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क्या मिल सकता है राहुल गांधी से बेहतर प्रधानमंत्री?

Posted On: 28 Jan, 2012 में

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indiaभारत का अगला प्रधानमंत्री कौन और किस पार्टी का होगा यह एक ऐसा प्रश्न है जिसके उत्तर को सार्वजनिक सहमति मिलना असंभव ही है. आज लगभग हर पार्टी का मुख्य चेहरा स्वयं को भावी प्रधानमंत्री के रूप में देख रहा है. क्षेत्रिय पार्टियों से लेकर राष्ट्रीय पार्टीयों के मुखिया तक खुद को एक बेहतर दावेदार के रूप में प्रचारित कर रहे हैं. आज भारत को एक ऐसे प्रधानमंत्री की जरूरत है जो स्वयं के शक्तिशाली और निर्णय लेने की काबिलियत रखता हो. जो किसी क्षेत्र विशेष में नहीं बल्कि एक प्रभावकारी राष्ट्रीय पहचान वाला हो.


निश्चित तौर पर यह सभी खूबियां भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी में है. प्रधानमंत्री और राष्ट्रीय नेता के तौर पर उनकी तुलना किसी अन्य चेहरे से करना निरर्थक और बेमानी है. वह एक सशक्त और विवेकशील नेता है. लेकिन अब उनकी आयु इस बात की गवाही नहीं देती कि उन्हें प्रधानमंत्री जैसा ओहदा सौंपा जाएं. लगभग 86 की उम्र में अगर वह प्रधानमंत्री बनते भी है तो यह स्वयं उनके साथ नाइंसाफी होगी.


आयु के इस मुकाम पर पहुंचने के बाद हो सकता है उनका स्वास्थ्य उन्हें विवादों और चिंताओं में पड़ने की अनुमति ना दें. क्या आप अपने घर के इतने वृद्ध व्यक्ति को चिंताओं से ग्रसित या विवादों के उलझे हुए देखना पसंद करेंगे? शायद नहीं, यहीं कारण है कि प्रधानमंत्री के पद के लिए लाल कृष्ण आडवाणी, जो निर्विवाद रूप से एक बेहतर उम्मीदवार साबित हो सकते थे, को यह पद सौंपना स्वयं उनके साथ अन्याय होगा.


वहीं अगर बसपा, सपा और अन्य क्षेत्रिय दलों की बात करें तो हो सकता है उन सभी के पास मुलायम सिंह यादव, मायावति जैसा मुखिया हो लेकिन क्या आप उन्हें प्रधानमंत्री के रूप में देखना पसंद कर सकते हैं? क्या प्रगति की राह पर चलने वाले भारत एक ऐसे प्रधानमंत्री का बोझ उठा सकता है जिसकी लगभग सभी नीतियां जाति, आरक्षण और विभाजन पर आधारित हों? क्या हमें एक ऐसे प्रतिनिधित्व की जरूरत है जो अखण्डित भारत के सपने को पूरी तरह ध्वस्त कर भारत के भीतर ही विभाजन के बीज बोने पर अमादा हो जाएं?


भाजपा और एनडीए की ओर से नितिश कुमार और नरेंद्र मोदी जैसे प्रख्यात नेताओं के नाम भी प्रधानमंत्री पद के लिए सामने आते रहे हैं, लेकिन एक कटु सत्य यह भी है कि जब भी इन नेताओं ने खुद को प्रधानमंत्री पद की रेस में शामिल करने की कोशिश की है, किसी बाहरी व्यक्ति या दल ने नहीं बल्कि पार्टी के अंदरूनी नेताओं ने ही स्वयं उनके नाम को नकार दिया है. ऐसे में यह स्पष्ट हो जाता है कि अगर इन नेताओं को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया गया तो यह पार्टी के भीतर ही फूट और विभाजन का काम करेगा.


हमें एक ऐसे प्रधानमंत्री की जरूरत है जिसे ना तो अपनी पार्टी जी बेरुखी का सामना करना पड़े और वह सर्वायामी योग्यता भी रखता हो. ऐसे में कांग़्रेस, जो चरणवंदना में पूर्ण विश्वास रखती है, ही एक ऐसी पार्टी मानी जाती है जिसने हमेशा अपने नेताओं और पार्टी के लोगों को एक साथ रखने का काम किया है. इतने बड़े गठबंधन होने के बावजूद अगर पार्टी में किसी भी प्रकार की फूट उत्पन्न होती भी है तो उस मसले को बड़ी समझदारी से हल कर दिया जाता है.


rahul gandhiयही वजह है कि अगर कांग्रेस पार्टी के महासचिव राहुल गांधी प्रधानमंत्री पद के लिये देश के प्रबल दावेदार बन कर उभर रहे हैं. एक तो वह देश के सबसे मजबूत राजनैतिक दल के महासचिव है और दूसरी ओर उन्होंने पिछले कुछ समय के भीतर ही अपनी व्यक्तिगत छवि को इतना अधिक परिष्कृत कर दिया है कि अब जब भी कभी प्रधानमंत्री के चुनाव की बात आती है तो राहुल गांधी का नाम स्वत: ही जहन में आ जाता है. आए भी क्यों ना, गांधी परिवार के सुपुत्र राहुल गांधी, जिनका सारा जीवन राजनीति के उतर-चढ़ावों में ही बीता है, अब एक परिपक्व नेता के रूप में सामने आने लगे हैं.


आज जब भ्रष्टाचार और महंगाई को लेकर कांग्रेस के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार का विरोध हो रहा है, ऐसे में राहुल ने बड़ी समझदारी के साथ युवाओं को तो अपनी ओर खींच ही लिया है साथ ही गांव-गांव जाकर उन्होंने लोगों से एक भावनात्मक रिश्ता भी कायम किया है. अभी कुछ समय पहले राहुल गांधी ने उत्तर-प्रदेश से महाराष्ट्र जाने वाले लोगों को कुछ अपशब्द कहें थें. उनके इस बयान की चौतरफा निंदा भी हुई थी. निश्चित ही उनका कथन अशोभनीय था, लेकिन क्या हम आज भी सदियों से उसी लॉलीपॉप के सहारे जीना चाहते हैं जो हमें कई बरसों से दिखाई जा रही है. राहुल गांधी के शब्द कटु अवश्य थे लेकिन सत्य थे. अगर उनके कथन को सकारात्मक बयानों के साथ ग्रहण किया जाता तो शायद इतना बवाल ना मचता. पता नहीं क्यों हम आज भी सच सुनना कुछ ज्यादा पसंद नहीं करतें. सच सुनते ही हम भड़क जाते हैं और अपनी कमियों पर काम करने की बजाय दूसरे लोगों पर आक्षेप लगाने लगते हैं.


हां, हम इस बात से भी इंकार नहीं कर सकतें कि समय-समय पर कांग्रेस पर भी कई तरह के आरोप लगते रहे हैं लेकिन उन्हें किसी ना किसी रूप से साबित नहीं किया जा सका. इसीलिए उनके पीछे की हकीकत क्या है यह कहना मुश्किल है. एक ऐसे परिवार से संबंधित है जिनके पास ना तो अपना कोई बैंक बेलेंस है और ना ही कोई निजी आवास, यहां तक ही उनका पुश्तैनी आवास आनंद भवन को भी वर्ष 1930 में कांग्रेस दल को अर्पित कर दिया गया था.


पूरी तरह राजनीति को समर्पित गांधी परिवार, जो अब परिपक्व राजनीति की पहचान बन चुका है, उसके प्रतिनिधी को प्रधानमंत्री पद प्रदान ना किया जाए तो क्या आज की तारीख में उससे बेहतर कोई उम्मीदवार है?




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56 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

आर एम मित्तल के द्वारा
September 11, 2013

प्रधानमन्त्री जी का यह कहना की वो राहुल गाँधी के नेतृत्व में २०१४ में काम करना पसंद करेंगे अपने चार दशक के राजनितिक जीवन और अपनी ८६ साल की आयु का अपमान करने वाली बात है। २०१४ में गाँधी परिवार और कांग्रेस के चंगुल से बाहर आकर देश के पीड़ित- शोषित नागरिकों के उत्थान का काम करने की बात कहते तो कितना अच्छा और सार्थक होता। आर एम मित्तल मोहाली

अभिषेक टंडन के द्वारा
April 15, 2012

तमन्ना, तुम्हारी ये तमन्ना कभी पूरी नहीं होने वाली … प्रधानमंत्री तो एक ही होगा - नरेन्द्र मोदी, और कोई रोक नहीं सकता

akash के द्वारा
February 7, 2012

tamanna ji, why you faver rahul for PM??????? rahul and any congrassian is not deserve for pm post, because all congrassian is not fair…….. infact all congrassian is involved all big scams in india….. like boforce scam, 2G, CWG, ect…… so, you should not faver rahul….plz

satya chauhan के द्वारा
February 7, 2012

प्रधानमंत्री तो क्या ये तो किसी छोटे से गाँव का सरपंच बनने के भी लायक नहीं है….इसकी योग्यता ही क्या है, ये करता ही क्या है शिवाये गरिवो के घर जाकर फोटो खिचवाने के, देश का सारा धन तो इसने और इसके परिवार ने लूट लूट कर विदेशो में भेज गिया और बात करता है देश में विकास करेगा., इसका और इसके पूरे खानदान का काला सच जल्दी ही देश के सामने होगा….जल्दी ही ये अपने पूरे परिवार सहित तिहाड़ जेल मी शोभा बढ़ाएगा…

    Tamanna के द्वारा
    February 8, 2012

    सत्य चौहान जी, कौन सा राजनीतिज्ञ या नेता भ्रष्ट नहीं है. गांधी परिवार पर भी कितने ही आरोप लगते रहें पर किसी को भी पुख्ता नहीं किया गया है. और वैसे भी हमारे देश के बहुत से ऐसे नेता हैं जो किसी लायक नहीं है. लेकिन राजनीति में काबिलियत आंकने के मानक बहुत अलग है.

rudra के द्वारा
February 7, 2012

रौल विन्ची और PM क्या मजाक कर रहे हो यार. जो आदमी आज तक अपनी डिग्री एक्साम पास न कर सका वो PM क्या बनेगा. उनको पहले को छोटी मोती मंत्री पद देना चाहिए और उनको अपने आप को प्रमाणित करना होगा. गरीब दुखियो का भी खाना खा जाने वाले इस गाँधी को कृपया PM मत बनाये .

    satya chauhan के द्वारा
    February 7, 2012

    अरे भाई ये बलात्कारी भी है….इसने अपने अंग्रेजी दोस्तों के साथ मिलकर २००१ में अमेठी में ‘सुकन्या’ नाम की लड़की के साथ बलात्कार किया था…जो इसी की पार्टी के कार्यकर्ता की बेटी थी…….

    Tamanna के द्वारा
    February 8, 2012

    रुद्र जी, राजनीति में शामिल होने के लिए कभी भी शिक्षा को आधार नहीं बनाया गया है. इसीलिए वो इक्जाम पास कर पाएंगे या नहीं इस बात को रहने देते हैं. मेरा बस चले तो मैं ही पी.एम बन जाउं, उन्हें क्यों बनाउं. हा हा हा….!!! लेकिन परिरस्थितियां ही ऐसी है कि राहुल के अलावा हमारे पास और कोई विकल्प नहीं है.

    rudra के द्वारा
    February 10, 2012

    तमन्ना जी. विकल्प हमारे पास नहीं आपके पास नहीं है. मुझे लगता है की राहुल गाँधी से जयादा उपयुक्त नितीश कुमार है, उनकी छवि बेदाग़ है. इंजिनियर हैं, अपने आप के रेलवे मिनिस्टर और बिहार के CM के रूप मैं प्रमाणित भी किया है.अच्छी जानकारी रखते हैं. बस हम जनता को खुली आँख से विकल्प देखने की जरूरत है.. बहोत मिल्नेग्य विकल्प. शायद वो बन्न भी जाये या थो भारत को गाँधी की आदत सी लग गयी है.. कौन जाने राहुल ही बन जाये अगर हमारी बदकिस्मती हो तो.

    Tamanna के द्वारा
    February 10, 2012

    रुद्र जी, चलिए मान ली आपकी बात लेकिन क्या जिस विकल्प की बात आप कर रहे हैं उनकी राष्ट्रीय पहचान कितनी हैं , उनकी पार्टी क्या उन्हें प्रधानमंत्री के रूप में देखती हैं यह दोनों बातें बहुत ज्यादा महत्व रखती हैं. 

dineshaastik के द्वारा
February 5, 2012

आदरणीया तमन्ना बहना, क्षमा माँगता मैं दोबारा। बहुत किया है मैंने चिन्तन, लेख पढ़ा मैंने यह सारा।। सहमति प्रगट न मैं कर पाया, इसके कई प्रमाणिक कारण। राहुल PM योग्य नहीं हैं, यह पद नहीं कोई साधारण।। राजनैतिक परिवार हो जिसका, जिसके साथ जुड़ा हो गाँधी। PM बनने की तो क्या है, केवल उसको ही आजादी।। PM पद के लिये बहिन जी, किसी क्षेत्र में हो योग्यता। राहुल भइया में तो अब तक, मुझे न दिखती है विशेषता।। एक बात सच कुनतु कड़वी, फिर भी अभी ज्ञान में बच्चे। पर इसमें संदेह नहीं है, कई नेताओं से हैं अच्छे।। कांग्रेस ही दल अच्छा है, काँग्रेस को शासन का हक। PM अच्छे बन सकते हैं, प्रणव एन्थोनी नहीं जरा शक।। हम अब भी आजाद नहीं हैं, साबित इस आलेख से पुख्ता। और कोई क्यों बने न PM, इससे मेरा मन है दुखता।। कुछ लोगों का एक एजेंडा, राहुल को PM बनाओ। राहुल तो कठपुतली होंगे, पीछे से यह देश चलाओ।। एक बात न समझ में आती, भारत की क्या है मजबूरी। आप भी बन सकती हैं PM राहुल गाँधी क्यों हैं जरूरी।। पहले छोटा मंत्री पद लें, क्षमता अपनी प्रथम दिखायें। रहीं किसी को फिर आपत्ति, निश्चित ही PM बन जायें।। राहुल से परहेज नहीं है, अनुभव की पर बहुत कमी है। तर्क आपके नहीं सार्थक, बात आपकी नहीं जमीं है।। यदि प्रियंका की हो चर्चा, राहुल से कुछ तो काबिल हैं। PM यदि बने राहुल जी, देश ये स्थिर अति मुश्किल है।। अच्छे भाषण कर लेते हैं , नेता इनसे छोटे मोटे। आप समर्थन करती फिर भी, नेहरू के पोते न होते।। गाँधी होना बहुत जरूरी, PM पद की यही योग्यता। यह आलेख आपका पढ़कर, बहन तमन्ना मुझको लगता।। इक प्रस्ताव भेज देते हैं, संविधान में हो परिवर्तन। अडवानी से पूछ लीजिये, इस पद पर गाँधी आरक्षण।। इससे लाभ बहुत से होंगे, नेताओं की बाढ़ थमेंगी। देश अस्थिर कभी न होगा, कभी नहीं सरकार गिरेगी।। सत्ता का संघर्ष न होगा , चापलूसों की बाढ़ लगेगी।। जेपी अन्ना कोई न होगा, सब सोचेगे गाँधी बनना। मुक्ति मिलेगी जनता को भी, प्रधानमंत्री को है चुनना।।

    Tamanna के द्वारा
    February 7, 2012

    दिनेश जी, भले ही आप मेरे लेख से सहमति नहीं रखतें. लेकिन फिर भी आपके प्रतिक्रिया व्यक्त करने का अंदाज मुझे बहुत अच्छा लगा.

hum1 के द्वारा
February 3, 2012

thanks for your great jokes……keep continue

sinsera के द्वारा
January 30, 2012

टीम जागरण से मेरा अनुरोध है कि जिस प्रकार आप ने “बम भोले ” नाम के जीव (उसे मैं इन्सान नहीं कह सकती ) का कमेन्ट रिमूव किया है , उसी प्रकार उस का प्रोफाइल भी ब्लॉक करने की कृपा करें.

munish के द्वारा
January 30, 2012

आदरणीय तमन्नाजी, आपके इस हास्य व्यंग को पढ़ कर मैं हंसी से लोटपोट हुए जा रहा हूँ…! आपने वाकई इस बार कमाल कर दिया मैं समझता था की हास्य व्यंग राजकमल जी से बेहतर कोई लिख ही नहीं सकता…….. ! पर मेरा सोचना है की इस बार आपने उन्हें मात दे दी…….! हाँ राहुल जी की योग्यता में आपने बिलकुल सही लिखा है लेकिन इतना ज्यादा हास्य ठीक नहीं रहता पढने वालों के पेट में दर्द हो सकता है…. इसलिए उनकी योग्यता की कुछ और बातें मैं याद दिला देता हूँ की हमारे होने वाले प्रधानमन्त्री जी को बोस्टन पुलिस द्वारा २९ सितम्बर २०११ को अवैध रूप से १६०००० डॉलर रखने के जुर्म रूप में गिरफ्तार भी किया था तत्कालीन प्रधानमन्त्री के विशेष सचिव बृजेश मिश्र के हस्तक्षेप के बाद इनको छोड़ा गया, आपने सही लिखा यदि अपना बैंक अकाउंट होता तो भला अवैध रूप से रखने की क्या जरूरत थी…….! इस सम्बन्ध में आपको बहुत साड़ी साईट मिल जायेंगी जिसमें times of india और the hindu ने भी ये खबर प्रमुखता से उस समय छापी थी, उनके कुछ और भी आरोप हैं जिनमें से एक महिला आयोग दिल्ली में है क्योंकि अमेठी पुलिस ने वादी की कम्प्लेंट लेने से ही मना कर दिया…….! वो अपराध क्या है इसके विषय में भी आपको बहुत सारी साईट से जानकारी मिल जायेगी. मुझे ये तो नहीं पता की उनके कितने बैंक अकाउंट हैं परन्तु बिना अकाउंट के तो सांसद का वेतन मिलने से रहा……. अब हो सकता है की इसीलिए वो दर दर खाना खाते घूम रहे हों. हाँ उनके नाम पर तो कोई संपत्ति है और सरकारी आवास ये छोड़ते ही नहीं हैं १० जनपथ में ये तब भी रह रहे थे जब न तो इनकी माताजी सांसद थीं और न ही ये स्वयं और राजीव गांधी रहे नहीं तो भला किस अधिकार से रह रहे थे हमारे होने वाले प्रधानमंत्रीजी, और रहे भी तो क्या उसका किराया दिया……? क्योंकि आपको कुछ व्यक्तिगत बातें राहुल जी की पता हैं तो इसलिए पूछ बैठा…..! प्रिय राहुल भैया कितने विद्वान् है इसका रिकॉर्ड तो आपको संसद से मिल ही जाएगा लेकिन पिछले वर्ष जब जे.एन.यूं. के छात्रों से एक समेलन में वार्तालाप का मौका मिला तो वो वहाँ के छात्रों के सवालों का जवाब देने के बजाये बोले की “लगता है आप लोग विरोधी दल के आदमी हैं ” और बिना उत्तर दिए खिसक लिए …… ये हमारे होने वाले प्रधानमन्त्री जी केवल वहीँ बोलते हैं जहाँ केवल लोग सुनते हैं पलटकर सवाल नहीं पूछ सकते. अब बोलते क्या हैं ये तो आप भी जानती ही हैं अपने ही पूर्वजों की योग्यता पर यहाँ वहाँ प्रश्न उठाते रहते हैं….. ! इस हास्य व्यंग को मंच पर रखने के लिए आप बधाई की पात्र हैं

    Tamanna के द्वारा
    January 31, 2012

    मुनीष जी, मैंने अपने इस लेख में यह स्पष्ट रूप से लिखा है कि राहुल गांधी के अलावा आज हमारे सामने प्रधानमंत्री पद के योग्य कोई राष्ट्रीय चेहरा नहीं है. अगर आप मायावति, मुलायम सिंह यादव जैसे विभाजनकारी नेताओं को इस पद पर देखना चाह रहे हैं तो यह बात अलग है. वहीं दूसरी ओर जिन आरोपों की आप बात कर रहे हैं उनके विषय में भी मैंने यह कहा है कि राहुल गांधी और कांग्रेसपर बहुत आरोप लगे लेकिन उनमें से कितने साबित हुए है यह बात सोचनी चाहिए. वैसे भी मुझे नहीं लगता कि राहुल गांधी पर अन्य तथाकथित उम्मीदवारों से ज्यादा आरोप लगे होंगे. राहुल गांधी कितने योग्य है यह अलग बात है लेकिन उससे बहुत पहले वह गांधी है और यह स्वयं उनकी योग्यता का प्रमाण पत्र है. अपने विचारों से अवगत करवाने के लिए हार्दिक आभार

    munish के द्वारा
    February 1, 2012

    आदरणीय तमन्ना जी राहुल गांधी पर अवैध रूप से डॉलर रखने का आरोप नहीं बल्कि वो रंगे हाथ गिरफ्तार हुए हैं और अब बोस्टन पुलिस के रिकार्ड में वो मुजरिम हैं एक बार ब्रिजेश मिश्र के जमानत पर छुटाने के बाद दुबारा अदालत में पेश भी नहीं हुए इसलिए दुबारा वहाँ जाने पर उनके पुनः गिरफ्तार होने की संभावना है शायद इसीलिए वो दुबारा अमेरिका नहीं गए ….. अपनी माताजी के बीमार होने पर भी…..? इसलिए गुनाह को आरोप का नाम न दें तो अच्छा है……..! क्या कांग्रेस में राहुल गांधी से ज्यादा विद्वान् विश्वास योग्य पढ़ा लिखा नहीं है जो आप उनको प्रधानमन्त्री के रूप में देख रहीं………! निश्चित तौर पर मुलायम सिंह और मायावती इस योग्य नहीं हैं और न में ये चाहता हूँ की वो प्रधानमन्त्री बने ……….. वास्तव में अगर कोई प्रधानमन्त्री बनाने लायक है (मुझको छोड़कर) तो वो नरेन्द्र मोदी ही हैं और हाल ही में हुए एक सर्वे में देश के ४२% लोगों ने ये इच्छा ज़ाहिर भी की जबकि दुसरे नंबर पर राहुल गाँधी को पसंद करने वाले केवल १९ % थे, ये तो इस देश की गन्दी राजनीति है जो एक योग्य व्यक्ति को हमेशा दबाया जाता है अगर गाँधी होना प्रधानमन्त्री बनने की योग्यता है तो वो फिर वरुण गाँधी क्यों नहीं संसदीय कार्यवाहियों में उनका रिकॉर्ड राहुल से कहीं ज्यादा अच्छा है राहुल बड़े हैं लेकिन वरुण उनसे कहीं ज्यादा समझदार हैं उनसे ज्यादा पढ़े लिखे भी हैं तो फिर उनको प्रधानमन्त्री बनाने में क्या दिक्कत है मेरी इच्छा तो यही है की राहुल गाँधी प्रधानमन्त्री न बने क्योंकि ऐसा हुआ तो ये इस देश का दुर्भाग्य ही होगा, अब देखते हैं इस देश का दुर्भाग्य कब इसका पीछा छोड़ता है

    munish के द्वारा
    February 1, 2012

    हाँ एक बात रह गई, राहुल गांधी पर इतने आरोप तो नहीं लगे जितना की और नेताओं पर लगे हैं परन्तु राहुल पर ऐसा आरोप भी लगा है जो किसी और नेता पर नहीं लगा और शायद हमारे देश के होने वाले प्रधानमन्त्री पर इस तरह के आरोप हों ये तो शायद आप भी नहीं चाहेंगी …………!

    Tamanna के द्वारा
    February 2, 2012

    मुनीश जी, भारतीय राजनीति के परिप्रेक्ष्य में आरोपों और गुनाहों की बात करना बड़ा हास्यास्पद है. इस मसले को तो छोड़ ही देते हैं. हां आप जो नरेंद्र मोदी के लिए कह रहे हैं उन्हें प्रधानमंत्री तो तब बनाया जाएगा जब उनकी स्वयं की पार्टी उन्हें उम्मीदवार घोषित करने में सफलता हासिल करेगी. जहां तक मेरी समझ कहती है बीजेपी में सर्व सहमति बन पाना अत्यंत कठिन है. पार्टी और गठबंधन किसी एक नाम पर सहमत नहीं हो पा रहे हैं. अंदरूनी कलह ही इतनी बढ़ चुकी है कि बीजेपी गठबंधन की ओर से उम्मीदवारी अब एक पहेली बन गई है.  आपका यह भी कहना है कि राहुल गांधी के अलावा क्या कांग्रेस में कोई और बचा नहीं है? तो आप पहले मनमोहन सिंह को भी देख चुके हैं. अगर आप चाहते हैं तो हम उन्हें दोबारा प्रधानमंत्री बनवा देते हैं ( हाहाहा) खैर मुझे नहीं लगता कि अब राहुल गांधी की राह में कोई अन्य कांग्रेसी आने की हिम्मत या कोशिश करेगा. क्योंकि अंत में उन्हें प्रधानमंत्री बनना तो है ही. आखिर अपनी परंपरा भी तो निभानी है.

    hum1 के द्वारा
    February 3, 2012

    munish I completly agree with you.

RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
January 30, 2012

वंशवाद की बेल पर फलने वाले फल को बुरा भी कैसे कहा जा सकता है.राहुल महाशय ने संसद के कौन से महत्वपूर्ण बहस में हिस्सा लिया है आजतक.हमेशा उनकी बोली बंद ही रही है,विभिन्न मसलों पर.राजनीतिक परिपक्वता का अभाव है उनमें.राहुल गांधी की पैरवी में लिखे इस आलेख पर क्या टिप्पणी की जाय?

    Tamanna के द्वारा
    January 31, 2012

    राजीव कुमार जी, मुझे नहीं लगता कि हमारे देश में अगर गांधी परिवार का कोई व्यक्ति राजनीति में मुकाम बनाना चाहता है या प्रधानमंत्री बनना चाहता है तो उसे किसी सर्टिफिकेट की जरूरत है. अब आप इसे हमारी विडंबना कहिए या फिर राजनीति की नियति लेकिन राहुल गांधी के अलावा शायद हमारे पास कोई विकल्प नहीं है.

abodhbaalak के द्वारा
January 30, 2012

बम भोले जी मेरे विचार से आपने पढ़ ही लिया होगा की आपके विचार को लेकर ( विचार ?) मंच पर के हमारे बंधू गन क्या कह रहे हैं, मुझे और कुछ नहीं कहना है, पर उन सब की बात मेरी भी बात है, ये मंच ………… की जगह नहीं है, आशा है की आप समझ ही लेंगे.

yogi sarswat के द्वारा
January 30, 2012

राहुल गाँधी से बेहतर इस देश का वो नौजवान रहेगा जो रिक्शा चलाकर अपना पेट पालता है क्यूंकि वो ये जानता है की भूख और गरीबी क्या होती है ! राहुल , एक दिन किसी के यहाँ रोटी खाकर प्रधानमंत्री बनने का ख्वाब नहीं देख सकता !

    Santosh Kumar के द्वारा
    January 30, 2012

    योगी जी ,.नमस्कार तमन्नाजी ,.सादर लोटकर प्रणाम ..इस लेखपर क्या कमेन्ट दूं ,..योगी जी की बात से सहमत हूँ ,…. राजवंशों ने अपनी मूर्ख क्रूर औलादों को गद्दी पर बिठाया है ,..लेकिन हिन्दुस्तान किसी के बाप की जागीर नहीं है ..बाकी कोई जानकारी लेना हो तो मेरे लेख हैं इनकी महिमा में ,..शाही दवाखाना —पढ़ लीजियेगा ,..कमेन्ट की आंधी लाने वाले लेखन के लिए आपको बधाई

    Tamanna के द्वारा
    January 31, 2012

    आदरणीय योगी जी एवं संतोष जी,  गांधी परिवार से संबंध रखने के कारण प्रधानमंत्री का पद राहुल के लिए सपना नहीं है. उनका पालन-पोषण राजनीति को ही ध्यान में रखकर किया गया है. मेरे या आपके कहने या सोचने से कुछ बदलाव नहीं होने वाला. अपने विचारों से अवगत करवाने के लिए आभार

    hum1 के द्वारा
    February 3, 2012

    absolutely Sarswat

akraktale के द्वारा
January 30, 2012

श्रीमान, अपने घरेलु वातावरण को वहीँ तक सीमित रखें.घर की बात घर में ही रखें बाहर ना जाने दें. प्रसन्नता होगी. कृपया अपना लिंक भी पेस्ट करते तो अच्छा होता.

Vimal Mishra के द्वारा
January 30, 2012

राहुल गाँधी तो प्रधानमंत्री की कुर्सी अपने जनम के साथ ले कर आये हैं, तम्मना जी आपके और इस देश जनता के चाहने से कभी कुछ हुआ है क्या? आपका लेख सफल है, बधाई आपको!

    Tamanna के द्वारा
    January 31, 2012

    विमल जी, राहुल गांधी तो बहुत पहले प्रधानमंत्री बन जातें, लेकिन अब उन्हें देर करनी भी नहीं चाहिए. प्रतिक्रिया देने के लिए हार्दिक धन्यवाद

JAMALUDDIN ANSARI के द्वारा
January 30, 2012

तमन्ना जी नमस्कार, आपका कथन वास्तविकता की कसौटी पर एक दम खरा है , अगर पूर्वाग्रह को छोड़ कर हम सही दिल से विचार करें तो बस एक ही आवाज आएगी …. हमारा नेता कैसा हो, राहुल गाँधी जैसा हो! शुक्रिया

    Tamanna के द्वारा
    January 31, 2012

    अंसारी जी, मैंने इस लेख में स्पष्ट करने की कोशिश की है कि राहुल के अलावा हमारे पास और कोई दूसरा विकल्प भी नहीं है.

    vivek के द्वारा
    February 11, 2012

    का बे भारत क़ॆ बाहर रहते हो का तुम से पता चलता है कि तुमहे राजनिति  का क ख  भी नहि पता ,,राहुल को बना कर 10-20 अारझण बढाऩा है का ,लोल हो,

Sumit के द्वारा
January 29, 2012

हमे और कोई नहीं चाइए,,,हमारा नेता कैसा हो, राहुल गाँधी जैसा हो…..बस यही हमारे देश के अगले प्रधानमंत्री बने ,,,यही कामना है मेरी……. http://sumitnaithani23.jagranjunction.com/2012/01/24/एक-अनोखा-पत्र/

sinsera के द्वारा
January 29, 2012

ये तमन्ना जी के भाई साहब तो क्या पता नहीं अपनी बहनों के भाई भी हैं या नहीं?? भारत देश में माँ दुर्गा के शक्ति रूप की पूजा होती है और शिव के कल्याणकारी रूप की ….. माता पिता द्वारा दिया हुआ शिव का नाम बदनाम करने वाले पहले यह सोच लें कि विश्व का विनाश करने की शक्ति रखने वाले शिव शंकर भी माँ दुर्गा के चरणों में लेटने को मजबूर हो गए थे..

    Tamanna के द्वारा
    January 30, 2012

    भाई साहब… आप जैसे लोग इस मंच के लायक नहीं है. लड़कियों से बात करने का एक तरीका और सलीका होता है जो शायद आपने कभी सीखा नहीं या आपको कभी सिखाया नहीं गया. आप अपना समय जागरण के प्रतिष्ठित ब्लॉगरों के बीच बर्बाद ना करें और अपने योग्य साइटों पर विचरण करें. आनंद जी, सिनसेरा जी, रक्तले जी, अबोध बालक जी, मेरी अनुपस्थिति में इन भाई साहब को कमेंट करने के लिए हार्दिक आभार

आर.एन. शाही के द्वारा
January 29, 2012

आप शायद ठीक ही कह रही हैं मैडम । और आपकी पीढ़ी से इससे अधिक अच्छे सुझाव और विश्लेषण की उम्मीद करना भी बेमानी ही है, जिसे सिर्फ़ कम्पनियों के अच्छे से अच्छे पैकेज और आयातित रेस्तराओं के महंगे डिशेज में ही जीवन का सारा सुकून नज़र आता है । भाड़ में जाए भ्रष्टाचार, काला धन और इनकी दी हुई महंगाई की मार से पिसती जनता । लगी रहिये मैडम, हम सैकड़ों साल तक गुलामी में जीकर अंग्रेज़ी हुक़ूमत के चाबुकमार शासन के अभ्यस्त लोग हमेशा आपके हमक़दम हैं । कहें तो क़दमों में लोट कर भी दिखा दें । साधुवाद !

    Tamanna के द्वारा
    February 10, 2012

    शाही जी, आप तो इस लेख की वजह से पूरी पीढ़ी को ही कोसने लगें…. आप यह कैसे कह सकते हैं कि केवल आप ही गुलाम रहे हैं? क्या हम भारतीय नहीं है?  जनता में हम भी है जो महंगाई और बेरोजगारी की मार झेल रही है. लेकिन अगराअप यह सोच रहे हैं कि केवल मुझे कोसने से या हमारी पीढ़ी पर अंगुलिया उठाने से यह मुद्दे समाप्त हो जाएंगे तो जी भर के कोसिए मुझे सच में बहुत प्रसन्नता होगी.

ANAND PRAVIN के द्वारा
January 29, 2012

तम्मना जी के भाई साहब, आपकी नजर तो काफी तेज़ है, घर पर भी ऐसे ही बात करतें है क्या शायद आपके लिए ये मंच नहीं है, गूगल पर जाइए और भी सेक्सी लोग मिल जायेंगे आपको धन्यवाद

manoranjanthakur के द्वारा
January 29, 2012

एक बेहतर बहश का टोपिक दिया है बस लगे रहो मुन्ना भाई

    Tamanna के द्वारा
    February 2, 2012

    मनोरंजन जी, शुक्रिया लेकिन आगामी कुछ समय तक इस बहस का अंत होता मुझे तो नजर नहीं आ रहा.

akraktale के द्वारा
January 28, 2012

तमन्ना जी नमस्कार, आप मजाक भी खूब कर लेती हैं. पिछले कुछ दिनों से आप लगातार मजाक के मूड में हैं ऐसा लगता है. जिनका कोई बैंक बैलेंस नहीं बेचारे सरकारी मकान में रहते हैं इनका अपना तो कोई घर भी नहीं है. क्या खाते भी भीख मांगकर हैं? बहन जी व्यर्थ में क्यों राजनीति कर रही हैं. प्रधान मंत्री बनने में अभी बहुत समय बचा है. हाँ मनमोहन जी यदि चाहें तो फिर अवश्य ही राहुल ही प्रधान मंत्री बनेंगे वरना कांग्रेस के इतने तुकडे हो जायेंगे की समेटना मुश्किल हो जाएगा. किन्तु चुनाव के बाद जो दल सत्ता में आयेगा वही तय करेगा की किसको प्रधान मंत्री बनाना है. और उसके बारे में ना तो कोई दल अभी से कुछ कहने की स्थिति में है और ना ही कोई व्यक्ति स्वयं को प्रधानमन्त्री पद का दावेदार बता सकता है. यह सब वक्त ही निश्चित करेगा.

    Tamanna के द्वारा
    February 10, 2012

    रक्तले जी, मनमोहन सिंह जी के चाहने या ना चाहने क्या होता है जबकि वह स्वयं किसी और के रिमोट कंट्रोल है. जिस समय मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बने थे उस समय राहुल गांधी शायद पद प्राप्त करने के लिए तैयार नहीं थे, लेकिन इस बार ऐसा नहीं होगा और होना भी नहीं चाहिए क्योंकि हम एक और अयोग्य प्रधानमंत्री वहन नहींकर सकतें.

anandpravin के द्वारा
January 28, 2012

तम्मना जी, माफ़ कीजिएगा आपका लेख बहुत उम्दा है, पर आपका राहुल के अन्दर परिपक्वता को देखना कुछ जम नहीं रहा, आप देश को राहुल से बेहतर P .M मिलने की बात कह रही है, पर मैं एक बात कहना चाहूँगा की राहुल के अन्दर देश का मंत्री बन्ने की भी वास्तविक छमता नहीं, क्यों नहीं ये अलग विषय है I नरेंद्र मोदी को इतना हल्का विश्लेषण दे मत अलग करिए समय की मांग है वो गतिरोध तो हर जगह होती है उम्दा लेख के लिए अपार बधाई, और मेरी बात को गलत मत लीजियगा ये मेरी व्यक्तिगत सोच है, धन्यवाद

    Tamanna के द्वारा
    January 30, 2012

    आनंद जी, मैंने केवल तथ्य रखे हैं. क्योंकि आज की तारीख में राहुल गांधी के नाम के अलावा किसी और का नाम हमारे जहन में आता ही नहीं है. चाहे ना चाहे बहुत हो सकता है हमें गांधी परिवार के और सदस्य को कुर्सी पर बैठे देखना पड़े. नरेंद्र मोदी एक परिपक्व व्यक्ति हो सकते हैं लेकिन मुझे नहीं लगता उनके नाम को स्वयं उनकी पार्टी की सर्वसहमति मिल सकती है. अपने विचारों से अवगत करवाने के लिए धन्यवाद

sumandubey के द्वारा
January 28, 2012

तमन्ना जी नमस्कार प्रधान मंत्री कोई भी बने पर वह राज के साथ देश के हित के लिए सद नीति पर चले पर यहाँ तो सब अपना -अपना उल्लू सीधा करने में लगे है.

    Tamanna के द्वारा
    January 30, 2012

    सुमन जी, आपका कहना बिलकुल सही है. कुर्सी पर पहुंचने वाले लोग अकसर स्वार्थी हो जाते हैं.

Gagan के द्वारा
January 28, 2012

वहा तम्मना जी क्या बढ़िया विश्लेषण के साथ ??? मेरा तो ब्रेंवाश हो गया| चलो आप की खातिर थोड़ी देर के लिय पप्प्लू को P M मान लेते है इसमे हमारा क्या जाता है वैसे आप का तरीका अच्छा है मतलब जय्दा चर्चित होने का |

    Tamanna के द्वारा
    January 30, 2012

    गगन जी, यह लेख विचार के लिए कृप्या अपना ब्रेन वॉश मत कीजिए. हार्दिक धन्यवाद

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
January 28, 2012

आदरणीया तमन्ना जी, सादर अभिवादन. आप जैसे महान विचारक के आगे मैं अपनी बात रखने में संकोच कर रहा हूँ. फिर भी निवेदन प्रस्तुत है. आज भारत को एक ऐसे प्रधानमंत्री की जरूरत है जो स्वयं के शक्तिशाली और निर्णय लेने की काबिलियत रखता हो. जो किसी क्षेत्र विशेष में नहीं बल्कि एक प्रभावकारी राष्ट्रीय पहचान वाला हो. सत्य बात ऐसा होना भी चाहिए . प्रधानमंत्री कौन हो, किस पार्टी का हो अपना अपना नजरिया. महोदया जी, भारत में डेमोक्रेसी है, इनकार नहीं है न. बी जे पी में श्री आडवानी के नाम के बजाये अन्य नाम पर विरोध होता , मान भी लिया जाये. बसपा, सपा और अन्य क्षेत्रिय दलों की बात करें तो हो सकता है उन सभी के पास मुलायम सिंह यादव, मायावति जैसा मुखिया हो लेकिन क्या आप उन्हें प्रधानमंत्री के रूप में देखना पसंद कर सकते हैं? क्या प्रगति की राह पर चलने वाले भारत एक ऐसे प्रधानमंत्री का बोझ उठा सकता है जिसकी लगभग सभी नीतियां जाति, आरक्षण और विभाजन पर आधारित हों? क्या हमें एक ऐसे प्रतिनिधित्व की जरूरत है जो अखण्डित भारत के सपने को पूरी तरह ध्वस्त कर भारत के भीतर ही विभाजन के बीज बोने पर अमादा हो जाएं? चलिए इसे भी किसी अंश तक विचारणीय है. अपना अपना आंकलन है. जिसे ना तो अपनी पार्टी जी बेरुखी का सामना करना पड़े और वह सर्वायामी योग्यता भी रखता हो. ऐसे में कांग़्रेस, जो चरणवंदना में पूर्ण विश्वास रखती है, अब आप पुनः विचार करिये कि डेमोक्रेटिक देश में किस पार्टी में डेमोक्रेसी नजर आ रही है. सारे तथ्य आप के द्वारा दिए गए हैं, मैंने उसकी अनालिसिस की है. प्रस्तुति के लिए बधाई.

    Tamanna के द्वारा
    January 30, 2012

    प्रदीप जी, कुछ ही समय में हमें अपने नए प्रधानमंत्री की मूंह दिखाई करनी है. और अब तक जो हालात बनें हैं उनके अनुसार आडवाणी जी और राहुल गांधी के अलावा मुझे और कोई राष्ट्रीय चेहरा नजर नहीं आता. और जहां तक आडवाणी जी की बात है तो उनकी उम्र उन्हें इतना बोझिल पद ग्रहण करने की अनुमति नहीं देती शेष केवल राहुल गांधी ही रह जाते हैं. अगर आपके पस कोई इससे बेहतर विकल्प है तो कृप्या कर मुझे भी बताएं.

chandsingh के द्वारा
January 28, 2012

वहा आप की राज नीतिक भक्ति or कांग्रेश भक्ति no comments हा हा हा हा हा

abodhbaalak के द्वारा
January 28, 2012

तमन्ना जी कुछ समय पहले पढ़ा तो था की अगला प्रधानमंत्री के लिए नरेंद्र मोदी और राहुल गाँधी के नाम सबसे उपर …… आपने अच्छा विश्लेषात्मक लेख लिखा है, पर राजनीती बड़ी ही अजीब शय है, देखते हैं हम भी के आगे क्या ……. वैसे क्या आजकल मेरे साथ कोई नाराज़गी है ? http://abodhbaalak.jagranjunction.com

    Tamanna के द्वारा
    January 30, 2012

    अबोधबालक जी, हालात तो यहीं इशारा कर रहे हैं कि जल्द ही हो सकता है हमें एक और गांधी को प्रधानमंत्री के रूप में देखना पड़ें. प्रतिक्रिया व्यक्त करने के लिए हार्दिक धन्यवाद


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