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हिंदुत्व के प्रतीकों से खेल रहा है “हिंदू हृदय सम्राट”

Posted On: 19 Oct, 2013 पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

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narendra modiहिन्दुत्व को ढाल बनाकर जनता से वोट की अपील करने वाले मोदी आज खुद ही अपने बिछाए जाल में फंसते नजर आ रहे हैं. या तो वे छद्म धर्मनिरपेक्षता का चोला ओढ़कर अन्य धर्मों और संप्रदायों के लोगों के बीच अपनी पहुंच बनाना चाह रहे हैं या फिर हिन्दुत्व का पुरोधा कहलवाए जाने के बाद अब वो अन्य धर्मों के संरक्षण के लिए भी खुद को तैयार कर चुके हैं बस यही बात हमारी समझ से बाहर है.


आपको याद होगा कि अभी पिछले दिनों नरेंद्र मोदी ने अपने एक बयान में देवालय से पहले शौचालय जैसी बात कही थी. इसके पीछे उनका मत था कि हमें देवालयों की नहीं बल्कि शौचालय की जरूरत है. असल में देवालय और शौचालय का यह मसला पहली बार नहीं उठा बल्कि ग्रामीण विकास मंत्री रहते हुए जयराम रमेश स्वच्छता और सुरक्षा का हवाला देते हुए यह मुद्दा पहले ही उठा चुके थे. लेकिन जब जयराम रमेश ने यह मुद्दा उठाया था तब उनके विरोध में स्वर उठाने वाले वही लोग थे जो आज मोदी के इस कथन का समर्थन कर रहे हैं. इतना ही नहीं स्वयं इस बात को कहने वाले नरेंद्र मोदी भी जयराम रमेश पर आक्षेप लगाने वालों की सूची में थे. जाहिर सी बात है नरेंद्र मोदी हिन्दुत्व के संरक्षक के तौर पर अपनी पहचान स्थापित करने में लगे थे तो उनके द्वारा ऐसे विरोध, आक्षेप इसी कड़ी का एक हिस्सा मान लिए गए.


लेकिन अचानक अब नरेंद्र मोदी थोड़े बदले-बदले से लगने लगे हैं, उनके कृतीत्वों और कथनों में बहुत अंतर दिखने लगा है. वह खुद को हिन्दुओं का सबसे बड़ा पुरोधा कहते हैं लेकिन जब हिन्दुत्व के संरक्षण की बात आती है तो उनके वक्तव्यों में बड़ा अंतर महसूस होने लगता है.


देवालय हिन्दू धर्म का प्रतीक है और उसकी तुलना शौचालय के साथ कर नरेंद्र मोदी ने हिन्दू धर्म को आहत तो किया ही साथ ही जिन हिन्दुओं के संरक्षक के तौर पर उन्हें जाना जाता है उनके साथ भी उन्होंने विश्वासघात किया. इतना ही नहीं शोभन सरकार नामक साधु के सपने में आए खजाने के बाद संबंधित किले की खुदाई शुरू किए जाने जैसी घटना पर आए नरेंद्र मोदी के बयान ने फिर एक बार यह सोचने के लिए विवश कर दिया है कि क्या वाकई प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी के तौर नरेंद्र मोदी की प्राथमिकताएं और उनके स्टैंड बदल गए हैं?


उल्लेखनीय है किले की खुदाई जैसी बात पर नरेंद्र मोदी ने बिना कुछ सोचे समझे सरकार पर चुटकी ले डाली. चेन्नई में अपनी रैली के दौरान नरेंद्र मोदी का कहना था कि एक साधु के सपने पर खजाने की खुदाई में जुटी केंद्र सरकार पूरी दुनिया में भारत की जगहंसाई करा रही है. जबकि सच तो यह है कि वो खुदाई सरकार नहीं पुरातत्व वैज्ञानिकों के दल द्वारा की जा रही है और वह किसी सपने की बिना पर नहीं बल्कि पुरातत्व वैज्ञानिकों के दल द्वारा की गई जांच-पड़ताल और उस स्थान पर मेटल के होने के संकेत मिलने के बाद खुदाई की जा रही है. इसमें बिना बात के सरकार को घेरने की बात कहना नरेंद्र मोदी की मानसिकता पर प्रश्नचिह्न लगाता है. सपने और साधु के नाम पर राजनीति कर रहे नरेंद्र मोदी को यह समझना चाहिए कि यह मसला सरकारी नहीं प्रशासनिक है और साधु हिन्दू धर्म से संबंधित हैं.


हो सकता है नरेंद्र मोदी अपनी सांप्रदायिक छवि को तोड़ने का प्रयास करने में जुटे हों लेकिन अगर वे ऐसा ही करते रहे तो गुजरात दंगों का दाग तो वह शायद ही कभी धो पाएं बल्कि जिन्होंने आज उन्हें इस मुकाम पर पहुंचाया है वह उन्हीं के हाथों मात खा जाएंगे.




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11 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

abhishek shukla के द्वारा
October 23, 2013

मोदी जी के अलावा आपके पास कोई अन्य विकल्प है, मायावती, मुलायम, या किसी तीसरी पार्टी मेँ कोई राष्ट्रीय छवि है, इनके समाजवाद, या जातिवाद, या प्रगतिवाद का परिणाम तो आप देख ही रही है जनता। काँग्रेस तो इस लायक नहीँ है कि दुबारा इसे चुना जाए, तो मोदी से बेहतर विकल्प जनता के पास नहीँ है।

SATYA SHEEL AGRAWAL के द्वारा
October 23, 2013

तमन्ना जी,आज मोदी देश के सबसे सशक्त भावी प्रधानमंत्री उम्मीदवार हैं,यही कारण है की उनके विरोधी उनके प्रत्येक कथन को जनता के समक्ष TOD मरोड़ कर रखते हैं और जनता को भ्रमित करते रहते हैं.उनके सभी कथन सही दिशा में प्रतीत होते हैं जो एक अच्छे प्रधानमंत्री के द्वारा होने चाहिए.अतः आपके कथन से सहमती व्यक्त नहीं कर सकता,सॉरी

anilaamil के द्वारा
October 23, 2013

आचरण में आया कोई भी सकारात्मक और खुलेपन का बदलाव स्वागतयोग्य है. विचारकों को समझना होगा की राजनेता के तौर पर मोदी अभी तक देश की अपेक्षाओं और मान्यताओं के अनुरूप आचरण कर रहे थे. जबकि अब उन्हें समस्त विश्व को भी दृष्टिगत रखना होगा, और वह इसे भली-भांति समझ रहे हैं, जो सराहनीय है. मोदी ने इन दिनों जो भी संकेत दिए हैं, मेरी समझ में उसमे ‘धर्म से पहले देश’ का भाव है, तर्कसंगत और राष्ट्रहित में है.

October 22, 2013

sahi kathan

    Tamanna के द्वारा
    November 7, 2013

    धन्यवाद शालिनी जी,

शिवेन्द्र के द्वारा
October 22, 2013

ब्लॉग पर ज्यादा हिट पाने का इससे ज्यादा अच्छा और कोई दूसरा उपाय नहीं था की सीधे मोदी को हिट करो, परन्तु अफ़सोस इरादा नाकामयाब ही रहा.

    Tamanna के द्वारा
    November 7, 2013

    शिवेन्द्र जी….सर्वप्रथम तो मेरे ब्लॉग को अपना समय देने के लिए धन्यवाद…. मैं बस आपसे यही कहना चाहती हूं कि हमें हर तरह की राय और विचारों का स्वागत करना चाहिए. हम जो भी लिखें जरूरी नहीं है कि उसे लिखने का इरादा हिट होना ही हो..कभी कभी हम अपने लिए भी कुछ लिखते हैं और अगर आप सभी के साथ मैं अपने विचारों को बांट रही हों तो इसमें बुरा भी तो कुछ नहीं है.

Rajesh Kumar Srivastav के द्वारा
October 19, 2013

नरेंद्र मोदी हिन्दुत्व के संरक्षक के तौर पर अपनी पहचान स्थापित करने में नहीं लगे है बल्कि वे राष्ट्रवाद के संरक्षक बन चुके है/ मेरी एक रचना लिंग-भेद (एक लघु कथा) पर आपकी प्रतिक्रया चाहूँगा / http://rajeshkumarsrivastav.jagranjunction.com/2013/10/19/%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%97-%E0%A4%AD%E0%A5%87%E0%A4%A6-%E0%A4%8F%E0%A4%95-%E0%A4%B2%E0%A4%98%E0%A5%81-%E0%A4%95%E0%A4%A5%E0%A4%BE/

    Tamanna के द्वारा
    November 7, 2013

    राजेश जी, मोदी की छवि कभी भी राष्ट्रवादी के तौर पर नहीं रही है. हिन्दू उन्हें अपना संरक्षक मानते हैं और अगर अब वे अपने वोट-बैंक को समझने की भूल कर रहे हैं तो इसमें उन्हीं की गलती है…बहुत हद तक संभव है उन्हें अपने इस भूल का परिणाम भुगतना पड़े

munish के द्वारा
October 19, 2013

आदरणीय तमन्ना जी, बहुत दिनों बाद आपका लेख पढ़ा, कहाँ गायब रहीं इतने दिनों :) ये बात सभी के साथ है की समय और आवश्यकता के अनुसार रणनीति बदलनी पड़ती है, लेकिन आपका ये कथन गलत है की जयराम रमेश जी ने भी यही मसला उठाया था, यदि मसला यही था तो भी उनका शब्द संचयन बिलकुल गलत था क्योंकि उन्होंने कहा था की ” शौचालय मंदिरों से अधिक पवित्र हैं” इसलिए नरेन्द्र मोदी की और जयराम रमेश की बातों मेंकहीं कोई समानता नहीं है.

    Tamanna के द्वारा
    November 7, 2013

    मुनीष जी,प्रतिक्रिया व्यक्त करने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद…मेरा ये लेख मरेन्द्र मोदी की बदलती फितरत और प्राथमिकताओं पर केन्द्रित है. शौलालय के बारे में जयराम रमेश ने क्या कहा, किस संदर्भ में कहा ये बात और है लेकिन मोदी अब क्या कर रहे हैं ये बात ज्यादा मायनें रखती है.


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