्वदेशी …. कहने वालों शहीद देशभक्तों के सपनों को पूरा करने का आन्दोलन है भारत स्वाभिमान ….. भारत स्वाभिमान कोई राजनैतिक पार्टी नहीं है … आन्दोलन है ….  भक्त कभी अंधे नहीं होते ….. अब देखने वाले कला चश्मा लगा के देखें तो न हकीकत दिखेगी.. न भक्ति.. और जिस प्यारे से पपलू के लिए आप के दिल में बड़ा प्यार है.. वो कामरान सिद्दकी कोंग्रेस से २५ लाख का दान ले चूका है अपने देश के शहीद चंद्र मोहन शर्मा की सहादत को गलत साबित करने के लिए …. अंधे भक्त का सदुपदेश ——– जहाँ कुछ न समझ में आये , वह मुहं (कीबोर्ड) को बंद रखा जाए जो जिंदगी में कुछ नहीं कर पाते वे दूसरों के निंदा करने लग जाते है,,,,, एक बार भाई राजीव दीक्षित जी को सुने फिर उसके बाद ही ब्लॉग लिखे….

    rakesh singh के द्वारा
    January 17, 2012

    पंकज जी, शायद कांग्रेस वालो ने आपसे 25 लाख रूपये गिनवाए होंगे……….. तभी आपको सही सही रकम का पता है……. कामरान सिद्दीकी को 2009 में आदरणीय राजनाथ सिंह जी ने भाजपा की सदस्यता दिलाई थी………. लोकतंत्र में इस प्रकार के हरकतों को अच्छा नहीं कहा जा सकता……..किन्तु इससे पूर्व चिदंबरम और कई नेताओ पर जूता, शरद पवार पर थप्पड़ मार कर इस जैसे कार्य पहले भी हो रखे हैं……. किन्तु किसी भी दोषी को उनके समर्थको ने नहीं मारा पीटा, अर्थात कानून हाथ में नहीं लिया…….. केवल बाबा जी पर कालिख फेंके वाले टाई हुई,,,,,,,,,, इससे पता चलता है……. की बाबा के चेले ही सबसे ज्यादा उद्दंड है……… फिर सोनिया गाँधी की तस्वीर पर कालिख फ़ेंक दी……… वाह रे स्वाभिमानियों…..(अभिमानियों)……… आखिर भारत स्वाभिमान जो ठहरा…….. उनके लिए कानून क्या है………… जय हो बाबा रामदेव की और उनके चेलों की…………..

    Tamanna के द्वारा
    January 17, 2012

    पंकज जी, हैरत की बात है आप करोड़ों रुपए की संपत्ति के स्वामी और खुद को भ्रष्टाचार से मुक्ति दिलवाने वाले व्यक्ति के साथ पूरी भारतीय संस्कृति को जोड़ रहे हैं. खैर जब यह लेख लिखा गया था तब किसी भी रूप में पाठकों द्वारा इसके साथ सहमति रखने की उम्मीद नहीं की गई थी. वह व्यक्ति जो एक तरफ तो लोगों को अपने साथ इकट्ठा करें और दूसरी ओर जब पुलिस लाठी चार्ज करें तो अपनी महिला समर्थकों के कपड़े पहनकर वहां से भाग जाता है आप उसे संत कहते हैं? लाठी चार्ज में कितने ही लोग घायल हुए, राजबाला नाम की एक महिला मारी गई. हो सकता है आप उन्हें शहीद कहें लेकिन उनकी शहादत का सहरा भी रामदेव के सिर ही बंधता है. अगर इन सब के बावजूद आप रामदेव की प्रशंसा करते हैं तो मुझे कलयुग में भी भक्ति जौर पूजा अर्चना जैसे शब्दों पर कोई संदेह नहीं है.

    Tamanna के द्वारा
    January 17, 2012

    राकेश जी, आपका कहना बिलकुल सही हैओं. रामदेव की प्रति अंधी आस्था उनके समर्थकों को सही और गलत समझने नहीं देती. खैर लेख के मर्म को समझने और लीक से हटकर सोचने के लिए बहुत-बहुत शुक्रिया

anandpravin के द्वारा
January 17, 2012

तमन्ना जी, नमस्कार “गंभीर विषय” निराधार तर्क आज हम भारत के लोग जिस जगह है वो बरी कष्ट कारक है, आज सरकार विरोधी ताकते बढती जा रही है, पर ये आवाज़े क्यों उठ रही है इसका रूप आपने समझने से पहले उनपर वार कर दिया, जो लोग विरोध कर रहे है कोई जरुरी नहीं की सब सही ही हों क्यों की J .P आन्दोलन के समय भी कुछ महान लोगों ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया था और वो लोग है लालू और मुलायम जैसे लोग जिसका परिणाम हम देख रहे है,पर कम से कम अन्ना या रामदेव जैसे लोगों पर आप बहरूपिया होने का दावा नहीं कर सकतें, रामदेव जब तक बाबा थे तब तक ये आरोप सही था क्यों की तब हम कह सकते थे की वो पैसे के लिए ये कर रहे है, किन्तु आप सोचिये की एक वयक्ति जो देश – विदेश में इतना मशहूर हो और पैसा पानी की तरह कमा रहा हो, उसे कौन से कुत्ते ने काटा होगा की वो देश की बात करने लगा वो भी सरकार के विरुद्ध I बहुत ही विवादास्पद है ये सब पर यदि हम आवाज़ नहीं उत्त सकते तो हमें आवाज़ उठाने वालों को नहीं रोकना चाहिए. धन्यवाद “स्वीकार करो” की सोच छोटी है, चाहे हम कितने भी बड़े हो, ऊँचाई अपनी नहीं, “देश” की बड़ी होती है II कोशिश करने वालों(अन्ना टीम और रामदेव) पर किचर मत उछालों, ये हिम्मत हर किसी में नहीं होती है II ये राज तंत्र बड़ा जालिम है मार डालेगा हमें, किंतु सच की जीत “कभी ना कभी” तो होती है II आनंद प्रवीन

    Rakesh के द्वारा
    January 17, 2012

    आनंद बहुत अची लाइन लिखी है.

    Tamanna के द्वारा
    January 17, 2012

    आनंद जी, किसी पर विश्वास करना गलत नहीं है लेकिन अगर आस्था पर अंधी भक्ति का पर्दा चढ़ जाएं तो कुछ भी समझ नहीं आता. हम जिस व्यक्ति पर विश्वास करते हैं उसके क्रिया कलापों पर भी ध्यान देना चाहिए कि वह क्या और कैसे कर रहा है. एक साधु कहलवाने वाले व्यक्ति के पास करोड़ों की संपत्ति कहा से आ सकती है. रामदेव का पतांजली आज किसी फाइव स्टार जगह से कम नहीं है. हजारों करोड़ों की संपत्ति वह खुद घोषित कर चुके हैं पता नहीं ब्लैक मनी कितनी है. जिस योग की वजह से रामदेव को लोकप्रियता मिली हैं वह रामदेव की निजी संपत्ति नहीं बल्कि भारत की सदियों पुरानी धरोहर हैं. सिर्फ योग का प्रचार करने वाला व्यक्ति योग गुरू नहीं बन सकता. सरकार का विरोध होना चाहिए. अनशन पर बुलाए समर्थकों को लाठिया खाने के लिए छोड़ जाने वाला व्यक्ति किसी प्रशंसा का हकदार तो नहीं है.

    anandpravin के द्वारा
    January 17, 2012

    तमन्ना जी, आपकी इस ब्लॉग पर काफी विभेद है, पर मैं आपकों एक ही बात कहना चाहूंगा स्वीकार करिएगा तो आपका बरप्पन होगा. यदि आप सार्वजनिक रूप की लेखक है तो यह जरुरी होता है की भाषा पर नियंत्रण बनाय रखा जाय, किन्तु इस मुद्दे पर भाषा अनियंत्रित होती जा रही है, किसी की बुराई करना ठीक है पर उसे बिना किसी प्रमाण के या अधूरे प्रमाण के ढोंगी या अपशब्द कहना आप जैसे लेखकों को शोभा नहीं देता, ये एक खुला मंच है अपनी विचार रखने का ना की गलत तरीके से अपनी विचार रखने का I हमारी समस्या बनती जा रही है की हमारा विश्वास उठ गया है इन लोंगों से पर याद रखिये “स्वामी विवेकानंद” भी एक स्वामी ही थे और हर स्वामी को सिर्फ इस लिए की वो स्वामी है आरोप लगाना ठीक नहीं है, और जहां तक आप उनके पैसे के बारे में बोल रहीं है, ये तो अच्छी बात है की वो जो कमा रहे है वो हमें दिख रहा है. खैर आप एक युवा है, युवा जोश में सोच रहें है, एक बार व्यक्तिगत ना सोच कर, तार्किक पक्ष को देखने की कोशिश करिएगा आपकी लेखन शैली पर कोई प्रश्न नहीं है, धन्यवाद

    Tamanna के द्वारा
    January 19, 2012

    आनंद जी, आपकी प्रतिक्रिया सराहनीय है. लेकिन आपका रामदेव बाबा के मुद्दे को स्वामी विवेकानंद से जोड़ना मुझे बिल्कुल सही नहीं लगा. वो कम रहे हैं इससे मुझे कोई आपत्ति कैसे हो सकती है. लेकिन वो कहां से और कैसे कमा रहे हैं चर्चा इस पर होनी चाहिए. मेरी रामदेव से कोई व्यक्तिगत परेशानी नहीं है. मैं बस यह चाहती हू कि वह संतों की छवि क्यों खराब कर रहे हैं. अगर वो साफ यह कह दें कि राजनीति में आना मेरा उद्देश्य है या फिर र्क सामान्य व्यक्ति की तरह विरोध करें तो किसी को कोई आपत्ति नहीं होगी. प्रत्येक भारतीय नागरिक का अधिकार है राजनीति में आना.

mparveen के द्वारा
January 17, 2012

तम्मना जी रामदेव ने एक प्रयास तो किया लेकिन मीडिया ने उनको टिकने नहीं दिया . जब रामदेव ने सरकार से काले धन के लिए जवाब माँगा तो सरकार ने उनके ही संपत्ति ब्योरे मांगने शुरू कर दिए उससे पहले क्यूँ नहीं क्यूंकि सरकार नहीं चाहती थी की उनसे कोई प्रश्न करे . रामदेव पर स्याही फेंकी तो कुछ भी नहीं और सोनिया पर फेंकी गई तो उसकी सजा … kya दोनों अलग देश में रहते हैं ???? ये राजनीती है और इसका कुचक्र भी गहरा है .

    Tamanna के द्वारा
    January 17, 2012

    प्रवीण जी, रामदेव के प्रयास को खुद रामदेव ने ही नहीं टिकने दिया. सरकार तो अत्याचारी और भ्रष्ट है वह हमेशा अपने विरोध में उठने वाली आवाज को दबाएगी. लेकिन रामदेव सरकार की जांच से क्यों डरगए. क्यों नहीं उन्हें अपनी सारी संपत्ति बताई. उनके अनशन में शामिल एक महिला की पुलिस की पिटाई से जान चली गई. यह सिर्फ रामदेव के भागने के कारण हुआ. अगर वह निष्ठा से वहां बैठे रहते या खुद को पुलिस को सौंप देते तो शायद ऐसा कुछ कभी ना होता. रामदेव पर फेंकी गई स्याही की सजा तो उनके समर्थकों ने उस व्यक्ति को पीट-पीट कर दे ही दी.

    अमर के द्वारा
    January 20, 2012

    तमन्ना जी ऐसा लगता है कि आप मंगल गृह से आई हैं। आपका सवाल 1. लेकिन रामदेव सरकार की जांच से क्यों डरगए. क्यों नहीं उन्हें अपनी सारी संपत्ति बताई. जवाबः उन्होने बहुत पहले ही सारा हिसाब मीडिया के सामने दे दिया था।जो कि नेट पर भी मौजूद है। आपका सवाल 2. उनके अनशन में शामिल एक महिला की पुलिस की पिटाई से जान चली गई. यह सिर्फ रामदेव के भागने के कारण हुआ. अगर वह निष्ठा से वहां बैठे रहते या खुद को पुलिस को सौंप देते तो शायद ऐसा कुछ कभी ना होता जवाबःस्वामी जी ने एक या दो बार नहीं तीन तीन बार मंच से पुलिस को गिरफ्तारी की पेशकश की थी लेकिन पुलिस की ओर से कोई जवाब नहीं आया पुलिस में मौजूद कुछ लोग स्वामी जी को खत्म करने की फिराक में थे।(ये जानकारी पुलिस के बडे अधिकारियों ने उन्हें पहले ही दे दी थी) पुलिस की पिटाई के कारण बहन राजबाला हमें छोडकर चली गईं तमन्ना जी क्या आपको अंदाजा भी है कि वहां कितनी लाशें बिछ जातीं अगर स्वामी जी को कुछ भी हो जाता तो?

    Tamanna के द्वारा
    January 24, 2012

    अमर जी, मुझे लगता है आपको रामदेव के इस तथाकथित आंदोलन की पूरी जानकारी हैं. खैर मैं बस इतना कहना चाहती हूं की अगर उन्हें अपनी सुरक्षा और आंदोलन स्थल पर होने वाली कार्यवाही की जानकारी पहले ही थी तो उन्होंने क्यों आम जनता को वहां बुलाकर परेशानी में डाला. क्यों नहीं आंदोलन को स्थगित  या रद्द किया गया. आंदोलन में शामिल होना लोगों के लिए प्राणघातक बन गया. आपको यह सब उचित लगता है? रामदेव को यह आश्वासन था कि वे तो किसी तरह बच जाएंगे और जनता तो हमेशा से बली चढ़ती ही आई है. जहां तक बात रही उनकी संपत्ति की तो एक साधु-संन्यासी के पास करोड़ों की दौलत आपके लिए बहुत छोटी बात हो लेकिन मुझे बिना भ्रष्टाचार किए एक दवाईयां और योग के सहारे जीवन बिताने वाले व्यक्ति के पास इतनी माया और उसका हवाई मार्ग से आना-जाना और सेवा में हमेशा एक प्राइवेट प्लेन तैयार रहना बहुत हास्यास्पद लगता है.

    s.p. singh के द्वारा
    January 26, 2012

    भाई अमर जी आके ध्यानाकर्षण के लिए मैं केवल इतना ही कहाँ चाहता हूँ की आपका कथन –”लेकिन रामदेव सरकार की जांच से क्यों डरगए. क्यों नहीं उन्हें अपनी सारी संपत्ति बताई. जवाबः उन्होने बहुत पहले ही सारा हिसाब मीडिया के सामने दे दिया था।जो कि नेट पर भी मौजूद है।” यह जो हिसाब कितान बाबा राम देव ने मिडिया के सामने दिखाया था वह सब ढकोसला भर ही है क्योंकि अकाउंट से सम्बंधित बहुत से तथ्य साथ में नहीं है सारा का सारा अकाउंट भ्रामक है — भाई अमर जी अगर आप तथ्य जानना चाहते हो तो अपना इ मेल मुझे देदो मैं आपका वास्तविकता से परिचित करा दूंगा /

satish3840 के द्वारा
January 17, 2012

रामदेव के मुंह पर लोकतंत्र की स्याही – निहितार्थ आपका यह ब्लॉग पढ़कर कुछ अजीब लगा / वैसे तो लोकतंत्र में सबको अपनी बात कहने का अधिकार हें फिर रामदेव को क्यों नहीं / आप उनकी सारी या कुछ बातों से सहमत नहीं हो सकते लेकिन इसका मतलब ये नहीं आप उस के मुंह पर कालिख पोत में / ये सब मीडिया में छाने का लालच हें / या तो कुवां खुदवाने वाले का नाम होता हें या कुवां बंद करवाने वाले का / ये कालिख पोतने वाले अच्छे काम तो नहीं कर सकते इस लिए मशहूर होने के लिए ऐसे गलत काम करतें हें/ आज कपडे पहने आदमी को कोई नोटिस नहीं करेगा परन्तु जब वह नग्न होकर घुमे तो सबकी निगाहें एकदम उसकी और चली जाती हें / र्रामदेव व् अन्ना के मुद्दों के साथ जनता हे / यदि ये राजनीति में आते हें तो बुरे क्या हें /रामदेव ने आयुर्वेद , योग के ऊपर देश विदेश में काफी काम किया हे व् लोगों को हनुमान का बल याद दिलाया हे तो बुराई क्या हे / क्या वो इस लिए बुरे हो गए की सरकार के विरोध में खड़े हें / ये तो कभी भी मुमकिन नहीं कि सरकार की सारी बातों को माना जाए / आज जनता को अपने से जुड़े लोग ज्यादा भाते हें / चाहे वो रामदेव हों , लालू हो , नितीश या ममता हों / उमा हों , मायावती हों / ये सभी दबे कुचले समाज से हें / यदि लोगों को जागरूक करने का काम करतें हें तो बुरा क्या हें / आज देश की संसद में विदेशों से पड़े NO जवान यदि आकर अपनी बात लादना चाहें तो क्या जनता उन्हें सवीकार कर ले / रामदेव यदि काले धन की बात करतें हें तो क्या उनका मुंह काला कर देना चाहिए / आज सोनिया के पोस्टर को रंगने वाले की कितनी धुनाई हुई क्या आप ने देखा हे / हालाँकि ये काम ठीक नहीं कहा जा सकता पर टी वी कथित आदमी की पिटाई करने वाले की पिटाई देख दिल दहल गया / यदि किसी ने सोनिया , राहुल या सरकार की बुराई कर दी यदि सरकार ने ऐसा ही बर्ताव उन लोंगों के साथ किया तो क्या देश में सही मायने में लोकतंत्र कहा जा सकता हें ? जो भी रामदेव गलत हों या सहीं पर उनके मुहं पर कालिख पोतना , लोक्नात्र में एक आदमी की अभीव्यक्ती को बल पूरवक रोक लोकतंत्र की ह्त्या करना जैसा हैं / आप मुझे ये मान कर मत चलिए में रामदेव को कोई अंधा भक्त हूँ / पर हैं में पिछले 66 महीने से योग जरुर करता हूँ / आप उनकी सवास्थ आलोचना अवश्य करें / कारण वो भी दूध के धुले नहीं हो सकते / फिर भी आपके विचार का सवागत हें /

    Tamanna के द्वारा
    January 17, 2012

    सतीश जी, अपनी बात कहने और अनशन करने का अधिकार सब को हैं लेकिन एक बड़ा उद्योगपति जो राजनैतिक मंतव्यों के पूरी तरह फल-फूल रहा है, जिसके पास हजारों-करोड़ों की चल-अचल संपत्ति हैं उसे क्या जरुरत हैं ऋषि मुनियों का नाम खराब करने की. अगर वह स्पष्ट कर दे कि सरकार को हटा कर मैं राजनीति में आना चाहता हूं. और भारत का प्रधानमंत्री बनने की दावेदारी करता हूं. तो किसी को कोई आपत्ति नहीं है. लेकिन संन्यासी का चोला पहनकर अपने हित साधना अनैतिक और निंदनीय है. रामदेव पर जो स्याही फेंकी गई उस व्यक्ति की रामदेव के समर्थकों ने कितनी पिटाई की यह बताना शायद जरूरी नहीं है.

nishamittal के द्वारा
January 17, 2012

रामदेव पर फेंकी स्याही तो लोकतंत्र पर फैंकी स्याही दिखती है,और सोनिया के चित्र पर फैकने पर बबाल? रामदेव पर स्याही जनता ने नहीं आपने काले कारनामे छुपाने वाले खरीदे हुए नेताओं द्वारा करवाई हरकत है,यदि मेरी बात पर विशवास नहीं तो कभी कमलेश्वर जी द्वारा लिखी गयी कथा पर आधारित आंधी फिल्म देख लीजिये.

    Tamanna के द्वारा
    January 17, 2012

    निशा जी, बवाल तो रामदेव पर स्याही फेंकने पर भी हुआ था और उनके स्वाभिमान या अभिमान ट्रस्ट के लोगों ने सोनिया गांधी का मूंह भी काला कर दिया. जब शरद पवार को थप्पड़ पड़ा तब तो किसी ने यह नहीं कहा कि यह राजननैतिक सांजिश है तो रामदेव पर हमला जनता की आवाज क्यों नहीं हो सकता. दोनों ही भ्रष्ट और लोभी हैं. काले धन की मांग केवल रामलीला अनशन से पहले थी. आज वह मांग डर का रूप ले चुकी हैं. रामदेव को पता है सरकार अब उनके हर कदम पर नजर रखे हुए हैं. थोड़ा सा भी विरोध रामदेव के राज सबके सामने कर सकता है.

Santosh Kumar के द्वारा
January 17, 2012

मेरे हिसाब से जनता को आप जैसे खाली दिमाग बुद्धिजीविओं पर भरोसा करना चाहिए ,..जिससे ज्यादा दिमाग गली के धोबी जी के कुत्ते के पास निश्चित रूप से होगा ,….बाकी कुछ लिखने की जरूरत नहीं समझता हूँ ,..हंसी आती है की काक्रोच देखकर चिल्लाने वाले और गुलामी की सुखसुविधाएँ भोगने वाले जिन्होंने आजतक कभी गाँव गरीब नहीं देखा है वो “प्रवचन ” दे रहे हैं ,..शायद खुद को ही जनता मान लिया है आपने ,..लेकिन सच यह है की जनता से आप बहुत दूर हैं .. तमन्नाजी कभी आँखों से पर्दा हटाकर और गुलाम बिकी हुई मीडिया से ऊपर सोचना तब पता चलेगा ,.लेकिन वह करने की ना तो आपकी नीयत है और ना ही क्षमता ..धन्यवाद

    anandpravin के द्वारा
    January 17, 2012

    संतोष जी, जनतंत्र में सभी को अपनी बात कहने का अधिकार है, तमन्ना जी ने भी अपनी बात रखी है I फिर रोष कैसा पर एक बात तो स्पष्ट है की इनकी बाते तर्कसंगत बिलकुल भी नहीं है, क्यूंकि हम जैसे आम लोग ही अन्ना या रामदेव जैसे प्रयास रत लोगों पर ऊँगली उठाने लगे तो ये नेता तो उन्हें क्च्चा खा जायेंगे. धन्यवाद

    Tamanna के द्वारा
    January 17, 2012

    आदरणीय संतोष जी, यहां मीडिया का जिक्र भी नहीं उठाया गया है. और जहां तक धोबी के कुत्ते की बात है वह शायद बाबा रामदेव के क्रिया कलापों को समझ कर अपनी राय व्यक्त नहीं कर सकता इसीलिए आपको वह बहुत दिमाग वाला लग रहा है. संतो की छवि और उनकी मर्यादा पर प्रहार करने वाले आपके बाबा रामदेव कोई संत या सुधारक नहीं बल्कि एक बढ़े उद्योगपति और हजारों करोड़ों रुपए के स्वामी हैं. उनपर नाजाने कितने ही आरोप लगते रहे लेकिन आज तक वह अपने ऊपर लगे एक भी आरोप को बेबुनियाद साबित नहीं कर पाएं. रामलीला मैदान में अनशन कर पुलिसिया कार्यवाही से डर कर भाग जाने वाल व्यक्ति सत्याग्रही नहीं कहलाता. सरकार और पुलिस का तो काम है अत्याचार करना लेकिन अगर रामदेव बाबा ने इनके विरुद्ध अपने भक्तों को इकट्ठा किया था तो वह क्यों उन्हें पुलिस की मार खाने के लिए अकेला छोड़कर नारी वस्त्रों में भाग खड़े हुए?

    Santosh Kumar के द्वारा
    January 17, 2012

    आनंद जी ,.रोष प्रकट करने के लिए क्षमा चाहता हूँ ,..आपकी बात से शत प्रतिशत सहमत हूँ ,…धन्यवाद आपका

    Santosh Kumar के द्वारा
    January 17, 2012

    तमन्ना बहन ,…वही तो सबसे बड़ी बात है ,..मीडिया !!!..जिसका उल्लेख आप अपने लेख में करना ही भूल गयी ,.. खैर ,..बाबा ने निश्चित रूप से करोड़ों कमाए हैं और सारा धन ट्रस्ट का है जो लगातार देशहित और जनहित में लगा है …वो कहीं तस्करी तो नहीं कर रहे हैं !!..,..हरामखोरी और दूसरों का हक़ छीनकर नहीं कमाए हैं ,..लोगों का जीवन बचाया सुधारा और संवारा ही है ,..उन्होंने भारतीयता को बुलंद करने का काम किया है भ्रष्टाचार तथा नकारा नेताओं की वजह से कितने सचमुच और कितने घुटघुट कर मर रहे हैं शायद आपने कभी सोचने की जहमत नहीं उठाई ,…मौजूदा व्यवस्था मानवता को निगल रही है,..और एक क्षमतावान सन्यासी ने उसके खिलाफ बिगुल फूंका है,…उनका साथ देना मानव धर्म का पालन करना है ,…और आप उनकी बात क्यों करती हैं ,…उनके मुद्दों की बात करें तो बहस की निश्चित ही सार्थकता होगी ,. .मैं आपसे यह जरूर जानना चाहूँगा की ..क्या आपने कम से कम उनका मांगपत्र पढ़ा है ?… इस व्यस्था का गुलाम सबकी तरह मैं भी हूँ ,..लेकिन समय और मौका मिल रहा है तो खुदके साथ देश को बदलने में हमें पीछे नहीं रहना चाहिए ,…मैं अभी तक बाबाजी के किसी भी संगठन से नहीं जुड़ा हूँ ,.और ना ही उनको रोज देख-सुन पाता हूँ लेकिन यथाशीघ्र जुड़ने के प्रयास करूंगा ,..और लोगों को खास तौर से युवाओं को जोड़ने का प्रयास …शेष आनंद और प्रवीण जी ने कह ही दिया है ,………मेरी आपको आहत करने की कोई मंशा नहीं थी ,..बुद्धिजीवी दरअसल आजकल यही कर रहे हैं ,…जो आपने किया है ,..सादर आभार

    rahulpriyadarshi के द्वारा
    January 17, 2012

    मैं इस लेख के विभिन्न बिन्दुओं से असहमत हूँ…और संतोष जी की दी हुयी प्रतिक्रिया से बहुत हद तक सहमत हूँ….यह लेख पूरी तरह से पूर्वाग्रह से ग्रसित लगता है,किन्तु फिर भी सबको अभिव्यक्ति का अधिकार है और आलोचना करने का भी.लेकिन कोई बात नहीं रात के बाद ही सुबह होती है,उम्मीद है जल्द ही आप भी इस पूर्वाग्रह से पार पाने में सफल हो…साधुवाद.यह टिपण्णी मैं इसलिए नहीं दे रहा कि लेख बहुत प्रभावी लगा,बल्कि इसके लिए कि यह लेख आलोचना के लायक है,जहां तक मेरा सोचना है.

    dineshaastik के द्वारा
    January 19, 2012

    संतोष जी क्षमा चाहता हूँ आपसे निवेदन करना चाहता हूँ  कि इतना अधिक कुपित होना आप जैसे साहित्यकार का आभूषण नहीं हो सकता। शंका करना मानव स्वभाव है, अतः तमन्ना जी का बाबा जी पर शंकायें करना उचित है। बाबा रामदेव पर शंका करने के अनेक आधार है। क्या एक साधारण सा व्यक्ति ईमानदारी एवं कड़ी मेहनत से अरबों खरबों रु. कमा सकता है। शायद नहीं। क्या बाबा पर लगे आरोप बेबुनियाद हैं। शायद नहीं। बाबा की जो कार्य शैली है, क्या वह उचित है। शायद नहीं।  बाबा रामदेव का मकसद सही है लेकिन उसकी कार्य शैली एवं नीतियाँ अन्ना की तरह पारदर्शी नहीं हैं। मुझे लगता है कि बाबा जी का काले धन के ऐजेंडे के पीछे भी कोई ऐजेंडा है। बाबा जी कोई बात स्पष्ट नहीं कहते, अधिकांश बातें घुमाफिरा कर कहते हैं। जैसे उत्तराखंड के किसी मुख्यमंत्री पर रिश्वत माँगने का आरोप लगाया था, किन्तु उसका नाम नहीं बताया। क्यों। मेरा मानना है कि धर्म, व्यापार एवं राजनीति, तीनों अलग-अलग नाव हैं। तीनों में एक साथ सवारी करना कहाँ तक उचित है। मैं भी तमन्ना जी की सभी बातों से सहमत नहीं हूँ। मुझे लगता है कि हमे अपना दृष्टिकोण आलोचनात्मक नहीं, अपितु समालोचनात्मक रखना चाहिये। ऐसा न करके हम अपनी लेखनी के साथ अन्याय करते हैं। मैं बाबा जी के व्यक्तिगत विचारों से असहमत होते हुये भी उनके आन्दोलन के साथ हूँ। मेरा मानना है कि हम किसी बात को इसलिये स्वीकृत या अस्वाकृत न करें कि वह हमारे प्रिय या अप्रिय व्यक्ति द्वारा कही गई है बल्कि स्वयं मनन चिन्तन करके उचित अनुचित का निर्धारण करें। कृपया इसे भी पढ़े- आयुर्वेदिक दिनेश के दोहे भाग-2 http://dineshaastik.jagranjunction.com/

    Santosh Kumar के द्वारा
    January 19, 2012

    दिनेश जी ,.नमस्कार साहित्यकार तो मैं हूँ ही नहीं ,.निपट मूरख हूँ !!…और यदि नजर भी आता हूँ तो भी उससे बहुत पहले हिन्दुस्तान का नागरिक हूँ ,.. तमन्ना जी ने कोई शंका नहीं राखी है ,..बल्कि इन्होने पूर्वाग्रह रखते हुए अपना फरमान जारी किया है ..यदि शंका है तो आप पहले उनको पढो ,देखो ,.समझो फिर अपने आप निराकरण हो जायेगा ,..नहीं होता है तो और रास्ते अपनाने चाहिए ,…देश बड़े बदलाव के मुहाने पर खड़ा है ,…जनता बार बार हार रही है ,..सत्ता अहंकार में चूर होकर जनभावनाओं का बलात्कार कर रही है ,..और हम बाबा रामदेव की जासूसी करते रहें ?.. उनकी जासूसी करने और कहीं फ़साने के लिए तो पूरा सरकारी तंत्र लगा है ,..यदि कहीं दस रुपये की भी गड़बड़ होती तो अब तक पतंजलि पर बुलडोजर चलवा देता शाही खानदान !!!…बाबा रामदेव जी राष्ट्रधर्म का पालन कर रहे हैं ,..साड़ी ऊँचाइयाँ पाकर मिटटी से जुड़े हैं ,..चाहते तो महामंडलेश्वर बनकर ऐश करते लेकिन पिछले दो सालों से हिन्दुस्तान की सड़के नाप और जनता को जाग्रत कर रहे हैं ,..उनके अन्दर वो क्षमता है की देश को एक दिशा दिखा सकें ,…आपका उनको समर्थन है इसके लिए मैं आपका आभार व्यक्त करता हूँ ,.. मार्गदर्शन के लिए बहुत आभार

    Tamanna के द्वारा
    January 19, 2012

    आदरणीय राहुल जी, दिनेश जी, और संतोष जी…. लेख पूर्वाग्रह ग्रसित नहीं है बल्कि जो सामने हैं उसी के आधार पर इसे लिखा गया है. रामदेव बाबा के क्रिया कलापों और उनकी संपत्ति के विषय में मुझसे बेहतर आप लोग जानते हैं. लेकिन नाजाने क्यों आप लोग इस बात से सहमति नहीं रखतें कि एक बार फिर जनता को मूर्ख बनाने का प्रयत्न किया जा रहा है. रामदेव बाबा कालाधन वापस लाने के लिए सरकार का विरोध जरूर कर रहे हैं.लेकिन उनके मंतव्य सही नहीं है. लेकिन उनकी नीयत संदेहास्पद है. गलत निर्णय से किया गया कोई भी काम सही नहीं हो सकता फिर चाहे उद्देश्य कोई भी रहें. रामदेव बाबा जब अनशन पर बैठे थे तब देश की जनता से ज्यादा उनके अनुयायियों ने उन्हें समर्थन दिया था. अपना सब काम छोड़कर वे रामदेव की एक आवाज पर रामलीला मैदान में जुट गए. लेकिन अंत में हुआ क्या? वह सबको पुलिस की मार खाने के लिए छोड़ गए. आप इसे अगर उनकी वीरता और समझदारी समझते हैं तो मुझे इस बात पर कोई संदेह नही हैं कि रामदेव संन्यासी हो ना हो एक महान जादूगर तो है ही.

    arshita11 के द्वारा
    January 30, 2012

    मुझे तो लगता है संतोष कुमार जी आप दुनिया के सबसे बड़े लेखक है हम सब आप के गुलाम भैया लोकतंत्र में कहने और लिखने का अधिकार नहीं है तो बताये आप किस लोकतंत्र में रह रहे है रामदेव का जनता को कुछ बुरा लगा तो यह क्रिया प्रतिक्रिया है यदि आप को लगता है की आप सबसे बड़े बुद्धिजीवि है तो तो आप देश के राट्रपति क्यों नहीं बन पाए या प्रधान मंत्री बताये जरा तमन्ना जी मुझे आप का लेख बड़ा अच्छा लगा इस तरह से लिखते रहिये हम आपके साथ है

    आर.एन. शाही के द्वारा
    January 30, 2012

    माननीया अर्शिता जी, यदि संतोष जी दुनिया के सबसे बड़े लेखक नहीं हैं, तो आप भी कोई टाँल्सटाय, गोर्की, खुशवंत सिंह, कुलदीप नैयर और तस्लीमा नसरीन नहीं हैं । जिस अभिव्यक्ति की आज़ादी आपके पास है, वही संतोष जी के पास भी सुरक्षित है । उन्होंने यदि अपने विचारों के समर्थन में कुछ कहा, तो आपको भी उनको बुरा-भला कहने का कोई हक़ नहीं है । मत भूलिये कि संतोष जी की आवाज़ आम अवाम की आवाज़ है, जबकि आप जैसी कुछ चुनिन्दा अभिव्यक्ति की आज़ादी का दम भरने वालियों के पास सिवाय अपनी थोथी दलीलों के और कुछ भी नहीं है । आपकी दलीलों और कांग्रेस के तथाकथित रणविजय सिंह जैसे थेथरोलोजी पसन्द दलाल लोगों की दलील में कोई फ़र्क़ नहीं है । बेहतर होगा कि राष्ट्रभक्तों की भावनाओं के साथ छेड़छाड़ न करें, वरना यदि दूसरी आज़ादी के दीवाने अपनी पर उतर आए, तो शायद कालेधन के सरपरस्तों को आड़ लेने की कोई जगह ढूंढने से भी मिलेगी नहीं । धन्यवाद !

    vinod के द्वारा
    February 6, 2012

    माननीय आर.एन. शाही जी आप ही बताये टाँल्सटाय, गोर्की, खुशवंत सिंह, कुलदीप नैयर और तस्लीमा नसरीन में आप कौन है आप भी मुझे कोई बड़े साहित्यकार नहीं लगते और आपकी लेखनी बिलकुल बेकार लगती है आपने ने jo बातें अर्शिता जी के liye लिखी है वह बातें आप पर भी निर्भर करती है


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