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मुख्यमंत्री अखिलेश यादव: वंशवाद की मजबूत होती जड़ें

Posted On: 14 Mar, 2012 में

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rahul vs akhileshभारतीय राजनीति की पहचान बन चुकी, देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस पर हमेशा वंशवाद को बढ़ावा देने जैसे कई गंभीर आरोप लगते रहे हैं. प्राय: यही सुनने को मिलता है कि कांग्रेस दल, जो अब गांधी परिवार का ही दूसरा नाम बन गया है, में योग्य नेताओं की उपेक्षा कर केवल पारिवारिक और करीबी लोगों को ही महत्व दिया जाता है. जिसके परिणामस्वरूप लगभग सारे प्रभावपूर्ण ओहदे उनके ही अधिकार क्षेत्र में रखे जाते हैं. खैर वर्तमान परिदृश्य को देखते हुए हम कांग्रेस पर लगने वाली आरोपों को नजरअंदाज नहीं कर सकतें, क्योंकि हमारे सामने कई ऐसे उदाहरण है जो कांग्रेस दल में व्याप्त वंशवाद की पुष्टि करते हैं.


लेकिन अब वंशवाद का अधिकार क्षेत्र केवल कांग्रेस तक ही सीमित नहीं रह गया है. हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में बीएसपी की नीतियों से उत्तर-प्रदेश की जनता में व्याप्त असंतोष के कारण समाजवादी पार्टी पूर्ण बहुमत के साथ अपनी सरकार बनाने में सफल रही. सपा की जीत के साथ ही यह भी निश्चित हो गया था कि पार्टी के सबसे अनुभवी और परिपक्व नेता मुलायम सिंह यादव, जिन्हें पार्टी कार्यकर्ता और सपा के करीबी लोग नेताजी कहकर पुकारते हैं, निर्विवाद रूप से प्रदेश के मुख्यमंत्री बनाए जाएंगे. परंतु जब मुख्यमंत्री चुनने की बारी आई तो उन्होंने कांग्रेस की नीति अपनाते हुए राजनीति के क्षेत्र में अपरिपक्व बेटे को पार्टी की कमान सौंप कर यह साबित कर दिया कि भारतीय राजनीति में वंशवाद की जड़े बेहद मजबूत होती जा रही हैं.


मुलायम सिंह यादव और पार्टी के अन्य अनुभवी नेताओं का कहना है कि अब क्षेत्र को एक युवा चेहरे की आवश्यकता है इसीलिए उत्तर-प्रदेश और समाजवादी पार्टी दोनों में ही युवाओं को अवसर दिया जाना चाहिए. यूं तो परिस्थितियों के हिसाब से देखा जाए तो समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का यह निर्णय बिल्कुल सही था. लेकिन जब युवा चेहरे को सत्ता सौंपने की बात आई तो सभी ने अपरिपक्व लेकिन नेताजी के बेटे अखिलेश यादव को ही उत्तर-प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में योग्य समझा. पार्टी का यह निर्णय किसी भी रूप में युक्तिसंगत नहीं कहा जा सकता.


अभी तक अखिलेश यादव ने मुख्य राजनीति के क्षेत्र में कोई खास योगदान नहीं रहा है इसीलिए वह मुख्यमंत्री बनने के बाद क्या कमाल दिखा पाएंगे इस पर अभी से कोई राय बना लेना सही नहीं कहा जाएगा.


विकास और प्रगति की उम्मीद की आस लगाए उत्तर-प्रदेश की जनता बहुत लंबे समय से मायावति के नेतृत्व वाली बीएसपी की सरकार तथाकथित सोशल इनंजीनियरिंग नीतियों का दंश झेल रही है. ऐसे में स्वाभाविक है कि प्रदेश को एक अनुभवी और राजनैतिक दृष्टि से परिपक्व मुख्यमंत्री की जरूरत है, लेकिन इन सभी अपेक्षाओं पर लगाम लगाते हुए मुलायम सिंह यादव ने अपने पुत्र अखिलेश यादव को उत्तर-प्रदेश का भावी कर्ता-धर्ता नियुक्त कर दिया. उनका यह निर्णय साफ प्रमाणित करता है कि अब जातिवाद के अलावा भारतीय राजनीति में वंशवाद भी अपने बढ़ते चरण में है. ऐसे में भाई-भतीजावाद जैसे आरोप केवल कांग्रेस के सिर ही नहीं मड़ सकतें क्योंकि अब उसकी देखा-देखी अन्य पार्टियां भी वंशवाद, जिसका निरंतर बढ़ता स्वरूप भारतीय राजनीति के लिए घातक सिद्ध हो सकता है, को बड़ी आत्मीयता के साथ स्वीकार कर लिया है.


मुलायम सिंह यादव स्वयं कभी कांग्रेस का विरोध करते नहीं धकें, लेकिन जब कुर्सी की माया ने उन्हें जकड़ा तो उन्हें भी शायद कांग्रेस की वर्षों पुरानी नीति याद आ गई. मुलायम सिंह यादव ने यह निर्णय लिया कि इस बार उत्तर-प्रदेश की कमान किसी युवा को सौंपनी चाहिए. इससे वह प्रदेश के युवक़ओं को तो आकर्षित करेंगे ही साथ ही राजनीति में उनकी साख भी बढ़ जाएगी. वैसे भी अन्य किसी युवा को अवसर देने के स्थान पर घर के चिराग को कमान सौंप देना फायदे का सौदा ही है.




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62 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

rahul gandhi--hopeless politician के द्वारा
October 17, 2013

rahul gandhi is not quite capable neta ji. he goes to a poor persson hut & had food sleep theire after having drugs….. my question is that after 69 yrs of freedom why people are living in hut…….this is not big new that rahul had dinner in a hut…big question is that why hut is in our country…….rich people have lots of big building but poor peiple doesn’t have a single room flate…….have u any idea how many peiople are living in jjopad patti————————??????????????????????????????????????? can any party neta ji can answer my question……………………..?????????. pl revert with some figure and suitable anser with solution—parmanent fix……..of dirty polticis……………neta ji insist people to do the wrong thing in life…………

ashokkumardubey के द्वारा
March 31, 2012

तमन्नाजी , मिला जुलकर सभी पार्टियाँ अब वंशवाद का हीं समर्थन करती नजर आ रही है और इस देश की जनता भी उनको स्वीकार कर रही है उन्ही को चुनाव में जीत भी दिला रही है यूपी के चुनाव परिणाम क्या दर्शाते हैं? यह किसको मालूम नहीं समजवादी पार्टी कल तक गुंडों की पार्टी कहलाती थी और चुनाव में पूर्ण बहुमत लाकर सर्कार में काबिज हो गए और तो और चुनाव जीतते ही इनके सिपहसलार गुंडे अपना असली रूप दिखाने लगे कई जगह हत्या ,मारपीट की घटनाएँ प्रकाश में आई हो सकता है यह हारी हुयी पार्टी के समर्थको का काम हो बदनाम करने एवं राजनितिक बदला लेने के लिए पार्टियाँ कई तरह के हथकंडे अपनाते हैं पर इसमें संदेह नहीं अभी भी आपराधिक छबि वाले नेता एसपी में भी जीतकर आये हैं क्या वे अब सुधर जायेंगे अगर ऐसा होता है तो एक अजूबा कहा जायेगा और अखिलेश यादव जो युवा मुख्यमंत्री बने हैं उनसे यूपी की जनता आस लगाये बैठी है जरुर वे चुनाव में किये गए वायदे पूरे करने की और अपना मजबूत कदम उठाएंगे आनेवाले तीन महीने में कुछ अगर नजर आया तो यह एक युवा नेता की उपलब्धि कही जाएगी और लोग फिर से नेताओं के वायदे पर भरोसा करने लगेंगे .

virendra yadav के द्वारा
March 27, 2012

मै मुख्यमंत्री जी से निवेदन करता हूँ की वे किसानो के तरफ विशेष ज्यादा ध्यान देना चाहिए ? जिससे की गरीब लोगो को भी खाना और कपड़ा मिल सके , छात्रों को लैपटॉप और तबलेत देने से उनके घर की आर्थिक स्थिति ख़राब हो सकती है और बेरोजगारों को बेरोजगारी भत्ता देकर और बिरोज्गारो को बढ़ावा देना होगा ? अगर उत्तेर प्रदेश का विकास करना है तो निचे देये गए वाक्य पर ध्यान देना चाहिए ???? २४ घंटे बिजली की ब्यवस्था खाद का दाम कम कराना कल कारखानों का निरमान कराना छात्रों के लिए आचे स्कूल की ब्यवस्था करना और फ़ीस कम करना बेरोजगारों को रोजगार देना न की बेरिज्गरी भत्ता आचे आस्पताल की सुविधा करना यता यात की सुविधा प्रदान करना और सी बहुत आईसी चीजे है जिससे की देश का विकाश हो सकता है

SHANI के द्वारा
March 27, 2012

 वंसबाद से कोई फर्क नहीं पड़ता मैं है की जो लाल टोपी सर पे है वो सर सही है या टोपी ……… देखना ये है की ये पढ़े लिखे इंजिनियर साहब अपने प्रदेश के लिए क्या नया करते है या भैस पानी में ….

    virendra yadav के द्वारा
    March 27, 2012

    मंत्री जी उत्तेर प्रदेश की आर्थिक स्थिति कमजोर कर रहे है ?

Rajesh Dubey के द्वारा
March 23, 2012

. जाने-अनजाने, वंशवाद की जड़े गहरी हो रही है. लोकतंत्र में लोकतान्त्रिक पार्टियों के प्रमुखों द्वारा परिवार के लोगों को प्रमुख ओहदों पर बिठाना आम और सर्वमान्य हो गया है. उतर प्रदेश में अगर युवा ही समाजवादी पार्टी की मांग थी, तो अखिलेश के अलावे भी बहुत सारे नौजवान पार्टी के समर्पित है. लेकिन यहाँ मुख्यमंत्री की कुर्सी अखिलेश को इस लिए मिली की अखिलेश सपा प्रमुख मुलायम सिंह के बेटे है. लोकतंत्र में ये घातक प्रवृति है.

    Tamanna के द्वारा
    March 26, 2012

    राजेश जी… जैसे राजा का बेटा राजा बनता था वैसे ही अब मुख्यमंत्री का बेटा मुख्यमंत्री बनेगा.!!!

    ashokkumardubey के द्वारा
    March 31, 2012

    भले लोकतंत्र में वंशवाद एक घटक प्रविर्ती है पर जब यही हो रहा है जैसे रजा का बेटा रजा नेता का बेटा नेता और जनता इस तथ्य को जानते हुए भी इसको स्वीकार कर रही है , आज राजनीती में निति नहीं है केवल राज है और एन कें प्रकरण राजनीतिबाज लोग सत्ता पर काबिज होकर राज कर रहे है हाँ लोकतंत्र का ढिंढोरा जरुर पीट रहे है जो अपने संविधान के तहत चुनकर आनेवाले को राज करने का अधिकार देता है और अपराधियों को भी राज करने के अवसर यह लोकतंत्र ही मुहैया करा रहा है बेशक यह घटक ही क्यूँ न हो ?

vivek1959 के द्वारा
March 22, 2012

आपके ब्लाग को प्रतियोगिता में चुने जाने पर पुनः बधाई

    Tamanna के द्वारा
    March 26, 2012

    विवेक जी, बधाई के लिए धन्यवाद मांफ कीजिए आपको जवाब देने में थोड़ी देर हो गई.

rahulpriyadarshi के द्वारा
March 22, 2012

बहुत ही तीक्ष्ण और सटीक आलेख,यह एक नए प्रकार का वंशवादी-जातिवादी-समाजवाद है,जो अवसरवाद और प्रलोभनवाद के कंधे पर सवार हो कर सर के ऊपर पहुच गया है,और आम आदमी के सर पर ५ साल तक नाचेगा.लोकतंत्र है तो सब जायज है.

    Tamanna के द्वारा
    March 26, 2012

    राहुल जी…सही कहना है आपका… लोकतंत्र में तो सब चलता है… प्रतिक्रिया व्यक्त करने के लिए हार्दिक धन्यवाद !!

ashok kumar dubey के द्वारा
March 21, 2012

तमन्नाजी , बेस्ट ब्लागर चुने जाने के लिए हार्दिक बधाई वाकई आपने बहुत अच्छा लिखा है राजनीती में वंशवाद विषय पर

    Tamanna के द्वारा
    March 22, 2012

    आदरणीय अशोक जी…. अभी तो सिर्फ शॉर्टलिस्टेड हुई हूं.. आप सभी की शुभकामनाएं मिली तो आगे भी अच्छा रहेगा.

ashokkumardubey के द्वारा
March 21, 2012

जब राजनीती फायदे के लिए की जाएगी तब तो सब कुछ जायज हीं है क्या वंशवाद, क्या जातिवाद, क्या सम्प्रदायवाद , किसी नेता या पार्टी को समाज या देश की चिंता नहीं अपनी कुर्सी कायम रहे कोई जोड़ तोड़ करनी पड़े सब कुछ करते रहना ही राजनीती की परिभासा रह गयी है एसपी का इस तरह बहुमत प्राप्त करना यही सन्देश देता है अपने देश में जातिवाद वंशवाद और सम्प्रदायवाद बुरी तरह से हावी हो रहा है और जनता मन से कहो या बेमन से इसी को स्वीकार कर रही है वर्ना कल तक गुंडों की पार्टी कही जानेवाली एसपी आज यूपी का भविष्य सवारनेवाली पार्टी कैसे बन गयी . और इस पार्टी को इतनी बड़ी जीत कैसे हासिल हुयी . यूपी के युवा सीएम अखिलेश यादव ने यूपी की जनता को दिलासा दिया है की वे एक स्वक्छ प्रशासन देंगे और आगाज ऐसा हुवा की चुनाव परिणाम आते ही उनकी पार्टी के दबंग एवं गुंडे नेता गोलियां चलाने लगे अपना असली रूप दिखाने लगे, अगर आगाज ऐसा है तो भविष्य कैसा होगा? अब यूपी की जनता को ही सोचना होगा खैर कुछ समय और इन्तेजार की जरुरत है. अब देश के नेताओं ने देख लिया है जनता से कटने का क्या हश्र होता है ?अब तो दोनों राष्ट्रिय पार्टियों को गंभीरता से सोचना है आगे आने वाले लोकसभा चुनाव में ये पार्टियाँ जनता की अपेक्छओं पर कितने खरे उतरते हैं. भ्रष्टाचार एवं काले धन जैसे महत्वपूर्ण मसले पर क्या कार्रवाई करते हैं और उनका सरोकार जनता से कितना और अपनी कुर्सी से कितना रहता है यह वक्त बताएगा और देश की राजनीती की दिशा भी उसीसे तय होगी अन्ना फिर से २५ मार्च को जंतर मंतर पर बैठनेवाले हैं और पूरे देश में कांग्रेस की गलत नीतियों के विरोध जन जागरण का कम शुरू होनेवाला है .मेरे विचार से कोई भी सीएम बने जनता एवं देश का काम हो फिर चाहे वह नेता का बेटा है या रिश्तेदार जनता को क्या ?

    Tamanna के द्वारा
    March 21, 2012

    अशोक कुमार जी … सर्वप्रथम तो प्रतिक्रिया व्यक्त करने के लिए हार्दिक धन्यवाद…..यूपी की जनता के पास एक बार फिर समाजवादी पार्टी को अवसर देने के अलावा शायद कोई विकल्प ही नहीं दिया गया. राष्ट्रीय दल वहां लोकप्रिय है नहीं और बीएसपी ने जो उनके साथ किया हम सभी यह जानते हैं….. आप सही कह रहे हैं कि जब राजनीति अपना स्वरूप पूरी तरह बदल चुकी है तो ऐसे में जातिवाद और वंशवाद सब कुछ जरूरी और जायज हो गया है… आप अन्ना के अनशन पर बैठने की बात कर रहे हैं तो मुझे बिलकुल नहीं लगता कि अनशन जनता को प्रभावित कर सकते हैं..क्योंकि पूर्व में तथाकथित कांग्रेस विरोधी जो लहर उठी थी उसका कांग्रेस को कोई नुकसान नहीं हुआ अपितु फायदा ही हुआ है. 

    Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
    March 21, 2012

    तमन्ना जी , यथोचित ! राजनीती से वंशवाद का रिश्ता रहा अनोखा , इस रिश्ते से पग-पग पर है मिला राष्ट्र को धोखा | ऐसे ही कुछ लोग देश के बने हुए हैं कोढ़ | सूरत बदल-बदलकर बैठे संसद में हैं चोर || दागी-वैरागी- अनुरागी-कोई है कर-खोर ||| आप की लेखनी में धार है , आप का प्रतिक्रियात्मक आक्रमण काफी उग्र होता है !!! यदि उपर्युक्त कवितात्मक पंक्तियाँ पूरी की पूरी देखना चाहें तो मेरे ब्लौग पर आपदेख सकतीं हैं | बधाई !

dineshaastik के द्वारा
March 19, 2012

तमन्ना जी आपसे निवेदन है कि आप मेरी प्रतिक्रिया का प्रतिउत्तर अवश्य ही दिया करे, चाहे वह आलोचनात्मक ही क्यों न हो। आलोचनात्मक उत्तर या प्रतिउत्तर से मुझे अधिक खुशी होगी। आपकी पिछली पोस्ट पर मेरी अंतिम प्रतिक्रिया पर आपके प्रतिउत्तर की प्रतीक्षा कर रहा हूँ। 

sinsera के द्वारा
March 18, 2012

तमन्ना जी नमस्कार, वंशवाद की बात आप की बिलकुल सही है लेकिन अखिलेश के मुख्यमंत्री बनने में एक उम्मीद तो है. चलिए हम भूल जाते हैं कि वो मुलायम सिंह के बेटे हैं. इस के अलावा उन की दूसरी विशेषताओं के बारे में सोचिये. युवा हैं, इंजिनियर हैं, तकनीकी का प्रयोग करना जानते हैं, खा पी के संतुष्ट हैं तो जनता के पैसे को अपने घर में अपेक्षाकृत कम भरें गे. हमें चाहिए कि हम उम्मीद रखें, अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगा…

    Tamanna के द्वारा
    March 21, 2012

    सरिता जी… आपका कहना सही है हो सकता है अखिलेश यादव अपनी पार्टी और नेताजी की नकारात्मक छवि से इतर काम करें. अभी से हम कुछ ज्यादा नहीं कह सकते लेकिन यह बात भी नकारी नहीं जा सकती कि सत्ता पर अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए ही अखिलेश को मुख्यमंत्री चुना गया है. भले ही यह निर्णय युवा नेतृत्व को ध्यान में रखकर किया गया हो लेकिन इससे वंशवाद को भी उतना ही बढ़ावा मिल रहा है.

मनु (tosi) के द्वारा
March 16, 2012

तमन्ना जी क्या खूब लेख है …….. वंशवाद तो शुरू से ही है । युवाओं के नाम पर नेता लोगों को बस अपने ही दिखते हैं, सच कहा आपने ……. अच्छा लेख बधाई स्वीकार कीजिये

    Tamanna के द्वारा
    March 17, 2012

    मनु जी.. हार्दिक आभार

Sumit के द्वारा
March 16, 2012

अभी तो अखिलेश जी को आये चार दिन भी नहीं हुवे, अभी से क्या कहे ….आगे आगे देखे होता है क्या …….. http://sumitnaithani23.jagranjunction.com/2012/03/15/आत्महत्या/

    Tamanna के द्वारा
    March 17, 2012

    सुमित जी… हां इंतजार तो करना ही पड़ेगा

Jayprakash Mishra के द्वारा
March 16, 2012

पर क्या हम किसी आम आदमी को वोट कर सकते हैं

    Tamanna के द्वारा
    March 17, 2012

    जयप्रकाश जी,… नेता बनने से पहले सभी आम आदमी ही होते हैं…!!

nishamittal के द्वारा
March 16, 2012

तमन्ना जी किसी भी एक पार्टीका नाम लेना व्यर्थ है क्योंकि जी नकी संतान हैं ,वो संतान को अन्यथा पत्नी को आगे बढ़ाने में लगे हैं

    Tamanna के द्वारा
    March 17, 2012

    निशा जी… हां.. यह बात भी सही है.. जो लोग यह समझ जाते हैं कि उन्हें वोट मिलना मुश्किल है वो अपने घर की बहु-बेटी को प्रतिनिधी बना देते हैं.. हम नहीं तो परिवार का कोई और सही..!! पर हो परिवार का ही

satish3840 के द्वारा
March 16, 2012

तमन्ना जी वंशवाद कहाँ नहीं हें / नोकरी में , राजनीती में , डोक्टर , मास्टर , वकील , हर जगह वंश वाद चल रहा हें / हिन्दू परम्परा के अनुसार घर के बुजुर्ग की म्रत्यु के बाद पगड़ी बाँधने का रिवाज हें / आज तो नेता हो या अभिनेता , गुरु हो चेला सभी जीते जी अपने बच्चों को पगड़ी बाँध रहें हें / आज राजनीती या किसी भी प्रोफेशन में बिना वंशवाद के आगे नहीं बढ़ा जा सकता / किसान का लड़का किसान , डॉक्टर की संतान डॉक्टर , नेता की संतान नेता बने तो क्या हर्ज हें / अपने बल पर राह बनाने के लिए या खुद कुवाँ खोदकर पानी पीने में सारी जिन्दगी गुजर जाती हें / यही बात अखिलेश की हें / आम के पेड़ लगाने वाला अपनी संतान को आम दे जाता हें शायद अपनी जिन्दगी में उसका फल खाए ( आज खेती की तकनीक बदल गयी हें , सो अब खा सकता हें ) राहुल हो जयंत /अजीत , राजनाथ सिंह हो या सलमान खुर्शीद , फारुख अब्दुल्ला हो या और न जाने कितने नेता , नेता गिरी उनको विरासत में मिलती हें / जन सेवा तो आम आदमी करता हें व् हरीश रावत की तरह हमेशा कुर्शी से हाथ धो बैठता हें / अच्छा ब्लॉग व् विषय , धन्यवाद

    Tamanna के द्वारा
    March 17, 2012

    सतीश जी… ठीक कहना है आपका…. प्रतिक्रिया व्यक्त करने के लिए हार्दिक धन्यवाद

March 16, 2012

तमन्ना जी नमस्कार ! सुंदर आंकलन और विश्लेश्लेषण । मैं आपके तर्क से बिलकुल सहमत हूँ ! अच्छा हुआ मोदी, नितीश , जय ललिता , ममता बनर्जी , मायावती को को संतान नहीं है…..वरना ये परंपरा तो बनी ही रहेगी…..ईश्वर इस देश का भला करे !

    Tamanna के द्वारा
    March 17, 2012

    हा हा हा….. लेकिन उनके संतान ना होने का फायदा अन्य लोगों को तो मिल सकता है ना !!

chaatak के द्वारा
March 16, 2012

तमन्ना जी, सादर अभिवादन, वंशवाद की ये परंपरा नेहरु खानदान से शुरू जरूर होती है लेकिन वहां ख़त्म नहीं होती| अब तो उपहार में मुख्यमंत्री पद देने की रवायत भी पुराणी पड़ चुकी है| कश्मीर में फारूख अब्दुल्ला ने इसकी शुरुआत की है मुलायम तो बस नक़्शे-कदम पर चल रहे हैं| अच्छी पोस्ट पर हार्दिक बधाई!

    Tamanna के द्वारा
    March 17, 2012

    चातक जी…. बहुत सही कहा… मुझे लगता है कि अब हम बहुत आसानी से यह निशित कर सकते हैं कि अगली गद्दी किसे मिल सकती है.

ANAND PRAVIN के द्वारा
March 15, 2012

तमन्ना जी, नमस्कार आज वंशवाद वास्तव में एक रोग से ज्यादा कुछ नहीं रह गया है…………अखिलेश के चुनाव जितने के बाद हुई ताजपोशी एक जीत को भुनाने जैसी बात है…………जैसे की लालू ने बिहार में राबड़ी देवी को ताज पहना खुद रेल को हांक रहे थे मुलायम भी उसी राह पर है……………हाँ एक युवा से कुछ अच्छे परिणामो की भी उम्मीद रहती है……….बिना उनको कुछ दिन देखे कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी………….सार्थक लेख आपका

    Tamanna के द्वारा
    March 17, 2012

    आनंद जी.. सही कहना है आपका.. अभी कुछ कहना जल्दबाजी ही होगी.. क्योंकि अभी तो नई नई ताजपोशी हुई है.. लेकिन एक बात तो साफ है कि अब किसी आम जन के लिए राजनीति में अच्छा ओहदा प्राप्त करना मुश्किल होने वाला है.

tejwanig के द्वारा
March 15, 2012

बहुत ही सटीक लिखा है आपने, बहुत बहुत साधुवाद

    Tamanna के द्वारा
    March 17, 2012

    तेजवानी जी.. बहुत-बहुत शुक्रिया

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
March 15, 2012

aadarniya तमन्ना जी, सादर विचारणीय एवं सराहनीय आलेख के लिये बधाई स्वीकृत करें।

    shashibhushan1959 के द्वारा
    March 15, 2012

    ठीक कहा आपने प्रदीप जी !

    jlsingh के द्वारा
    March 16, 2012

    आदरणीय शशि जी, सादर! मुझे भी साथ ले लीजिये! ये दोस्ती! हम नहीं तोड़ेंगे!…..

    PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
    March 16, 2012

    ये दोस्ती है , रिश्तेदारी नहीं जो टूट जाये. आदरणीय शशि जी, सिंह साहब जी.

    Tamanna के द्वारा
    March 17, 2012

    प्रतिक्रिया व्यक्त करने के लिए आप सभी का हार्दिक धन्यवाद… ईश्वर आप सभी की दोस्ती यूं ही बरकरार रखें…!!!

    vikramjitsingh के द्वारा
    March 18, 2012

    प्रदीप जी, शशि जी, जवाहर जी, प्रदीप जी, तमन्ना जी, कोई और नहीं है..? अभी लाइन छोटी है, नीचे बहुत जगह बाकी है………..

chandanrai के द्वारा
March 15, 2012

आदरणीय तमन्ना जी , आपने हर महत्वपूर्ण बिंदु को छुआ है और उसका आंकलन किया है ! बहुत सटीक विश्लेषण और बिलकुल ठीक विचार ! बहुत बेहतर http://chandanrai.jagranjunction.com/आत्महत्या

    Tamanna के द्वारा
    March 17, 2012

    धन्यवाद चंदन जी..

dineshaastik के द्वारा
March 15, 2012

तमन्ना जी, मैं आपके इस आलेख के शब्द शब्द का समर्थन करता हूँ। लगभग सभी राजनैतिक दल कम्पनियों की तरह काम कर रहीं हैं। खासतौर पर क्षेत्रीय पार्टियाँ। परिवारवाद लोकतंत्र की मूल भावना के विरुद्ध है। इन्दिरा तो निर्विवाद रूप से प्रधानमंत्री पद के योग्य थी। जिसे उन्होंने सिद्ध करके भी दिखा दिया।      विचारणीय एवं सराहनीय आलेख के लिये बधाई स्वीकृत करें।

    Tamanna के द्वारा
    March 17, 2012

    दिनेश जी… इंदिरा गांधी योग्य थी पर उन्हें भी नाजाने कितनी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा. उस समय की राजनीति और आज की राजनीति में बहुत बड़ा अंतर हैं. स्वार्थ के लिए अपने परिवार जनों और निकट संबंधियों को राजनीति में प्रवेश देना बेहद चिंताजनक तथ्य है.

March 14, 2012

आदरणीय तमन्ना जी, आपका लेख पढ़ा. बिलकुल सही लिखा आपने! वंशवाद गहरा रहा है. और ऐसे ही रहा, तो बाहर से नए विचारकों, नेताओं को कैसे प्रवेश मिल पायेगा? वातानुकूलन नहीं हो पायेगा. बड़ा प्रश्न है. पर उत्तर की आशा किसे है भारत में? विषय से इतर, जो बात मुझसे कहे बिना रहा नहीं जायेगा, वह यह है, की आपकी लेखनी का दम मुझे हमेशा ही हैरान करता है. ऐसा तो बहुत बार हुआ है, की जब आपके विचार किसी विपरीत दिशा में थे, और उनपर आम स्वीकृति न बन पायी. पर आपके शब्द-चातुर्य, और उन्नत शब्दकोष पर कभी कोई सवाल नहीं है. आज के युवाओं से ऐसी अपेक्षा कोई नहीं कर सकता. ऐसे में, आप दो कदम आगे ही हैं. बहुत-बहुत बधाई इसके लिए. और शुभकामनाएं, कि अपनी लेखनी के जादू के साथ-साथ आप अपने विचारों से भी सामने वाले का मुंह बंद कर सकें! सादर.

    Tamanna के द्वारा
    March 17, 2012

    टिम्सी जी…. लेखन के क्षेत्र में अभी मेरी शुरूआत ही मान लीजिए… आपको मेरा प्रयास पसंद आया इसके लिए मैं आपकी दिल से आभारी हूं. उम्मीद हैं कि मंच के माध्यम से हमारा और आपका संबंध यूं ही बना रहेगा… !!! आपकी प्रतिक्रिया हमेशा मेरे लिए महत्वपूर्ण रहती हैं… !!

s.p. singh के द्वारा
March 14, 2012

आदरणीय तमन्ना जी आपका सरकार के प्रति आशापूर्ण लेख करोड़ों उत्तर प्रदेश वासियों की आशा का प्रतिनिधत्व करता प्रतीत होता है परन्तु इस वर्तमान युग की वंशवाद की राजनीती में ऐसा ही है जैसे घोर अन्धकार में एक दिए के सहारे सफ़र तय करना भर हो ?

    Tamanna के द्वारा
    March 17, 2012

    एस.पी सिंह जी….भारतीय राजनीति के हालात अब दिनोंदिन खराब होते जा रहे हैं…. पहले से ही जातिवाद का दंश झेल रही राजनीति को अब वंशवाद के विस्तृत प्रभाव से भी दो-चार होना पड़ रहा है.

omdikshit के द्वारा
March 14, 2012

तमन्ना जी, नमस्कार. वंशवाद का आरोप केवल गाँधी परिवार पर ही लगाया जा सकता है,क्योंकि पंडित नेहरु की पुत्री थी,इंदिरा जी,और राजीव जी उनके नाती.उनके बाद तो उस परिवार से कोई प्रधान मंत्री या मुख्य-मंत्री नहीं हुआ. हाँ,कांग्रेस-पार्टी में जरूर उनका प्रभुत्व है.अब तो सभी नेता वंश -वादी हो गए और मुलायम सिंह के परिवार में ,शायद,कोई नहीं बचा जो विधायक या सांसद न हो….मगर उसमे भी दाग है,मेरा लेख तो आप ने पढ़ा ही है.

    Hariom dikshit के द्वारा
    March 16, 2012

    दूधों नहाओ, पूतों फलो बिटिया ! तुम्हारा ह्रदय परिवर्तन देखकर चाचा खुश हुआ. तुम्हारे विचार उज्जवल धवल हैं. परन्तु मेरा कमेन्ट डिलीट न करना . चाचा से कभी नुकसान नहीं पहुंचेगा . आशीर्वाद.

    Tamanna के द्वारा
    March 16, 2012

    ओम दीक्षित जी,,,जैसे अभिनेता का बेटा अभिनेता बनता है वैसे ही अब नेता का बेटा नेता बनेगा… नए चेहरों का राजनीति में आगमन अब मुश्किल होने वाला है.

yogi sarswat के द्वारा
March 14, 2012

तमन्ना जी नमस्कार ! बहुत बेहतरीन लेख ! ज्यादातर पार्टियों में वंशवाद ही चल रहा है ! कांग्रेस भी इससे अछूती नहीं है बल्कि उसने ही ये दौर शुरू किया था !

    Tamanna के द्वारा
    March 16, 2012

    योगी जी… कांग्रेस द्वारा शुरू की गई इस परंपरा को अब अन्य राजनैतिक पार्टियां बढ़ावा दे रही हैं.

vikramjitsingh के द्वारा
March 14, 2012

प्रिय तमन्ना जी, सादर, लगता है, खरबूजे ने कुछ-कुछ रंग पकड़ना शुरू कर दिया है. (आगाज़ तो अच्छा है, अंजाम खुदा जाने….)

    Tamanna के द्वारा
    March 16, 2012

    विक्रमजीत जी… प्रतिक्रिया व्यक्त करने के लिए हार्दिक धन्यवाद

ajaydubeydeoria के द्वारा
March 14, 2012

तमन्ना जी नमस्कार, हमारे देश में राजनीति भी एक व्यवसाय बन गयी है,. राजनीतिज्ञों ने औद्धोगिक घरानों का रूप ले लिया है. जाहिर है वंशवाद की परंपरा चलनी ही है. अब चाहें माया हों या मुलायम.

    akraktale के द्वारा
    March 15, 2012

    तमन्ना जी सादर नमस्कार, मै अजय जी की बात से पूर्णतः सहमत हूँ कि अब तो यही होना है क्योंकि कोई भी घर बैठे होने वाली करोड़ों की कमाई को किसी दुसरे के घर नहीं जाने देगा. और कानूनी नजरिये से देखें तो पांच वर्ष में नेताजी पेंशन पाने के हकदार हो जाते हैं अन्य सुविधाओं की गिनती भी मुश्किल है.जबकि देश के कई कर्मचारी चालीस वर्ष नौकरी करने के बाद भी पेंशन से वंचित हैं.

    Tamanna के द्वारा
    March 16, 2012

    आदरणीय अजय जी एवं रक्ताले जी… आप दोनों का कहना बिलकुल सही है. मुलायम सिंह यादव ने युवाओं को अवसर देने की चाहत में अपने पुत्र को ही मुख्यमंत्री बना दिया. राजनीति के लिए वंशवाद एक अभिशाप है, लेकिन स्वार्थ सिद्धि के लिए कुछ भी गलत नहीं है


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