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हम कैसे कह सकते हैं निर्मल बाबा ढोंगी हैं ?

Posted On: 18 Apr, 2012 में

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यदि आप किसी के वाक् जाल में फंसते हैं तो इसमें उस व्यक्ति का दोष क्या जो अपना हित साधने के लिए आपकी तरफ चारा फेंक रहा हैं. दोष तो उसका मानना चाहिए जो ऐसे छ्द्म जाल में फंसता है. इस पर भी यदि हमारी नजर में ठगे गए लोग स्वयं यह कहें कि वे ठगे नहीं गए हैं तो फिर हम किस पर ठगी करने का आरोप लगा रहे हैं. कुछ ऐसा ही मामला निर्मल जीत सिंह यानि निर्मल बाबा का भी है जिन पर आरोप तो ढेर सारे लगाए जा रहे हैं किंतु सही मायने में उन पर किसी भी आरोप की पुष्टि नहीं की जा सकती है. बाबा और उनके भक्तों के बीच जो घटित हो रहा है उससे आखिर हमें इतना ऐतराज क्यों?


nirmal babaटी.वी. खोलते ही हमें कितने ही ऐसे संत-महात्मा नजर आ जाते हैं जो खुले आम अपनी तथाकथित दैवीय शक्तियों का बखान कर रहे होते हैं. उनका तो यह साफ कहना है कि उनकी शरण में आकर किसी भी व्यक्ति की सभी समस्याएं और परेशानियां छू-मंतर हो सकती हैं. पहले भले ही आम जनमानस का इनके प्रति रुझान कम होता था लेकिन मीडिया और आधुनिक संचार माध्यमों ने ऐसे बाबाओं की लोकप्रियता पर चार चांद लगा दिया है. लेकिन आजकल जिस बाबा को मीडिया निशाना बनाकर सबसे ज्यादा प्रचारित कर रहा है वह है निर्मलजीत सिंह नरुला उर्फ निर्मल बाबा.


निर्मल बाबा, समागम के नाम पर निर्मल दरबार लगाकर आम जनता की परेशानियों का हल निकालने की कोशिश करते हैं. वैसे अगर हम यह कहें कि लगभग-लगभग हल निकाल ही देते हैं तो यह भी गलत नहीं होगा. यही वजह है कि आज निर्मल बाबा ने पिछले सभी प्रसिद्ध बाबाओं को पूरी तरह फ्लॉप कर दिया है. रोज टी.वी. पर विशेषकर न्यूज चैनलों पर थर्ड आई ऑफ निर्मल बाबा नामक कार्यक्रम का प्रसारण किया जाता है, जिसमें निर्मल बाबा दुखियारी जनता की समस्याओं को हल करते नजर आते हैं. भले ही वह समस्याएं समोसा और गोलगप्पे खाने से ही क्यों ना हल होती हों लेकिन अंत में हमें तो सिर्फ आम खाने से मतलब होना चाहिए.


खैर, इसमें कोई दो राय नहीं है कि निर्मल बाबा की लोकप्रियता का सारा श्रेय सिर्फ और सिर्फ मीडिया को ही जाता है. पहले निर्मल बाबा के चमत्कारों को इतना बढ़ा-चढ़ा कर पेश किया गया लेकिन अब वह पता नहीं क्यों इनके चमत्कारों की बखिया उधेड़ने पर लगी हुई है !!


पिछले कुछ समय में निर्मल बाबा के ऊपर ना जाने कितने ही आरोप दर्ज किए जा चुके हैं. कोई कहता है वह ढोंगी हैं, कोई उन्हें ठग कहता है तो कोई उन्हें लोभी और लालची व्यक्ति की संज्ञा देता है. लेकिन हम उन लोगों को क्या कहेंगे जिन्हें निर्मल बाबा के नुस्खों का भरपूर फायदा मिला है, जो उन्हें भगवान से कम नहीं पूजते.


हो सकता है आप लोग उन्हें अनपढ़ और बेवकूफ लोग समझते हों, लेकिन शायद कोई व्यक्ति ऐसा नहीं हो सकता जो इतना बेवकूफ हो कि उसे अपने परिमार्जित होते हालात नजर ना आएं. अगर निर्मल बाबा के पास किसी भी तरह की कोई शक्ति है तो वह सिर्फ वही व्यक्ति समझ सकता है जिस पर उनकी कृपा बरसी है, आप या मैं नहीं जिन्होंने कभी निर्मल बाबा पर विश्वास तो नहीं किया लेकिन उन पर हमेशा आरोप ही लगाए हैं. हो सकता है कि बाबा की जिस नकारात्मक छवि को आजकल प्रचारित किया जा रहा है वह सही हो लेकिन बिना किसी साक्ष्य के हम इसे स्वीकार तो नहीं कर सकते.


nirmalवैसे तो यह बात भी सच है कि अगर निर्मल बाबा एक ठग और ढोंगी हैं, तो उनसे भी कई बड़े ठग गेरुए वस्त्र पहनकर जनता की भावनाओं और उनके पैसे के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं. उन्हें अपने अनुयायियों का समर्थन इस कदर मिला हुआ है कि उन पर किसी भी प्रकार का आरोप लगाना किसी के बस की बात नहीं.


अगर निर्मल बाबा ढोंगी हैं तो उन्होंने कभी किसी को जबरदस्ती अपने समागम में कभी नहीं बुलाया, लोग स्वयं वहां गए. अगर कोई व्यक्ति खुद यह चाहता है कि उसके साथ धोखेबाजी हो तो इसमें क्या उस व्यक्ति की गलती है जो उनके साथ खिलवाड़ कर रहा है. लेकिन अगर निर्मल बाबा के चमत्कारों में थोड़ी भी सच्चाई है और अपने भक्तों पर कृपा बरसाने के लिए वह उनसे दस प्रतिशत की मांग कर भी लेते हैं तो इसमें बुराई क्या है?


निर्मल बाबा अपने चमत्कार दिखा कर धन बटोर रहे हैं वहीं न्यूज चैनल, भले ही नकारात्मक रूप से, उन्हें दिन रात प्रचारित कर अपनी टीआरपी बढ़ा रहे हैं. किंतु इन सबके बीच ये सवाल हमेशा बना रहेगा कि आखिर बाबा और उनके भक्तों के बीच के संबंधों पर अपनी नाइत्तेफाकी दर्शा करके हम कैसे सच को उद्घाटित कर सकेंगे?




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74 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Sunny Kumar के द्वारा
May 30, 2012

“दुनिया के बोझ से आदमी डरता है जिसके लिए वो हर एक उपाए करता है यहाँ तो अपने को अपने आप से लुटते देखा है लेकिन फिर भी इंसान वही काम करता है” इंसान गलती वहीं करता है जब वो अपनी गलतियों से भी नहीं सीखता .. आज एक बाबा गया है कल एक और आएगा…

chaatak के द्वारा
May 4, 2012

तमन्ना जी, इस पोस्ट में भी आपने मुद्दे को बड़े सटीक ढंग से उठाया है| दाग तो लगे हैं चेहरे पर और लोग आईना साफ़ करने में लगे हैं| निर्मल बाबा न तो सही हैं और न गलत| सही इसलिए नहीं क्योंकि वे अनाप-शनाप बात करते हैं और गलत इसलिए नहीं क्योंकि उन्होंने किसी के साथ ना तो जबरदस्ती की है और ना ही कोई क़ानून तोडा है| सारा किया धरा है मीडिया का जिसे निर्मल बाबा ने जब फायदे का परसेंटेज देने से इनकार किया होगा तो नहा धो कर पड़ गए पीछे| एक और अच्छी पोस्ट पर हार्दिक बधाई!

follyofawiseman के द्वारा
April 28, 2012

I request and invite you to read my post ‘नालायक माँ का नालायक बेटा’, plz do leave your comment/feedback.

hari के द्वारा
April 22, 2012

bhartiya media jo khe galat hai wo sab nishchit roop se sahi hoga i hate indian media like news express, aaj tak star tv etc.

Neeraj Kumar के द्वारा
April 21, 2012

the main cause for blaming nirmal baba is that he has a lot of money . but that money is green not black . people deposit daswand in his account because of their faith . babaji don’t say to deposit money . this way nirmal baba has right to use that money anywhere either buying a flat or else . no one has right to ask nirmal baba for his money . that money is green . people blaming him should go to others politicians , baba etc and see their black money . nirmal baba’s money is green not black . it is come in right way in his account .

Neeraj Kumar के द्वारा
April 21, 2012

Nirmal Baba is a true person . if anyone do not want to believe him so kindly do not blame him also . in today’s life if goddess durga or any other god will come the peoples of our society wants truth from them are they god ? they want proof . i want to tell that god never give any proof to assure him .

Rajesh Dubey के द्वारा
April 20, 2012

मिडिया ने जम कर बाबा का प्रचार किया और पैसा वसूला. जनता के रूपये सभी चैनलों ने बाटें और आज निर्मल बाबा अकेले शिकायत और मिडिया तथा जनता के कोपभाजन बने हुए है.

    Tamanna के द्वारा
    April 20, 2012

    राजेश जी… अब बाबा दोषी है भी या नहीं हम तो यह भी नहीं जानते इसीलिए किसी के भी पक्षया विपक्ष में बात करने का फायदा भी तो नहीं है.

rekhafbd के द्वारा
April 19, 2012

तम्मना जी ,हर इंसान की जिंदगी में सुख दुःख साथ साथ चलते है ,यह सत्य है की निर्मल बाबा की मीडिया ने उनकी लोकप्रियता को बढाया है ,लेकिन लोगों की भावनाओ से खेलना ठीक नहीं है ,एक दुखी और परेशान व्यक्ति को अपने शब्दों के जाल में फसा कर उनको झूठा आश्वासन देना भी ठीक नहीं है |सिर्फ निर्मल बाबा ही नहीं ,हमारे देश में ऐसे अनेको बाबे मिल जाए गे जो भोले भाले परेशान लोगो की भावनाओ से खेल कर अपना उल्लू सीधा करते है |वैसे यह एक अच्छा विषय है और हमारा फ़र्ज़ है कि हम लोगो को जागरूक करें

    Tamanna के द्वारा
    April 20, 2012

    रेखा जी… आपका कहना सही है कि हमारा फर्ज है दूसरों को जागरुक करना लेकिन आप यह भी तो सोचिए कि कब तक हम व्यक्ति को जागरुक करने की कोशिश करते रहेंगे… जो व्यक्ति हमेशा और हर बार धोखा खाने की ही फिराक में रहते हैं उन्हें हम चाह कर भी कुछ नहीं समझा सकतें. मुझे लगता है मीडिया जो कभी बाबा को अच्छा तो कभी बुरा बना रहा है उसे भी समझ जाना चाहिए कि ऐसा करना किसी के लिए भी हितकारी नहीं होगा.

yogi sarswat के द्वारा
April 19, 2012

आदरणीय तमन्ना जी , नमस्कार ! ये हमारे मुल्क की किस्मत है या बदकिस्मती , मैं नहीं जानता लेकिन जब जब बाबाओं की बात चलती है तब तब हम इन लोगों को जी भर भर के गालियाँ देते हैं और फिर हम भी ऐसे ही किसी और बाबा के चेले हो जाते हैं ! समय है चलता रहता है चलता रहेगा ! हम में से ज्यादातर लोग किसी न किसी बाबा को मानते हैं , आप लोगों के घरों में लगे मंदिर देखें तो पाएंगे की भगवान् की तस्वीर के साथ इनकी तस्वीर भी लगी रहती है ! मैं सिर्फ इतना कहना चाहता हूँ की भारत के लोगों की मानसिकता कुछ इस तरह की है की बाबाओं से अलग नहीं रहा जा सकता ! हर व्यक्ति के जीवन में ऐसे दुःख और मुश्किल आती हैं जब वो एक चलता फिरता भगवान् ढूँढने लगता है , और उसे भगवन के रूप में यही बाबा नज़र आते हैं ! उस समय अगर उसकी मुश्किल संयोगवस ही सही लेकिन हर हल हो जाती है तो उसका बाबा पर विश्वास और गहरा हो जाता है ! अब ये व्यक्ति विशेष के ऊपर निर्भर करता है की वो किसे सच माने और किसे झूठ ! ओह ! इस पर तो मैं भी लेख लिख देता ! हहहाआआआआआ

    Tamanna के द्वारा
    April 20, 2012

    योगी जी.. बिल्कुल आप भी इस मसले पर अच्छा लिख सकते हैं.. मुझे आपके लेख का इंतजार रहेगा….वैसे आपक कहना भी सही है अनजाने में ही सही जिसपर बाबा की कृपा बरस जाएगी वह तो बाबा को दसप्रतिशत का आधा भी दे देगा..हाहाहा

Kalia के द्वारा
April 19, 2012

अगर निर्मलबाबा ढोंगी हैं, तो इस ढोंग को हाईलाइट करने के इतने दिनों बाद ही मीडिया के एक धड़े तथा कुछ चप्पलघसीटू टाइप के पत्रकारों को यह बात क्यों समझ में आ पाई ? मतलब साफ़ है, कि अपनी ऐँठती अँतड़ियों के बीच जबतक दूसरे की कमाई देख पाना हजम होता रहा, तबतक तो बर्दाश्त किया, लेकिन जब अपच हो गया, तो दोनों तरफ़ से उलटने की क़वायद शुरू हो गई । बहुत मुश्किल है निर्मलबाबा की बातों को समझ पाना । जब खुद निर्मलबाबा ही सारा विश्लेषण कर पाने के लिये सही शब्द नहीं निकाल पाते, तो कोई और क्या निकाल पाएगा । दरअसल अंधविश्वास का ही एक पहलू यह भी है, कि जिस चीज़ को समझ नहीं पाए, उसपर विश्वास ही मत करो । जब उस तथ्य से ही अंधे हो, तो विश्वास भी मत करो, पीछा छुड़ाने का सबसे आसान तरीक़ा यही है । जो लोग बुराइयाँ छोड़ मंदिरों की ओर भाग रहे हैं, वे अंधविश्वासी और जाहिल हैं । सबसे बड़े सुशिक्षित और क़ाबिल ये चप्पलघसीटू ही बन गए हैं । निर्मलबाबा के यहाँ आज तक के सबसे ज़ोरदार शब्दों में भूत-प्रेत, तंत्र-मंत्र, गंडे-तावीज़, जादूटोना और चमत्कारों के खिलाफ़ आवाज़ उठाई जाती है, और ये अक्ल के अंधे बार-बार यही मनगढ़न्त आरोप मढ़ रहे हैं । अगर इनमें हिम्मत है, तो साईं बाबा के भभूत को भी ज़रा टोटका क़रार देकर देख लें । जो आदमी बहू को मुँह दिखाई तक मुट्ठी बाँध कर देना चाहता है, वह अगर बिना किसी फ़ायदे के निर्मलबाबा को चढ़ावा चढ़ा रहा है, तब तो मानना ही होगा कि सारे श्रद्धालु पागल हो गए हैं । लेकिन ऐसा होता नहीं है । पैसे आने के बाद ही लोग भेज रहे हैं, कारण चाहे जो हो । हो सकता है कि स्वभाव का कपट किसी के रास्ते का काँटा रहा हो, जिसे बदल देने से उसकी उत्पादकता और उपार्जन के प्रति एकाग्रता बढ़ जाती हो । आज तक किसी और बाबा के प्रति श्रद्धा पूरे जनमानस को ईश्वरीय शक्तियों और मन्दिरों की ओर उन्मुख नहीं कर पाई । निर्मलबाबा को खुद न तो किसी मंत्र की जानकारी है, न ही वह अपनी बातों को किसी प्रखर वक्ता के अंदाज़ में समझा पाते हैं । लेकिन जो कुछ भी है, वह आमजन की समझ में भली भाँति आ जाता है । सत्ता और समाज के सताए व्यक्ति को उसके फ़ायदे की बात उसकी ज्ञात भाषा में समझाने वाला कोई मिल जाय, और उसे लाभ भी प्राप्त हो, तो फ़िर समझाने वाले के पीछे चल पड़ना आदमी का स्वभाव है । हो सकता है कि निर्मलबाबा को आज उनकी शक्तियाँ ही किसी अतिक्रमण की सज़ा दे रही हों, लेकिन कुछ तो है उनके पास, जो काफ़ी कुछ लोगों के अंदर झाँक कर देख पाने में सक्षम है । अब वो साक्षात भगवान तो कतई नहीं हैं ।

    Tamanna के द्वारा
    April 20, 2012

    कालिया जी… साक्षाता भगवान तो खैर कोई नहीं हो सकता. निर्मल बाबा के पास क्या शक्तियां है और क्या नहीं यह मैं भी नहीं बता सकती. इसीलिए मैं उनपर ना तो किसी भी प्रकार का आरोप लगाने में सक्षम हूं और ना ही उनपर विश्वास ही कर पा रही हूं.

    Kalia के द्वारा
    April 23, 2012

    चलिए आप कम से कम तटस्थ तो हैं ! विरोध में आग उगलतीं तो पता नहीं क्या हो जाता . आपकी नई तस्वीर बहुत खूबसूरत है. खुशनुमा !

prateekraj के द्वारा
April 19, 2012

तमन्ना जी, माफ़ कीजिये पर यहाँ मैं आपसे सहमत नहीं हूँ.मेरा मानना है की गलती दोनों की है पर गुमराह होने वाले को अगर सजा दी जाये तो ये गलत होगा.सजा उसे मिलनी चाहिए जो ऐसे गुमराह हुए लोगों का फायदा उठा रहा हो.और साथ ही साथ लोगों को इससे सबक सीखना चाहिए और अन्धविश्वाश से बचना चाहिए. अगर आपके अनुसार निर्मल बाबा जैसे लोगों को दोषी न माना जाये तो फिर तो चोरी करने वाला चोर कहेगा कि अपने घर कि सुरक्षा मुस्तैद करो मेरी क्या गलती है. बच्चों को किडनैप करने वाला किडनैपर कहेगा कि हर बच्चे के साथ गार्ड रखो मेरी क्या गलती है.माँ-बाप कि गलती है. धन्यवाद

    Tamanna के द्वारा
    April 19, 2012

    किसी को शारीरिक रूप से नुकसान पहुंचाना और मानसिक रूप से सम्मोहित करने में बहुत अंतर होता है प्रतीक जी…. अगर कोई व्यक्ति किसी की भावनाओं पर चोट कर रहा है तो मुझे लगता है गलती उस व्यक्ति की है जो उसे खुद पर चोट करने का मौका देता है. ,,,,

    prateekraj के द्वारा
    April 20, 2012

    तमन्ना जी, नुकसान शारीरिक हो या मानसिक वो अंततः नुकसान ही होता है हमें इसमें फर्क नहीं करना चाहिए.और मैं फिर दोहराना चाहूँगा की अगर कोई व्यक्ति नासमझ है तो हमें उसकी नासमझी या नादानी का फायदा नहीं उठाना चाहिए.इसमें गलती फायदा उठाने वाले की ही होनी चाहिए. रही बात मानसिक नुकसान की तो अभी कुछ दिन पहले मंच पर रश्मि जी ने एक समस्या पोस्ट की थी जिसमे उनकी मित्र को उनके प्रेमी ने धोखा दे दिया था.वहां भी और यहाँ भी गलती दोनों की ही है पर जिसने गलत फायदा उठाया किसी की नादानी का, सजा का हक़दार वही होना चाहिए. आपकी प्रतिक्रिया का इंतज़ार रहेगा. धन्यवाद.

    Tamanna के द्वारा
    April 20, 2012

    प्रतीक जी… यह व्यक्ति के अपने मस्तिष्क और मानसिकता पर निर्भर करता है कि उसे क्या करना चाहिए और क्या नहीं.. हम किसी को अपने अनुसार चलने के लिए बाध्य नहीं कर सकतें. हम सिर्फ खुद को मजबूत कर सकते हैं ताकि फिर कोई आकर हमें धोखा ना दे सके. लेकिन हम यह भी तो नहीं करतें.. जिसने धोखा देना है या पाखंडकरना वह लाख समझाने के बाद भी वैसा ही करेगा..

    prateekraj के द्वारा
    April 21, 2012

    तमन्ना जी, यहाँ समझाना उसे नहीं है जो धोखा दे रहा है, उसके लिए तो कानून है, बल्कि समझाना उसे है जिसे धोखा दिया जा रहा है. और आपने सही कहा की हम सीखना ही नहीं चाहते है अपनी गलतियों से और इसलिए शायद ये कोशिश चलती ही रहेगी.

April 19, 2012

तमन्‍ना जी, बहस का एक मात्र सूत्र होता है- समाधान न बन पाएं तो समस्‍या नहीं बनें- मेरा मानना है आप के लेख से समाधान नहीं निकला। जहां तक लोगों पर दोषारोपण की बात है तो पहले यह जान लेना ही चाहिए कि अपने देश की साक्षरता दर क्‍या है। यह देश धर्म प्रधान रहा, बाद के दिनों में कषि प्रधान हो गया, अब अर्थ प्रधान हो गया है। इतनी तेजी से किसी भी देश्‍ा के विकास का आधार बदलेगा तो कुछ जरूर छूट जाएगा, यहां भी कुछ ऐसे लोग छूट गए जो धर्म से कषि में, कर्षि से अर्थ में अपने को नहीं बदल पाए। कुछ पूरी तरह बदल गए। निर्मल बाबा आस्‍था यानी धर्म की बात करते हैं, लेकिन वे अर्थ प्रधान भारत के नागरिक हैं। उनके अनुवायी अर्थ के अपेक्षा में वहां जाते है यानी नौकरी आदि, लेकिन वे आज भी धर्म प्रधान भारक के सहयात्री हैं। ऐसे में अर्थ की गाडी छोडने के लिए ये जिम्‍मेदार हो सकते हैं, लेकिन गाडी पर लिखे अर्थ यात्रा एक्‍सप्रेस की पट़टी नहीं पढ पाने के लिए जिम्‍मेदार नहीं हैं, क्‍योंकि हम लोकतंत्र में हैं और लोकतंत्र का सबसे बडा कर्म न पढ पाने वालों को भी पटटी पढने योग्‍य बनाना है। यह काम सरकार नहीं कर पा रही है तो हम और आप भी नहीं कर पा रहे हैं। निर्मल बाबा को मैं दोषी मानता हूं, इसलिए नहीं की उन्‍होंने ठगा, इसलिए कि इतनी बडी चम्‍त्‍कारी शक्ति का उपयोग उन्‍होंने शिक्षा के बडे संस्‍थानों में नहीं किया, संसद में नहीं किया, देश के विकास के लिए नहीं किया, परमाणु क्षेत्र में नहीं किया, जल समस्‍या को दूर करने में नहीं किया, आतंकवाद से निपटने में नहीं किया, भूखों के घर रोटी पहुंचाने में नहीं किया। इस देश ने उन्‍हें इस लायक बनाया कि वह चमत्‍कार का प्रचार कर सके तो उनका धर्म बनता है कि वे अपने चमत्‍कार का कुछ अंश देश की बडी समस्‍याओं के समाधान को भी देते। इसलिए वह दोषी है और जो लोग उनकी बात मानते हैं वे इसलिए दोषी नहीं है कि हमने उन्‍हें धर्म प्रधान भारत में छोडे रखा, अर्थ प्रधान भारत की गाडी मैं बैठे तो उन्‍हें साथ नहीं बैठाया। बाप बेटा को छोड दे तो आप क्‍या कहेंगी।

    Tamanna के द्वारा
    April 19, 2012

    ज्ञानेंद्र जी…विश्वास और अविश्वास जैसी चीजों का समाधान निकाल पाना वाकई बहुत मुश्किल है. आज के हालातों को देखें तो धर्म और अर्थ आपस में बहुत जुड़े हुए हैं. धर्म का स्पष्ट तौर पर धन कमाने का जरीया है. बाबा के चमत्कारों में कितनी सच्चाई है यह मैं बता ही नहीं सकती, क्योंकि यह उनका और उनके भक्तों के बीच की बात है. ना ही मैं उन्हें ठग कह सकती हूं, क्योंकि मैंने उनकी ठगी अनुभव नहीं की… पहले मीडिया ने बाबा को आसमान पर बैठा दिया आज उन्हें गिराने पर तुल गया है… बाबा के पास कोई अशिक्षित या निर्धन लोग नहीं जा रहें, वहां दान देने वाले वे लोग है जिनकी मासिक आय दस लाख से भी ऊपर है, तभी तो दस प्रतिशत के हिसाब से बाबा को चंदा दिया जाता है. शिक्षा, अर्थ का भावनाओं से कोई वास्ता नहीं है, वह तो किसी के भी पास हो सकती है.. अगर बाबा के चमत्कारों को उनके भक्त सच कह रहे हैं और अपनी खुशी से उन्हेंदान दे रहे हैं तो इसमें आपको या मुझे क्या आपति होनी चाहिए…. अगर बाबा अपनी शक्तियों को बिजनेस के रूप में प्रयोग कर रहे हैं तो इस बिजनेस का फायदा भी उन्हें और उनके भक्तों को मिल रहा है.

    April 19, 2012

    तमन्‍ना जी, पहली बात तो यह कि मैं धर्म को अर्थ कमाने का जरिया नहीं मानता, आज भी ऐसे संत और महात्‍मा है तो धर्म से अर्थ लेते भी हैं तो मानव जीवन को सुखमय बनाने और गरीबी को दूर करने के लिए। बच्‍चों, गरीबों, कुष्‍ठ रोगियों व विकलागों के लिए ऐसी संस्‍थाएं हैं, दूसरी तरफ बहुत से ऐसे संत है जो भगवा धारण कर सियासत में हैं, वे भी लोकतंत्र को मजबूत करने का काम कर रहे हैं। ऐसा कुछ भी नहीं करते दिखते निर्मल बाबा, दूसरी बात आप यह भूल रही हैं कि उनके खिलाफ मुकदमा भी उनके भक्‍तों ने ही दर्ज करया है, साथ ही उनके भक्‍तों में कुछ ऐसे हैं जो उनके वेतन भोगी भक्‍त हैं। और एक बात और जो आप ने कहा है कि निर्मल की न तो आप भक्‍त रही हैं और न ही उनके चमत्‍कार के बारे में जानती हैं, इसलिए सब कुछ कहने के बाद भी आप उन्‍हें न तो ठग कह सकती है और न ही महात्‍मा, इससे काम नहीं चलने वाला, क्‍योंकि इतिहास कोई जीता नही है, लेकिन उसकी समीक्षा तो की ही जाती है, कोई अच्‍छा कहता है और कोई बुरा। आप ही की तरह मीडिया भी एक बात कह सकती है, मेरा काम है तथ्‍य को सामने रखना, फैसला तो पाठक, स्रोता को करना है, निर्मल का पहला रूप भी रखा और दूसरा आया तो उसे भी रखा। मीडिया भी आप ही की तरह कह रहा है कि मैं निर्मल बाबा का भक्‍त नहीं था, जो देखा, सुना सो बताया। आप के लेख और मीडिया के व्‍यवहार एक जैसे लगते हैं।

    Tamanna के द्वारा
    April 20, 2012

    ज्ञानेंद्र जी… मैंने यह बिल्कुल नहीं कहा कि सभी महात्मा धर्म को अर्थ से जोड-अते हैं, मैंने स्पष्ट रूप से यह कहा है कि अगर धर्म के नाम पर पैसा कमाया जा रहा है तो यह कोई हैरानी का विषय नहीं होना चाहिए. विशेषकर आज के हालातों के अनुसार तो यह एक अच्छा व्यवसाय है. मैं बाबा को ठग या चमत्कारी इसीलिए नहीं कह सकती क्योंकि अभी तक मैंने व्यक्तिगततौर पर कभी उनका पाखंड या चमत्कार देखा नहीं है. और शायद कोई भी पुख्ता तौर पर उन्हें पाखंडी या चमत्कारी नहीं कह सकतें. बिना किसी को जाने किसी भी व्यक्ति के बारे में धारणा बना लेना पूरी तरह गलत है. मीडिया के ऊपर जागरुक करने और अंधविश्वास ना फैलाने का दायित्व है, पर मुझे ऐसी कोई जिम्मेदारी नहीं सौंपी गई. इसीलिए मुझे लगता है मीडिया को पहले साक्ष्य तलाशने चाहिए और फिर उन्हें प्रचारित करना चाहिए.

चन्दन राय के द्वारा
April 19, 2012

तम्मना जी , पर क्या हम ऐसे PAKHANDION के मकडजाल में और लोगो को फसने दे , क्या हमारा दायित्व नहीं की इनका पर्दाफाश हो , जो दान पर अपना हक बताये वो सबसे बड़ा ढोंगी है

    Tamanna के द्वारा
    April 19, 2012

    चंदन जी…. दायित्व तो हमारा तब भी था जब मीडिया रोजाना प्रात: थर्ड आई ऑफ निर्मल बाबा को प्रचारित कर रहा था. लेकिन उस समय किसी ने अंगुली नहीं उठाई… आप खुद ही सोचिए बिना किसी को जाने उसके कृत्यों की सच्चाई तक पहुंचे बिना हम कैसे किसी को ठग या चमत्कारी कह सकते हैं. उनके चमत्कारों को केवल वहीं समझ सकता है जो इसका साक्षी है और ठग को भी वहीं जान सकता है जो ठगा गया है.  समाचार चैनलों के माध्यम से हम किसी निष्कर्ष तक नहीं पहुंच सकतें.

yamunapathak के द्वारा
April 19, 2012

ये है विचारों की पैनी धार पर घटनाओं का आकलन

    Tamanna के द्वारा
    April 19, 2012

    यमुना जी… आपका बहुत बहुत आभार

sanjay kumar के द्वारा
April 19, 2012

adarnia namanna ji may ek bhudhiman man hu assa samajta hu. or baba ki bahut kirpa muj jase nachij par bhi hui hai. baba tho free mai tv par{bhale hi unka paisa lag raha hai} logo ko achi achi bate batla rahe hai. apka kam banta hai tho do v bhi apki marji assai babaji ki koi galti nahi . pale bhi babao ko raja ka sarakchan mila rahta tha .or abhi bhi paisa ke bina kisi ka kam chalta nahi or dachina to jarure hai baki ap bhi budhiman hai

    Tamanna के द्वारा
    April 19, 2012

    संजय जी.. मैंने यहां किसी भी बाबा का ना तो पक्ष लिया है और ना ही उन्हें क्लीन चिट दी है. मैं कैसे किसी ऐसे व्यक्ति के बारे में अपनी राय बना सकती हूं जिससे मेरा कभी कोई व्यक्तिगत साक्षात्कार नहीं हुआ.. मीडिया ने कहा बाबा चमत्कारी है तो चमत्कारी, मीडिया ने कहा बाबा ढोंगी तो ढॉंगी.. यह बात मुझे तो समझ में नहीं आई.

dineshaastik के द्वारा
April 19, 2012

आदरणीय तमन्ना जी आदरणीय राजकमल जी के व्यंगवाणों से बच कर रहें, इनके तारीफ  में कहे गये, शब्द समाज  को झझकोर  कर रख  देती हैं। मैं तो इनके व्यंगवाणों का दीवाना हूँ। तमन्ना जी अपराध  तो अपराध है चाहे किसी की सहमति से किया जाय या उसे बेवकूफ  बनाकर….

    Tamanna के द्वारा
    April 19, 2012

    दिनेश जी … यहां हमें यह भी समझना होगा कि आखिर अपराध किया किसने है. जनता का बाबा पर विश्वास करना अपराध है या फिर बाबा का जनता को मूर्ख बनाना एक अपराध है.

rajkamal के द्वारा
April 18, 2012

आदरणीय तमन्ना जी ….. सादर अभिवादन !अगर मैं इस विषय के ऊपर कुछ लिखता तो ज्यादातर उसमे आपकी बाते ही शामिल होती ….. यह भी सच है कि किसी से जबरदस्ती पैसे जमा नहीं करवाए जा रहे ….. हाँ दूसरे प्रतिद्विन्धियो और उनके शिष्यों को बाबा जी कि दौलत हजम नहीं हो रही ….. अरे भाई आपको किसने रोका है , आप भी जनता को मुरख बना लो , जनता तो हरदम तैयार रहती ही है ….. :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :|

    Tamanna के द्वारा
    April 19, 2012

    राजकमल जी… सही कह रहे है…. मीडिया को लगा कि बाबा की तारीफ करने से जितनी टीआरपी मिल रही है उससे ज्यादा तो उनका विरोध करने में मिल जाएगी तो विरोध हो गया. साधुओं को इतने पैसे नहीं मिले तो उन्होंने भी निर्मलजीत नरुला का विरोध शुरू कर दिया. अजीब हालात है हमारे देश के भी…

ANAND PRAVIN के द्वारा
April 18, 2012

तमन्ना जी, नमस्कार आज हर इन्शान इसी चक्कर में लगा है की कोई एक ऐसी शक्ति आये जो उससे कुछ ऐसा विद्या बतला दे जिसके बाद बिना कुछ किये अपने आप उसके सारे पाप धुल गाये और वो रातो रात आमिर और सुखी सम्प्पन हो जाए …………..बाबा लोग तो बस उनको वो सपना दिखा रहें है…………..जो जाग चुका है वो सच्चाई समझ रहा है और जो अबभी सोना चाहता है उसे कौन जगा सकता है……………बहोत ही संतुलित लेख आपका

    Tamanna के द्वारा
    April 19, 2012

    आनंद जी… आपका कहना बिल्कुल सही है. जो व्यक्ति अभी भी सोने के मूड में है उसे कौन जगा सकता है. पता नहीं हम कब तक ऐसे लोगों पर विश्वास करते रहेंगे और फिर धोखा खाते रहेंगे, लेकिन यह बात भी सच है कि हमारी नींद फिर भी नहीं टूटेगी.

April 18, 2012

आदरणीया तमन्ना जी’ यद्यपि मई इस पथ का नया राही हूँ. किन्तु आप ने बहुत ही सटीक निशाना साधा है. पूर्वाग्रह से ग्रसित लोगो को आप का कथन किसी गरिष्ठ भोजन की तरह नहीं पचेगा. क्योकि सच्चाई बहुत ही कड़वी होती है. यही सच्चाई मैंने पंडित आर. के राय के आर्टिकिल “समाज सुधार का कुचक्र एवं ज़हर” में पढ़ा हूँ. यद्यपि यह लेख अति उत्कृष्ट भाषा में लिखा गया है. किन्तु इस सच्चाई का जो आप ने और राय गुरूजी ने लिखा है उसका जबाब तार्किक रूप में कोई नहीं दे सकता है. मई और कुछ कहने की हिम्मत अभी नहीं कर सकता. पाठक

    Tamanna के द्वारा
    April 19, 2012

    प्रकाश चंद्रजी… किसी भी व्यक्ति या हालातों के प्रति पूर्वाग्रह रखना हमारी अपनी ही नासमझी होगी. लेकिन यह बात भी सच है कि किसी पर भी विश्वास करने या उसपर अंगुली उठाने से पहले हमें एक बरा सभी पहलूओं पर ध्यान अवश्य दे देना चाहिए.

akraktale के द्वारा
April 18, 2012

तमन्ना जी सादर नमस्कार, बिलकुल सही कहा है आपने जब तक साक्ष्य ना हो किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता. इसीलिए जब कोई महिला थाने में बदनीयती की शिकायत दर्ज कराने जाती है तो पुलिस शिकायत नहीं लिखती. क्योंकि पुलिस को भी सबूत की ही आवश्यकता होती है. लोग यदि गुमराह हो रहे हैं तो उन्हें चेताना भी टीवी और समाचार पत्रों का काम है. सच्चाई जो भी हो सामने लाना भी अब इन्ही का फर्ज है. अब निर्मल बाबा की क्या बातें करें. दिल्ली में एक बाबा जी नीली पगड़ी बांधकर पिछले कुछ वर्षों से पुरे देश को ही ठग रहा है मगर कोई कुछ नहीं कर पा रहा है. इस देश की यही नियति है तो कोई क्या करे.

    Tamanna के द्वारा
    April 19, 2012

    रक्तले जी…. मीडिया का काम केवल टीआरपी बटोरना रह गया है इसीलिए हमें केवल अपनी सूझबूझ से काम लेना होगा. जब तक साक्ष्य ना हो तब तक किसी पर विश्वास करना और फिर बिना किसी प्रमाण के उन्हें ढोंगी ठहराना हमारी ही नासमझी होगी.

vasudev tripathi के द्वारा
April 18, 2012

तमन्ना जी, मीडिया में जितने भी कार्यक्रम आ रहे हैं वे पेड कार्यक्रम का हिस्सा हैं, ये बात कोर्ट में निर्मल के वकील ने स्पष्ट की है और जो मीडिया खिंचाई कर रहा है वो उसका अपना काम ही है..!! हमारे देश का मीडिया तो है ही ऐसा इसमें किसी को क्या शक..!!! लेकिन आपकी ये बात मुझे समझ नहीं आ रही है कि दोषी वे लोग हैं जो ठगे जा रहे हैं निर्मल नहीं…. अगर ऐसा है तो थानेदार से लेकर नेता तक सभी निर्दोष हैं दोषी तो जनता है जो मूर्ख बन रही है..!!! वाकी क़ानून की नजर में दोषी है या नहीं ये अदालत का फैसला बतायेगा.. निर्मल के नाम पर किसी भी भगवा पहनने वाले को गाली देने का भी क्या मतलब.. यदि वो लूट रहे हैं तो उनके खिलाफ भी केस दर्ज कराइए जैसे लोगों ने निर्मल के खिलाफ दर्ज कराये हैं… कुछ तो ऐसे भी हैं जिन्हें कुछ कॉन्वेंट स्टाइल वाले लोग सिखाये गए पाठो के कारण लुटेरा कहते हैं किन्तु बस मुंह से ही… हकीकत में सरकार तक पीछे पड़ी है किन्तु एक मुकदमा तक नहीं.!! अपनी सोच के कारण भगवा की व्यर्थ मानहानि करने से फायदा?? क्या आपको पता है कि आपका तर्क किसी भी देश के क़ानून को उलट देगा..?? विश्वास करना मनुष्य का स्वभाव है और जानकारी का आभाव ठगे जाने का कारण!!! आप भी बाजार से शौपिंग माल में खरीदे गए कपड़ों से लेकर मैगी के पैकेट व दवा की गोली तक वेबकूफ बनायीं जाती है और मैं भी..!! हर मनुष्य को सामान ज्ञान व् विवेक नहीं होता.! २०००-२००० जमा करने वाले पचासों निर्मल को गाली देते फिर रहे हैं, मैं बीसों को जनता हूँ इसलिए ये कहना कि जिन्होंने विश्वास किया वो तो कुछ कह नहीं रहे बिना जानकारी के बात कहने जैसा है.!! यद्यपि मैं जानता हूँ कि आप निर्मल का पक्ष नहीं ले रहीं किन्तु जिस तर्क का आप सहारा ले रही हैं वो वैसा ही है जैसे कोई कहे कि ग्लास आधा खाली है तो आधा भरा है… इसलिए अगर पूरा खाली है तो पूरा भरा है….

    Tamanna के द्वारा
    April 19, 2012

    वासुदेव जी… वर्तमान समय में परोपकार और धर्म पूरी तरह से एक व्यवसाय बन चुका है. और व्यवसाय का पहला उद्देश्य और आधार ही यही होता है कि किसी भी तरह दूसरे लोगों को अपने प्रोडक्ट पर विश्वास दिलवा दिया जाए. निर्मल बाबा का प्रोडक्ट है उनकी कृपा. मैं किसी भी रूप में निर्मल बाबा को दोषी नहीं ठहरा पा रही, क्योंकि यह कोई पहला व्यक्ति नहीं है जिसने जनता के तथाकथित उद्धार करने का दावा किया है. मैं तो हमेशा से ही किसी ना किसी बाबा के बारे में सुनती आ रही हूं. हर बार कोई आता है और जनता को बेवकूफ बनाकर चला जाता है. एक सीमा तय होने चाहिए कि हम इतनी बार ठोकर खाने के बाद तो सीख ही जाएंगे, लेकिन ऐसा कुछ नहीं होता. हम हर बार विश्वास करते हैं, हर बार ठोकर खाते हैं.जिस व्यक्ति का काम हे धोखा देना है हम क्यों उसे दोष दें, वह तो सिर्फ अपना काम कर रहा है. गलती तो हमारी ही है. वहीं इन हालातों का दूसरा पहलू यह भी है कि जब तक हम किसी के चमत्कार या ढोंग का व्यक्तिगत अनुभव ना कर लें, तब तक किसी पर अंगुलियां उठाना भी तो सही नहीं है.

vikasmehta के द्वारा
April 18, 2012

तमन्ना जी क्या निर्मल किरपा आप पर भी हुई है कृपया बताये क्या पता मै भी आप जैसे निर्मल समर्थको की गिनती में शामिल हो जाऊ

    Tamanna के द्वारा
    April 19, 2012

    विकास जी निर्मल बाबा की कृपा अगर आप पर भी बरसी है तो निश्चित रूप से आप उनपर विश्वास करें. मैं तो उस बेचारी जनता को दोषी ठरा रही हूं जो बिना सोचे-समझे ऐसे बाबाओं के चक्कर में पड़ जाती है.

ajaydubeydeoria के द्वारा
April 18, 2012

आदरणीया तमन्ना जी, नमस्कार. बात तो आपने पते की कही है. लेकिन कुछ पढ़े-लिखे मूर्खों को क्या कहा जाये….. और कुछ लोगों की तो बेमतलब में हुआं-हुआं करने की आदत होती है. सही-गलत की समझ नहीं है, लगते हैं अपनी विद्वता दिखाने….. बस कोई एक मुद्दा मिल जाना चाहिए. सार्थक आलेख……. आभार……..

    Tamanna के द्वारा
    April 19, 2012

    अजय जी… मैं निर्मल बाबा का पक्ष तो बिलकुल नहीं ले रही हूं क्योंकि मैं भी उन लोगों में से ही हूं जिन्होंने कभी किसी बाबा की दैवीय शक्तियों पर विश्वास नहीं किया,. लेकिन मैं यह कहना चाहती हूं कि यह मसला केवल निर्मल बाबा और उनके भक्तों के बीच का है. मीडिया इसे अपने मतलब के लिए उछाल रही है. टीआरपी के चक्कर में बाबा को आसमान पर बैठा दिया और अब उन्हें जमीन पर ढकेलना चाहती है.

    ajaydubeydeoria के द्वारा
    April 19, 2012

    संभवतः आप मेरी बात नहीं समझ पायीं हैं. मैंने यह नहीं कहा कि आप बाबा का पक्ष ले रहीं हैं. आप की बातों से सहमत हूँ कि यह मसला केवल निर्मल बाबा और उनके भक्तों के बीच का है. कुछ लोग इसे अनावश्यक ही तूल देने पर लगे हैं.

    ajaydubeydeoria के द्वारा
    April 19, 2012

    वैसे मैंने इस पोस्ट की टीआरपी बढ़ने के लिए, फेसबुक पर लिंक शेयर कर दी है. पंडित आदमी हूँ कुछ दान-दक्षिणा कर दीजियेगा. आप भी फेसबुक पर आईये जागरण जंक्शन के बहुत सारे धुरंधर वहां मिलेंगे. साहित्य संगम के नाम से पूरा ग्रुप ही है.

    jlsingh के द्वारा
    April 20, 2012

    श्रीमान अजय दुबे जी, नमस्कार! ऊपर से नीचे तक पढ़ते पढ़ते मेरी नजर यहाँ ठहर गयी और लगा कि यही अपनी मुंडी घुसेड़ दूं! मैं अभी भी देख रहा हूँ कि जो मीडिया दिन भर निर्मल जीत सिंह नरूला की बघिया उघेड़ता रहता है वही शुबह शुबह निर्मल बाबा की शक्तियों का अहसास कराता है. अब कहने सुनने को क्या है. मीडिया के दोनों हाथ में लड्डू है. हाँ निर्मल बाबा को अभी तत्काल आर्थिक लाभ कम होने लगा है. पर अभी भी उनके कार्यक्रमों में भक्तों की भीड़ कम हुई है, ऐसा नहीं लगता! …. दरअसल ये बहुत जल्दी ऊपर पहुँच गए थे इसलिए नीचे भी गिरना ही था. आज के युग में हर ब्यक्ति बहुत ही जल्द बिना कुछ मिहनत किये बड़ा आदमी बन जाना चाहता है. दो हजार चंदा देनेवाला और अपनी आय का दस प्रतिशत जमा करनेवाला गरीब तो नहीं हो सकता!

    ajaydubeydeoria के द्वारा
    April 20, 2012

    आदरणीय सिंह साहब नमस्कार, वास्तव में बाबा का समागम गरीबों के लिए थोड़े ही है. वहां पैसे वाले और पढ़े-लिखे ही जाते हैं. उनकी श्रद्धा है, उनका विश्वास है. वह जब खुद ही लुटने को तैयार हैं तो दूसरों के पेट में ऐंठन क्यों हो रही है……? मिडिया का क्या… मिडिया को भी पैसा और प्रचार चाहिए. वह अपना काम कर रही है. नैतिकता का पाठ पढ़ के आज के युग में ऐशो-आराम तो मिल नहीं सकता तो वह जो कर रही है वह भी सही है. एक तरफ बाबा की फोटो दिखा कर पैसा वसूल रही है दूसरी तरफ उन्हीं को गरिया के. उन्हें तो बस एक मुद्दा चाहिए. कुछ गरमा-गर्म नहीं परोसेंगे तो जयका ख़राब नहीं हो जायेगा……. जनता भी सदा गरमा-गर्म ही चाहती है. इसलिए ही मैंने कहा कि कुछ लोग सियारों जैसे बेमतलब में हुआं-हुआं करने लगते हैं.

    Tamanna के द्वारा
    April 20, 2012

    अजय जी… सबसेप पहले तो मेरी टीआरपी बढ़ाने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद.. हाहाहा. ..मैं भी यही कहना चाह रही हूं कि यह मसला शुद्ध रूप से भक्तों को बाबा के बीच का है.. हम जैसे लोग जिन्होंने कभी उनके चमत्कार या पाखंड को देखा ही नहीं वह कैसे अपनी राय बना सकते हैं…

    Tamanna के द्वारा
    April 20, 2012

    जवाहर जी.. मीडिया के हाथ में तो हमेशा ही लड्डू रहते हैं.. गलत दिखाए तो भी सही दिखाए तो भी, मतलब तो सिर्फ टीआरपी से है. खैर… अगर निर्मल बाबा वाकी दैवीय शक्तियों से लैस है और इससे अगर उनके भक्तों को फायदा मिलता है तो हमें क्या परेशानी हो सकती है. वहीं भक्त अगर अपने फायदे का दस प्रतिशत ही सही बाबा को दे देते हैं.. तो दोनों का लाभ है. लेकिन अगर बाबा उन्हें ठग रहे हैं तो यह तो जनता की नियति के अनुरूप ही है.. कोई कब तक उन्हें संभल कर चलना सिखाता रहेगा.

    ajaydubeydeoria के द्वारा
    April 20, 2012

    हा हा हा तमन्ना जी लेकिन मज़ा नहीं आया….. मैं तो इस उम्मीद में था कि अब तक 70 -80 प्रतिक्रिया तो हो ही गयी होगी. लेकिन अभी तक मात्र 50 प्रतिक्रिया और 14 Likes . सारी मेहनत जाया होती लग रही है.

abodhbaalak के द्वारा
April 18, 2012

तमन्ना जी क्या बात है आप को निर्मल बाबा ने ……….. कृपा कर मज़ाक का बुरा न माने, आपने एक दूसरा पक्ष भी रखा है जिसपर भी लोगो को सोचना चाहिए , अंत में, आपकी नयी तस्वीर के लिए बंधाई :)

    Tamanna के द्वारा
    April 19, 2012

    अबोध बालक जी.. अगर हम पर कृपा बरस गई होती तो यकीन मानिए यह लेख निर्मल बाबा की तारीफों से भरा हुआ होता.. हा हा हा…. प्रतिक्रिया व्यक्त करने के लिए बहुत बहुत शुक्रिया

Sumit के द्वारा
April 18, 2012

ठगती है दुनिया, ठगने वाला चाइये…….सुंदर रचना ………… http://sumitnaithani23.jagranjunction.com/2012/04/18/तू-नहीं-समझेगा/

    Tamanna के द्वारा
    April 19, 2012

    लेख को अपना समय देने के लिए हार्दिक धन्यवाद सुमित जी….

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
April 18, 2012

आदरणीया तमन्ना जी, सादर सही कहा है आपने. अपने अपने विशवास का प्रश्न है. लोग स्वयं ही जाते हैं. बाबा का क्या दोष.

    Tamanna के द्वारा
    April 19, 2012

    प्रदीप जी… जनता जब तक खुद जागरुक नहीं होगी तब तक ऐसे लोग आकर मुर्ख बनाते रहेंगे…प्रतिक्रिया व्यक्त करने के लिए हार्दिक धन्यवाद


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