सरोकार

शोषित मानवता के लिए नवज्योति और आत्मविश्वास का सृजन करता ब्लॉग

54 Posts

1772 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 5462 postid : 291

अब तो अपनों का ही खून बहाया जाता है !!

Posted On: 5 Dec, 2012 में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

हालांकि मामला कुछ पुराना हो गया है लेकिन इत्तेफाकन कुछ ऐसे वाकयात हुए जिससे मैं क़ुछ दिनों पूर्व हुई चर्चित घटना को दोहरा रही हूं. यह घटना शराब के बड़े व्यापारी और अरबों की जायदाद के मालिक पॉंटी चड्ढा और उन्हीं के भाई हरदीप चड्ढा के बीच आपसी रंजिश के चलते एक-दूसरे की हत्या कर देने से संबंधित है. उल्लेखनीय है कि प्रॉपॅटी विवाद को लेकर दोनों भाइयों में बहुत लंबे समय से झगड़ा चल रहा था जिसकी वजह से दोनों भाइयों में गोलीबारी हुई. पॉंटी चड्ढा को 6 गोलियां लगीं वहीं उनके भाई हरदीप के शरीर में 8 गोलियां दागी गईं. प्रॉपर्टी के बंटवारे को लेकर दोनों भाई छत्तरपुर स्थित अपने फार्महाउस में मीटिंग कर रहे थे और इसी दौरान किसी कहासुनी में गोलियों की बौछार शुरू हो गई, जिसका नतीजा हुआ दो भाइयों की मौत.


जिस किसी ने भी इस खबर को सुना वह इस हद तक दो भाइयों की दुश्मनी को देखकर दंग रह गया. पहली नजर में हम इसे पारिवारिक झगड़ा, कलह और आपसी रंजिश का मसला बताकर नजरअंदाज कर सकते हैं, लेकिन यह सोचकर वाकई बहुत चुभन होती है कि क्या आज के समय में पैसा खून के रिश्तों से ज्यादा ताकतवर हो गया है? क्या अब आपसी भावनाओं और प्रेम का रंग पैसे की चमक के सामने फीका पड़ता जा रहा है? शायद हां, तभी तो पैसों के लिए अपनों का खून बहाए जाने से भी संकोच नहीं किया जा रहा.


भारतीय परिवार में तो बड़े भाई को पिता का स्थान दिया जाता है लेकिन अब तो शायद यह मान्यता भी अब समाप्त कर देनी चाहिए. पॉंटी चढ्ढा मायावती के बेहद करीबी व्यक्तियों में से एक थे और शराब के साथ-साथ उनका रियल इस्टेट के क्षेत्र में भी बड़ा कारोबार था. लेकिन किसे पता था यह फलता-फूलता कारोबार ही उनकी जान का दुश्मन बन जाएगा.


वैसे इस हत्याकांड में जितना दोष प्रॉपर्टी विवाद का था उतना ही मीडिया और प्रशासन का भी क्योंकि यह पहली बार नहीं था जब दोनों भाइयों के बीच गोलीबारी हुई लेकिन रसूखदार लोगों का हाई-प्रोफाइल मसला होने के कारण यह खबर दबा दी गई.


हालांकि पॉंटी चड्ढा खुद कोई पाक साफ व्यक्ति नहीं था क्योंकि उस पर अवैध कारोबार और काले धन से जुड़े होने के कई आरोप लगते रहे हैं लेकिन शायद ही किसी ने यह सोचा था कि एक भाई ही दूसरे भाई की हत्या करवा सकता है.


यहां सवाल बस इतना सा है कि आखिर ऐसा क्या हो गया जो आज हम पैसे के लिए अपनों का खून बहाने से भी पीछे नहीं हटते.


इसे आज के दौर का दुष्परिणाम कहें या फिर पारिवारिक मूल्यों की कमीं क्योंकि आज पैसों के लिए लोग अपने सगे संबंधियों के ही जान के दुश्मन बन गए हैं. प्राय: देखा जाता है कि परिवारों में शुरू से ही पैसे की महत्ता को बल दिया जाता है. बच्चों को पैसे की अहमियत तो बताई जाती है लेकिन वह भी इस तरह जैसे पैसे के आगे दुनिया बेकार है. पर शायद कोई यह नहीं सोचता कि जब वह बच्चा बड़ा होगा और दुनियादारी को समझने लगेगा तब उसकी मानसिकता जो पहले से ही पैसों पर केन्द्रित है और कितनी विस्तृत या यूं कहें विकृत होकर सामने आएगी कि वे अपने ही सगे भाई की जान लेने पर उतारू हो जाएंगे.


हाई प्रोफाइल मामला होने के कारण चड्ढा बंधुओं का केस सबके सामने आ गया लेकिन हम इस बात से भी इंकार नहीं कर सकते कि यह कोई पहला मसला नहीं है जब पैसों या फिर प्रॉपर्टी विवाद के चलते अपनों के बीच खून की होली खेली गई. पैसों के सामने रिश्ते किस हद तक अपनी जरूरत कम करवाते जा रहे हैं इस बात का तो जिक्र करना भी अब बेमानी हो गया है.


आज के समय में अगर कुछ भी जरूरी रह गया है तो वह है सिर्फ पैसा और संपत्ति का स्वामित्व. इन सब के बीच आपसी प्यार और लगाव, एक-दूसरे के दुख में बहने वाले आंसुओं के साथ-साथ मूल्यों और अपनत्व की दुहाई देने वाले लोगों की कमी भी महसूस होने लगी है.




Tags:           

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (2 votes, average: 4.50 out of 5)
Loading ... Loading ...

9 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

mayankkumar के द्वारा
December 10, 2012

आपकी कलम में चुंबकीय आकष्ज्र्ञण है जो सहज ही पाठकों को अपनी ओर आकष्ज्र्ञित करता है …….. पढ़कर कृतज्ञ हुआ ….. हमारे ब्लाॅग पर भी पधारें … !

manoranjanthakur के द्वारा
December 9, 2012

सुंदर . सामयिक पोस्ट … बधाई

प्रवीण दीक्षित के द्वारा
December 7, 2012

यथार्थवादी,रोचक और तथ्यपरक लेख . बधाई . कृपया हमारी पोस्ट्स का भी अवलोकन करें . लिंक :www.praveendixit.jagranjunction.com धन्यवाद !

yatindranathchaturvedi के द्वारा
December 7, 2012

अहिंसा जैसे शब्द आत्म मंथन मांग रहे है

Madan Mohan saxena के द्वारा
December 7, 2012

आपके अद्भुत लेखन को नमन,बहुत सराहनीय प्रस्तुति.बहुत सुंदर बहुत सुंदर भावनायें और शब्द भी …बेह्तरीन अभिव्यक्ति …!!शुभकामनायें. आपका ब्लॉग देखा मैने और कुछ अपने विचारो से हमें भी अवगत करवाते रहिये.

akraktale के द्वारा
December 6, 2012

तमन्ना जी                सादर, सच है आजकल मानवीय मूल्यों पर भौतिकतावाद हावी है. 

Ashish Mishra के द्वारा
December 6, 2012

प्रथम द्रष्टया तो लोग इसे भाइयों की आपसी रंजिश का परिणाम ही बता रहें हैं पर कही न कही कोई साजिश जरूर है. पर शायद ही उसका पर्दा फाश हो सके.

abodhbaalak के द्वारा
December 5, 2012

जैसा आपने खुद ही कहा है की आज के दौर में पैसा ही ….., रिश्ते नाते तो अब खोखले होते जा रहे हैं तमन्ना जी, पर फिर भी कहीं न कहीं कुछ अच्छाई बाकी है…… उम्मीद का किरण अभी भी ………

December 5, 2012

तमन्ना जी निसंकोच आपका लेख सार्थक है बधाई ,,,


topic of the week



latest from jagran